गिलगित-बाल्टिस्तान। पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में सरकार की टैक्स नीतियों और फूड एक्ट 2022 को लागू किए जाने के विरोध में व्यापारियों ने बाजार बंद कर अपना विरोध दर्ज कराया है। स्थानीय कारोबारी संगठनों का आरोप है कि पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे व्यापारियों पर नए नियमों और शुल्कों के जरिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है। व्यापारियों ने सरकार की नीतियों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के फैसलों से क्षेत्र में कारोबार करना और मुश्किल होता जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, गिलगित-बाल्टिस्तान के विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने फूड एक्ट 2022 के तहत लागू किए गए शुल्क ढांचे, अनिवार्य पंजीकरण और कर संबंधी प्रावधानों का विरोध किया है। व्यापारियों का कहना है कि इन नियमों के कारण छोटे और स्थानीय कारोबारियों के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी समस्याओं को पर्याप्त महत्व दिए बिना नए प्रावधान लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
व्यापारियों के विरोध का मुख्य कारण फूड एक्ट 2022 के तहत निर्धारित शुल्क और पंजीकरण की अनिवार्यता है। कारोबारी संगठनों का कहना है कि इन प्रावधानों से व्यापारियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। उनका तर्क है कि पहले से मौजूद आर्थिक दबाव के बीच नए शुल्क और कर संबंधी उपाय स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान अंजुमन-ए-ताजिरां के अध्यक्ष फखरुद्दीन ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले व्यापारियों को आश्वासन दिया गया था कि फूड एक्ट 2022 को गिलगित-बाल्टिस्तान में लागू नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद प्रशासन ने कानून को लागू करने की प्रक्रिया जारी रखी है। उन्होंने इसे पूर्व में दिए गए आश्वासन के विपरीत बताया।
फखरुद्दीन ने विरोध कर रहे व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कारोबारी समुदाय को लगातार विभिन्न प्रशासनिक उपायों के कारण दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, व्यापारियों की समस्याएं पहले से बनी हुई हैं और नए वित्तीय प्रावधान इन परेशानियों को और बढ़ा रहे हैं। उन्होंने सरकार से व्यापारियों की चिंताओं को गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस दौरान उन्होंने विथहोल्डिंग टैक्स के खिलाफ पहले हुए विरोध प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। फखरुद्दीन ने बताया कि इस मुद्दे पर व्यापारियों ने सात दिनों तक विरोध किया था। उन्होंने उस आंदोलन को गिलगित-बाल्टिस्तान के कारोबारी समुदाय का ऐतिहासिक प्रदर्शन बताया। उनके मुताबिक, उस समय भी व्यापारियों ने कर संबंधी नीतियों का सामूहिक रूप से विरोध किया था।
गिलगित-बाल्टिस्तान में व्यापारियों की नाराजगी केवल नए शुल्कों तक सीमित नहीं है। कारोबारी संगठनों ने अनिवार्य पंजीकरण की शर्तों और कर लागू करने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इन उपायों से व्यवसायों पर आर्थिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। विशेष रूप से उन कारोबारियों के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जो पहले से सीमित संसाधनों के साथ अपना व्यवसाय चला रहे हैं।
व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि अधिकारियों की ओर से बार-बार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं, जिनसे कारोबारी समुदाय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। उनका कहना है कि व्यापार से संबंधित नीतियों को लागू करते समय स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों और व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बाजार बंद करके किए गए इस विरोध ने गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रशासन और कारोबारी समुदाय के बीच टैक्स संबंधी नीतियों को लेकर जारी मतभेदों को सामने ला दिया है। व्यापारियों का कहना है कि उनका विरोध उन प्रावधानों के खिलाफ है, जिन्हें वे अपने व्यवसाय के लिए आर्थिक रूप से बोझिल मानते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि विरोध के बाद फूड एक्ट 2022 के प्रावधानों में किसी तरह के बदलाव पर विचार किया जा रहा है या नहीं। इस बीच व्यापारियों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराते हुए कर नीतियों और नए शुल्कों को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर ध्यान देने की मांग की है।