पेशावर। पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में गवर्नर शासन और आपातकाल लागू किए जाने के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को खैबर-पख्तूनख्वा बार काउंसिल के आह्वान पर पूरे प्रांत में वकीलों ने अदालती कार्यवाही का बहिष्कार किया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण कई जिलों में न्यायिक कामकाज प्रभावित हुआ और मुकदमों की सुनवाई बाधित रही। वकीलों ने संघीय सरकार के फैसले को असंवैधानिक और गैरकानूनी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
पूरे प्रांत में अदालतों का बहिष्कार
पाकिस्तानी समाचार पत्र 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, खैबर-पख्तूनख्वा बार काउंसिल ने गवर्नर शासन और आपातकाल के विरोध में प्रांतव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। इसके बाद विभिन्न जिलों के वकील सोमवार को अदालतों में पेश नहीं हुए।वकीलों की अनुपस्थिति से नियमित सुनवाई और अन्य न्यायिक कार्य प्रभावित हुए। कई मामलों में पक्षकारों को अदालती कार्यवाही आगे बढ़ने का इंतजार करना पड़ा। बार काउंसिल ने कहा कि उसका विरोध संघीय सरकार के उन कदमों के खिलाफ है, जिनसे प्रांत की संवैधानिक स्थिति और स्वायत्तता प्रभावित हुई है।
गवर्नर शासन को बताया असंवैधानिक
खैबर-पख्तूनख्वा बार काउंसिल ने गवर्नर शासन और आपातकाल लागू करने के फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है। कानूनी निकाय का कहना है कि ऐसे निर्णय लेने से पहले संविधान में निर्धारित शर्तों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है।बार काउंसिल ने सवाल उठाया कि क्या संघीय सरकार द्वारा उठाए गए कदम संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हैं। परिषद ने सरकार से अपने फैसले की समीक्षा करने और गवर्नर शासन तथा आपातकाल संबंधी आदेश वापस लेने की मांग की है।वकीलों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रांतों की स्वायत्तता और निर्वाचित संस्थाओं के अधिकारों का सम्मान जरूरी है।
11 अक्टूबर को लागू किया गया था आपातकाल
पाकिस्तान में 11 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर खैबर-पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले को मंजूरी दी थी।संघीय सरकार ने इस कदम के पीछे प्रांत में बढ़ती आतंकवादी हिंसा और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का हवाला दिया। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और अन्य विपक्षी समूहों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम बताया है।
पेशावर हाई कोर्ट में भी पहुंचा मामला
गवर्नर शासन और आपातकाल की संवैधानिक वैधता को पेशावर हाई कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि संघीय सरकार ने आवश्यक कानूनी शर्तों का पालन किए बिना यह निर्णय लिया।मंगलवार, 20 अक्टूबर को पेशावर हाई कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए संघीय सरकार, अटॉर्नी जनरल और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए।याचिकाओं में दावा किया गया है कि गवर्नर शासन लागू करने से प्रांतीय स्वायत्तता और लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। हालांकि इन दावों की अंतिम संवैधानिक वैधता का निर्धारण अदालत को करना है।
राजनीतिक तनाव के बीच बढ़ी कानूनी लड़ाई
खैबर-पख्तूनख्वा को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI का प्रमुख राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। प्रांत में गवर्नर शासन लागू होने के बाद संघीय सरकार और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।बार काउंसिल ने चिंता जताई है कि राजनीतिक मतभेदों के आधार पर संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करना संघीय व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल पैदा कर सकता है।
24 अक्टूबर को आगे की रणनीति पर बैठक
खैबर-पख्तूनख्वा बार काउंसिल ने 24 अक्टूबर को जिला और तहसील बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इसमें मौजूदा परिस्थितियों की समीक्षा और आंदोलन की अगली रणनीति पर चर्चा की जाएगी।कानूनी संगठनों का कहना है कि वे संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन और प्रांतीय अधिकारों की रक्षा के लिए अपना विरोध जारी रखेंगे।फिलहाल गवर्नर शासन और आपातकाल को लेकर कानूनी तथा राजनीतिक विवाद बना हुआ है। ऐसे में पेशावर हाई कोर्ट की आगामी कार्यवाही और संघीय सरकार के अगले कदमों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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