नई दिल्ली : 26 अक्टूबर 2026। भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। दोनों देशों ने सोमवार को नई दिल्ली में पहली भारत-कनाडा प्रवासन और गतिशीलता वार्ता (Migration and Mobility Dialogue) आयोजित की। इस बैठक में छात्रों, कुशल श्रमिकों, पेशेवरों और व्यापारिक यात्रियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने तथा प्रवासन प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की गई।विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित करना और आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशना है। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत और कनाडा के बीच मजबूत जनसंपर्क भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने की बैठक की अध्यक्षता
इस महत्वपूर्ण बैठक की संयुक्त अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (कांसुलर, पासपोर्ट, वीजा और प्रवासी भारतीय मामले) श्रीप्रिया रंगनाथन और कनाडा के आव्रजन, शरणार्थी एवं नागरिकता विभाग के उपमंत्री टेड गैलिवन ने की।बैठक के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने प्रवासन से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। विशेष रूप से शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और पेशेवर अवसरों के लिए दोनों देशों के बीच आवागमन को व्यवस्थित बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने गतिशीलता और प्रवासन प्रबंधन के लिए प्रभावी रास्ते विकसित करने पर चर्चा की।
भारतीय छात्रों और कुशल श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण पहल
भारत और कनाडा के बीच आयोजित इस वार्ता का विशेष महत्व भारतीय छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए माना जा रहा है। कनाडा लंबे समय से भारतीय विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख गंतव्य रहा है। इसके अलावा भारतीय पेशेवर विभिन्न क्षेत्रों में कनाडा की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।बैठक में दोनों देशों ने माना कि भारत की युवा और कुशल कार्यशक्ति कनाडा की जनसांख्यिकीय स्थिति और श्रम बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।हालांकि, इस बैठक में किसी नई वीजा योजना, परमिट संख्या या आव्रजन नियमों में तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं की गई है। भविष्य में ठोस नीतिगत फैसले दोनों देशों की सहमति और संबंधित प्रक्रियाओं के आधार पर लिए जाएंगे।
हर साल आयोजित होगी प्रवासन और गतिशीलता वार्ता
बैठक की प्रमुख उपलब्धियों में दोनों देशों द्वारा वार्ता के लिए संदर्भ शर्तों (Terms of Reference) पर हस्ताक्षर करना शामिल है। इससे भविष्य में प्रवासन और गतिशीलता से संबंधित मुद्दों पर नियमित बातचीत का औपचारिक ढांचा तैयार हुआ है।विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत-कनाडा प्रवासन और गतिशीलता वार्ता अब प्रतिवर्ष आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही एक संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) भी सहयोग करेगा, जो संबंधित विषयों पर बातचीत और समन्वय को आगे बढ़ाएगा।दोनों देशों ने अगली बैठक कनाडा में आयोजित करने पर सहमति जताई है। इसकी तारीख आपसी सहमति से निर्धारित की जाएगी।
भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत बनाने पर जोर
यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब भारत और कनाडा अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर बातचीत जारी है।हाल के महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच भी द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई है। दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की दिशा में भी प्रयास जारी रखे हैं।भारत और कनाडा का उद्देश्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाना है। ऐसे में प्रवासन और गतिशीलता से संबंधित सहयोग आर्थिक तथा शैक्षणिक संबंधों को भी मजबूती दे सकता है।
भविष्य में बढ़ सकते हैं शिक्षा और रोजगार के अवसर
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रवासन और गतिशीलता पर नियमित बातचीत से दोनों देशों को छात्रों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और पेशेवरों से संबंधित चुनौतियों को समझने में मदद मिल सकती है।इस पहल से भविष्य में वैध प्रवासन के रास्तों, सूचना के आदान-प्रदान और प्रशासनिक समन्वय को बेहतर बनाने की संभावनाएं बनेंगी।नई दिल्ली में आयोजित पहली वार्ता ने भारत और कनाडा के बीच संस्थागत सहयोग का एक नया मंच तैयार किया है। अब दोनों देशों की आगामी बैठकों और संयुक्त कार्य समूह की गतिविधियों से स्पष्ट होगा कि इस पहल का छात्रों, श्रमिकों और अन्य यात्रियों को कितना व्यावहारिक लाभ मिल सकेगा।
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