ED की बड़ी कार्रवाई, म्यांमार ड्रग्स तस्करी नेटवर्क के 6 आरोपी गिरफ्तार
आइजोल: सीमा पार से भारत में चलाए जा रहे अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार और वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की है। म्यांमार से भारत में हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) जैसी घातक ड्रग्स की तस्करी करने वाले एक विशाल 'नार्को-हवाला' सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए ईडी ने मिजोरम और मणिपुर के कई जिलों में एक साथ व्यापक छापेमारी अभियान चलाया।
यह पूरी कार्रवाई ईडी के आइजोल और इंफाल सब-जोनल कार्यालयों (Sub-Zonal Offices) की संयुक्त टीमों द्वारा 23 अक्टूबर 2026 को अंजाम दी गई। इस अभियान के दौरान जांच एजेंसी ने ड्रग सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं समेत कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही, मादक पदार्थों की बिक्री से अर्जित अवैध कमाई को वैध बनाने और हवाला के जरिए लेनदेन करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 1,424 बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज (Freeze) कर दिया गया है।
तस्करी और हवाला का खतरनाक सिंडिकेट
प्रारंभिक जांच और खुफिया जानकारी के अनुसार, यह गिरोह म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा का फायदा उठाकर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के रास्ते देश भर में ड्रग्स की आपूर्ति कर रहा था। म्यांमार से लाई जाने वाली हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन की खेप को मणिपुर और मिजोरम के रास्ते देश के अन्य हिस्सों में भेजा जाता था।
इस अवैध व्यापार से होने वाले करोड़ों रुपये के मुनाफे को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में मिलाने के लिए आरोपियों ने 'हवाला' और 'शेल अकाउंट्स' (फर्जी बैंक खातों) का एक जटिल जाल बिछा रखा था। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, इन 1,424 बैंक खातों का उपयोग बिना किसी वैध व्यापारिक गतिविधि के केवल ड्रग मनी के हस्तांतरण और लॉन्ड्रिंग (पैसे को सफेद करने) के लिए किया जा रहा था।
मिजोरम और मणिपुर में कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
23 अक्टूबर को तड़के शुरू हुई इस कार्रवाई में ईडी के दर्जनों अधिकारियों ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की भारी सुरक्षा के बीच मिजोरम के आइजोल, चंफाई और मणिपुर के इंफाल, चूड़ाचंदपुर सहित कई संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में एक साथ रेड मारी।
छापेमारी के दौरान ईडी की टीमों ने आरोपियों के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों से:
वित्तीय दस्तावेज: बैंक पासबुक, चेकबुक और फर्जी खातों से जुड़े कई डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: एन्क्रिप्टेड मोबाइल फोन, लैपटॉप और पेन ड्राइव बरामद किए गए, जिनका उपयोग हवाला ऑपरेटरों के साथ संवाद करने के लिए किया जाता था।
नगदी और विदेशी मुद्रा: मौके से भारी मात्रा में भारतीय मुद्रा के साथ-साथ म्यांमार की मुद्रा (क्यात) और अमेरिकी डॉलर भी बरामद किए गए हैं।
ड्रग मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
जांच एजेंसी की पड़ताल में सामने आया कि गिरोह के सदस्य गरीब और आम नागरिकों के पहचान पत्रों का दुरुपयोग करके फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे। ड्रग्स की बिक्री से मिलने वाला नकद पैसा इन खातों में किश्तों में जमा कराया जाता था और फिर डिजिटल बैंकिंग व डिजिटल वॉलेट्स के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय हवाला ऑपरेटरों तक पहुंचाया जाता था।
इस प्रक्रिया के माध्यम से नशीले पदार्थों के तस्करों को भुगतान किया जाता था और भारत के विभिन्न शहरों में फैले स्थानीय सप्लायरों को उनका हिस्सा भेजा जाता था। 1,424 बैंक खातों को एक साथ फ्रीज किए जाने से इस नार्को-हवाला नेटवर्क की वित्तीय रीढ़ पूरी तरह टूट गई है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और आगामी कार्रवाई
मामले में गिरफ्तार किए गए छह प्रमुख आरोपियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया है। उन्हें संबंधित विशेष अदालतों में पेश कर ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के अन्य प्रमुख मोहरों, स्थानीय सहयोगियों और सीमा पार बैठे मास्टरमाइंड्स के नामों का खुलासा हो सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी संपत्तियों की जब्ती और नई गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक अपराध पर कसता शिकंजा
पूर्वोत्तर भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से होने वाली ड्रग तस्करी केवल सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती है। म्यांमार सीमा से सटे इलाकों में इस तरह के मजबूत नार्को-हवाला नेटवर्क का पनपना भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ था।
ईडी की इस बड़ी कार्रवाई को नार्को-टेरर और बॉर्डर क्राइम के खिलाफ भारत सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क के जरिए खरीदी गई बेनामी संपत्तियों और अचल संपत्तियों की पहचान करने में जुट गई है, ताकि उन्हें भी कानून के तहत जब्त किया जा सके।