इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बढ़ती हिंसा के बीच बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने पिछले कुछ दिनों में 22 अलग-अलग जगहों पर हमले किए और इन हमलों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इन आंकड़ों पर अलग जानकारी सामने आई है।

बीएलए के अनुसार, ये हमले बलूचिस्तान के कई जिलों में किए गए, जिनमें सुरक्षा बलों के ठिकाने, पुलिस प्रतिष्ठान, रेलवे बुनियादी ढांचे और अन्य सरकारी व रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया गया। संगठन ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा बलों के खिलाफ चल रहे सशस्त्र अभियान का हिस्सा है।
कई जिलों में हमलों का दावा
बीएलए ने अपने बयान में दावा किया कि कलात और सोराब इलाकों में हुए आईईडी हमलों में कई सुरक्षा कर्मी मारे गए। इसके अलावा चागई, खारान, पंजगुर, नुश्की, तुरबत और क्वेटा जैसे क्षेत्रों में भी हमले करने का दावा किया गया है। संगठन ने रेलवे ट्रैक और व्यावसायिक वाहनों को निशाना बनाने की बात भी कही है। बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी हिंसा जारी है। बीएलए पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग करने वाला सशस्त्र संगठन है, जो पहले भी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सरकारी प्रतिष्ठानों पर हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है।
पाकिस्तान ने नहीं की पुष्टि
बीएलए के 26 सैनिकों को मारने और 22 हमलों के दावे की पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने इससे पहले बलूचिस्तान में अभियानों के दौरान आतंकियों के मारे जाने की जानकारी दी है।
पाकिस्तान का बलूचिस्तान क्षेत्र लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। यहां अलगाववादी संगठनों के अलावा अन्य आतंकी समूह भी सक्रिय रहे हैं। क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) जैसी परियोजनाओं के कारण बलूचिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
सुरक्षा हालात पर बढ़ी चिंता
बीएलए की ओर से लगातार हमलों के दावों के बाद बलूचिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियान चला रही हैं, जबकि बलूच संगठनों का कहना है कि वे अपने राजनीतिक और क्षेत्रीय अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बलूचिस्तान में जारी यह संघर्ष पाकिस्तान के लिए लंबे समय से बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और बीएलए की गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।
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