न्यूयॉर्क। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित किया। उनके भाषण की शुरुआत ही विरोध और वॉकआउट के बीच हुई। नेतन्याहू के मंच पर पहुंचते ही कई देशों के प्रतिनिधि सदन से बाहर निकल गए। इसके चलते महासभा कक्ष की बड़ी संख्या में सीटें खाली नजर आईं। इसके बावजूद नेतन्याहू ने अपना संबोधन जारी रखा और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का बचाव करते हुए अपने विरोधियों पर तीखे हमले किए।
नेतन्याहू के भाषण के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब उन्होंने एक पेजर हाथ में उठाया। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा, “क्या आपको बीपर्स याद हैं?” यह संदर्भ सितंबर 2024 में लेबनान और सीरिया में हिजबुल्लाह के सदस्यों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे पेजर्स में हुए विस्फोटों से जुड़ा था। इन धमाकों में बड़ी संख्या में लोग मारे और घायल हुए थे। हिजबुल्लाह ने इस घटना के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में नवंबर 2024 में नेतन्याहू ने कथित तौर पर पहली बार इजरायल की भूमिका स्वीकार की थी।
पेजर दिखाते हुए नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह को लेकर कहा कि उसे वह घटना निश्चित तौर पर याद होगी। उन्होंने इसके साथ ही दावा किया कि इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई के दौरान उसके बड़े हथियार भंडार को भी निशाना बनाया। अपने भाषण में उन्होंने इजरायल की सैन्य क्षमताओं और उसके अभियानों को देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए अपनी सरकार के फैसलों का बचाव किया।
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में इजरायल के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में उसके सैनिकों ने सात मोर्चों पर युद्ध लड़ा है। उन्होंने इन मोर्चों में हमास, हिजबुल्लाह, हूती, ईरान, इराक में सक्रिय मिलिशिया, सीरिया में सक्रिय मिलिशिया और वेस्ट बैंक में मौजूद फिलिस्तीनी लड़ाकों का नाम लिया। उन्होंने सवाल किया कि न्यू जर्सी के आकार के बराबर देश सात मोर्चों पर तीन साल तक युद्ध कैसे लड़ सकता है।
इजरायली प्रधानमंत्री ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और उसके परमाणु ठिकानों पर हमलों का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमताओं को खत्म करना उनके लिए जरूरी था। उन्होंने ईरान की सरकार पर इजरायल और दुनिया के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया और दावा किया कि ईरानी शासन का पतन दूर नहीं है।
उनके भाषण के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा के अंदर विरोध का दृश्य भी देखने को मिला। नेतन्याहू के मंच पर पहुंचने से पहले और भाषण शुरू होने के दौरान दर्जनों प्रतिनिधि बाहर चले गए। कुछ प्रतिनिधियों की ओर से विरोध और हूटिंग की भी खबरें सामने आईं। इसके जवाब में नेतन्याहू ने उन लोगों पर टिप्पणी की जो हॉल छोड़कर जा रहे थे और अपने भाषण को जारी रखा।
नेतन्याहू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की आलोचना का भी जवाब दिया। उन्होंने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया और अपने देश के सैन्य अभियान को सुरक्षा और आत्मरक्षा से जोड़कर पेश किया। उन्होंने ईरान, हमास और हिजबुल्लाह समेत अपने विरोधियों पर भी निशाना साधा। उनके भाषण में अमेरिका और इजरायल के संबंधों का भी उल्लेख हुआ। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन की प्रशंसा करते हुए दोनों देशों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।
नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और अन्य आलोचकों पर भी निशाना साधा। उन्होंने अपने भाषण में इजरायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आलोचना को चुनौती देते हुए कहा कि उनके देश को अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई जारी रखनी होगी। उनके संबोधन में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न सशस्त्र समूहों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं प्रमुखता से सामने आईं।
इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल को लेकर अंतरराष्ट्रीय मतभेद भी स्पष्ट दिखाई दिए। नेतन्याहू के भाषण से पहले कई देशों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने इजरायल की गाजा नीति की आलोचना की थी। ऐसे माहौल में उनका भाषण हुआ, जिसमें उन्होंने अपने देश के सैन्य अभियानों का बचाव करने के साथ-साथ आलोचकों को जवाब देने पर भी जोर दिया।
नेतन्याहू का पेजर दिखाना उनके भाषण का सबसे चर्चित दृश्य बन गया। 2024 के हिजबुल्लाह पेजर विस्फोटों का संदर्भ देकर उन्होंने इजरायल की खुफिया और सैन्य क्षमता का संदेश देने की कोशिश की। वहीं, महासभा से प्रतिनिधियों का वॉकआउट इस बात को रेखांकित करता है कि गाजा और व्यापक मध्य-पूर्व संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
कुल मिलाकर नेतन्याहू का UNGA संबोधन इजरायल की सुरक्षा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, हमास और हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान तथा अंतरराष्ट्रीय आलोचना पर केंद्रित रहा। भाषण के दौरान पेजर दिखाने की घटना और बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों का हॉल से बाहर जाना इस संबोधन के प्रमुख घटनाक्रम रहे।