फ्रांस में बड़ा साइबर अटैक, सुपरमार्केट के फ्रिजों में लगी आग
फ्रांस में हैकरों का बड़ा हमला
पेरिस : फ्रांस में एक बड़े साइबर हमले ने सैकड़ों सुपरमार्केट की व्यवस्था को प्रभावित कर दिया। हैकरों ने सुपरमार्केट में लगे फ्रिज और फ्रीजर के तापमान को दूर से नियंत्रित कर अचानक बढ़ा दिया। कई स्थानों पर तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे फ्रिजों में रखा खाने-पीने का सामान खराब हो गया और कुछ दुकानों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। फ्रांसीसी अधिकारियों ने इस घटना को बड़े पैमाने का साइबर हमला बताया है।
यह हमला रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात हुआ। हैकरों ने सुपरमार्केट में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल रेफ्रिजरेशन कंट्रोल सिस्टम को निशाना बनाया। इन सिस्टम के जरिए फ्रिज और फ्रीजर का तापमान नियंत्रित किया जाता है। हमलावरों ने इन उपकरणों के नियंत्रण में सेंध लगाकर डीफ्रॉस्ट प्रक्रिया को सक्रिय कर दिया, जिससे फ्रिज ठंडे रहने के बजाय गर्म होने लगे। हमले का असर फ्रांस की कई प्रमुख सुपरमार्केट कंपनियों पर पड़ा। इनमें इंटरमार्शे, कैरेफोर, मोनोप्रिक्स, लेक्लर्क और कोऑपरेटिव यू जैसी बड़ी रिटेल चेन शामिल हैं। अलग-अलग कंपनियों के सैकड़ों स्टोर इस साइबर हमले की चपेट में आए। इंटरमार्शे के करीब 150 स्टोर प्रभावित हुए। कुछ स्थानों पर लगभग छह घंटे तक फ्रिजों का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस बना रहा। कैरेफोर के लगभग 80 स्टोर और मोनोप्रिक्स के करीब पांच प्रतिशत स्टोर भी प्रभावित हुए।
इस साइबर हमले के कारण सुपरमार्केट में रखा बड़ी मात्रा में दूध, मांस, मछली, फ्रोजन फूड और अन्य जल्दी खराब होने वाला सामान सुरक्षित तापमान पर नहीं रह सका। खाद्य सुरक्षा के नियमों को ध्यान में रखते हुए प्रभावित दुकानों को बड़ी मात्रा में सामान हटाना पड़ा। कई दुकानों में कर्मचारियों को सुबह पहुंचने पर फ्रिज बंद या असामान्य रूप से गर्म मिले। इससे सुपरमार्केट के संचालन पर असर पड़ा और कुछ स्थानों पर फ्रोजन फूड की बिक्री रोकनी पड़ी। खराब हुए खाद्य पदार्थों के कारण कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
इस हमले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि साइबर अपराधियों को दुकानों में शारीरिक रूप से प्रवेश करने की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने इंटरनेट से जुड़े नियंत्रण उपकरणों की कमजोरियों का फायदा उठाकर सुपरमार्केट की रेफ्रिजरेशन व्यवस्था को प्रभावित किया। शुरुआती तकनीकी जांच में डेनमार्क की कंपनी डैनफॉस के रेफ्रिजरेशन कंट्रोल सिस्टम से जुड़ी सुरक्षा खामियों की ओर ध्यान गया है। कंपनी के अनुसार, प्रभावित उपकरणों में पुराने फर्मवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसे पुराने सॉफ्टवेयर संस्करणों में सुरक्षा संबंधी कमजोरियां बनी रह सकती हैं।
फ्रांस के पेरिस अभियोजक कार्यालय ने इस साइबर हमले की जांच शुरू कर दी है। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी एएनएसएसआई (ANSSI) को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हमलावरों ने किस प्रकार सिस्टम में प्रवेश किया और कितने उपकरण प्रभावित हुए। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इसी तरह के साइबर हमलों का खतरा दूसरे यूरोपीय देशों में भी तो नहीं है।
फ्रांसीसी अधिकारी अन्य यूरोपीय देशों के संबंधित संस्थानों के साथ संपर्क में हैं। स्पेन, पुर्तगाल, पोलैंड, जर्मनी और बेल्जियम में भी संभावित प्रभाव की जानकारी सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग देशों में हमले की वास्तविक स्थिति की पुष्टि जांच के आधार पर ही होगी। इस घटना ने खाद्य आपूर्ति व्यवस्था की साइबर सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आधुनिक सुपरमार्केट में रेफ्रिजरेशन, स्टॉक प्रबंधन और अन्य कई व्यवस्थाएं डिजिटल उपकरणों से जुड़ी रहती हैं। ऐसे में किसी एक महत्वपूर्ण नियंत्रण प्रणाली की सुरक्षा में सेंध लगने से व्यापक नुकसान हो सकता है।
यूरोपीय संघ के खाद्य एवं कृषि आयुक्त क्रिस्टोफ हैनसेन ने भी खाद्य आपूर्ति प्रणालियों को साइबर हमलों से सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है। फिलहाल इस साइबर हमले की जिम्मेदारी किसी हैकर समूह ने सार्वजनिक रूप से नहीं ली है। प्रभावित सुपरमार्केट अपनी व्यवस्थाएं बहाल करने और हुए नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं। इस घटना ने स्पष्ट किया है कि साइबर हमले अब केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल सिस्टम के जरिए वास्तविक दुनिया के उपकरणों और जरूरी सेवाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं।