न्यूयॉर्क: अमेरिकी शेयर बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई जबरदस्त गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को वॉल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली के कारण नैस्डैक-100 इंडेक्स में शामिल कंपनियों का करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर का बाजार मूल्य घट गया। तकनीकी कंपनियों के शेयरों में आई इस गिरावट को हाल के वर्षों की सबसे बड़ी बिकवाली में गिना जा रहा है। एआई कंपनियों में भारी निवेश, बढ़ते खर्च और संभावित सरकारी नियमों को लेकर निवेशकों की चिंता इस गिरावट की प्रमुख वजह रही।
अमेरिकी बाजार के प्रमुख सूचकांक नैस्डैक कंपोजिट में लगभग 5.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, नैस्डैक-100 करीब 6.4 प्रतिशत टूट गया। एसएंडपी 500 इंडेक्स में लगभग 4.4 प्रतिशत की गिरावट आई। डाउ जोन्स भी करीब 1,833 अंक फिसल गया। तकनीकी शेयरों की बिकवाली का असर पूरे अमेरिकी शेयर बाजार पर दिखाई दिया।
सबसे ज्यादा नुकसान उन कंपनियों को हुआ, जिनका कारोबार एआई चिप, डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग से जुड़ा है। दिग्गज चिप निर्माता एनवीडिया के शेयर करीब 9 प्रतिशत गिर गए, जबकि एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज यानी AMD में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेमीकंडक्टर कंपनियों का प्रमुख सूचकांक करीब 12 प्रतिशत टूट गया। इस बिकवाली ने एआई क्षेत्र में निवेश करने वालों की चिंता बढ़ा दी।
बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के बाद पैदा हुई नियामकीय अनिश्चितता रही। निवेशकों को आशंका है कि एआई उद्योग और विशेष रूप से डेटा सेंटर परियोजनाओं पर भविष्य में सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं। इससे नई परियोजनाओं की मंजूरी, निर्माण और निवेश की रफ्तार प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, यह बाजार की आशंका है, किसी नए कानून के लागू होने की पुष्टि नहीं।
एआई क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। तकनीकी कंपनियां डेटा सेंटर बनाने, उन्नत चिप खरीदने और एआई मॉडल विकसित करने पर अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। लेकिन अब निवेशक सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े निवेश से कंपनियों को कब और कितना मुनाफा मिलेगा। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी कोरवीव के शेयर करीब 10 प्रतिशत गिर गए, जबकि नेबियस में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और अल्फाबेट जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर भी बिकवाली से प्रभावित हुए। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में दबाव केवल छोटी एआई कंपनियों तक सीमित नहीं रहा।
अमेरिकी शेयर बाजार की इस गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान में तकनीकी शेयरों पर दबाव बढ़ा। निवेशकों ने विशेष रूप से उन कंपनियों के शेयर बेचे, जिनका कारोबार अमेरिकी एआई उद्योग और सेमीकंडक्टर आपूर्ति से जुड़ा हुआ है। 6 नवंबर को अमेरिकी बाजार में कुछ सुधार के संकेत भी मिले। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार के कारोबार के दौरान नैस्डैक और एसएंडपी 500 में बढ़त देखी गई। इससे संकेत मिला कि भारी गिरावट के बाद कुछ निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी शुरू की।
बाजार विशेषज्ञों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एआई शेयरों में आई गिरावट अस्थायी है या लंबे समय तक दबाव बना रहेगा। कंपनियों की कमाई, एआई परियोजनाओं पर खर्च, ब्याज दरें और अमेरिकी नियामकीय नीतियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कारक होंगे। इस बीच 2.5 ट्रिलियन डॉलर के नुकसान का अर्थ निवेशकों के खातों से इतनी नकदी निकल जाना नहीं, बल्कि शेयरों की कीमत गिरने से कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में इतनी कमी आना है। फिलहाल एआई क्षेत्र में भारी उतार-चढ़ाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
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