पटना। बिहार के प्रसिद्ध गणितज्ञ और सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार की नई डिजिटल शिक्षा पहल 'सुपर इनफिनिटी' को जापान में सराहना मिली है। जापान की प्रतिष्ठित पत्रिका 'प्रेसिडेंट' ने आनंद कुमार के शैक्षिक योगदान और उनकी डिजिटल पहल पर विशेष लेख प्रकाशित किया है। पत्रिका ने सुपर इनफिनिटी को केवल एक ऑनलाइन शिक्षण मंच नहीं, बल्कि वैश्विक शिक्षा आंदोलन बताया है। इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर के बच्चों के मन से गणित का डर दूर करना और उनमें स्वतंत्र रूप से सोचने, सवाल पूछने तथा समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।
जापानी पत्रिका ने आनंद कुमार के संघर्ष को सराहा
20 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित विशेष लेख में आनंद कुमार के जीवन के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।पत्रिका ने बताया कि आनंद कुमार बचपन से गणित के प्रति गहरी रुचि रखते थे। उनका सपना ब्रिटेन की प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने का था, लेकिन परिवार की आर्थिक परिस्थितियों के कारण वह अपना सपना पूरा नहीं कर सके।इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के प्रति अपना जुनून नहीं छोड़ा। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने सुपर 30 की शुरुआत की।यह पहल उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई, जो आर्थिक अभाव के कारण महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे।
सुपर 30 ने गरीब विद्यार्थियों को दिलाई नई पहचान
जापानी पत्रिका ने सुपर 30 की उपलब्धियों को विशेष रूप से रेखांकित किया है। इस पहल के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों यानी आईआईटी की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराई गई।लेख में बताया गया कि वर्ष 2008 में सुपर 30 के सभी 30 विद्यार्थियों ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की थी।जापानी पाठकों को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के शैक्षणिक महत्व से परिचित कराने के लिए पत्रिका ने इनकी तुलना जापान की प्रतिष्ठित टोक्यो यूनिवर्सिटी से की।आनंद कुमार की इस उपलब्धि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया।
भोलू और रिकी की कहानियों से आसान बनाते हैं गणित
आनंद कुमार की शिक्षण पद्धति भी जापानी पत्रिका के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।वे जटिल गणितीय अवधारणाओं को समझाने के लिए भोलू और रिकी नाम के दो काल्पनिक पात्रों का इस्तेमाल करते हैं। भोलू आर्थिक रूप से कमजोर परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि रिकी संपन्न परिवार से जुड़ा पात्र है।इन पात्रों की कहानियों और बातचीत के माध्यम से गणित के कठिन सवालों को सरल बनाया जाता है।इस तकनीक का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सूत्र याद कराने के बजाय गणित के पीछे छिपे तर्क को समझाना है।पत्रिका के अनुसार, यह पद्धति विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करने और स्वतंत्र चिंतन को प्रोत्साहित करने में सहायक है।
सुपर इनफिनिटी से दुनिया भर के बच्चों को मुफ्त शिक्षा
आनंद कुमार ने 12 जून 2026 को सुपर इनफिनिटी को वैश्विक स्तर पर लॉन्च किया था।इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चों को गणित और विज्ञान की शिक्षा मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें कहानी, संगीत, एनीमेशन और वास्तविक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से पढ़ाने पर जोर दिया गया है।सुपर 30 में एक समय पर सीमित विद्यार्थियों को पढ़ाने की व्यवस्था थी, लेकिन सुपर इनफिनिटी के माध्यम से इंटरनेट की सहायता से दुनिया भर के विद्यार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।यहां बुनियादी गणित से लेकर उच्च स्तर की गणितीय अवधारणाओं और भौतिक विज्ञान तक की शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने की योजना है।
जापानी भाषा में भी उपलब्ध होंगे वीडियो
पत्रिका के अनुसार, आनंद कुमार सुपर इनफिनिटी के शैक्षिक वीडियो जापानी भाषा में भी उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं।इससे जापान के विद्यार्थी भी उनकी अनूठी शिक्षण शैली का लाभ उठा सकेंगे।इसके अलावा सुपर इनफिनिटी को भविष्य में लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम के रूप में विकसित करने की तैयारी भी की जा रही है।जापानी भाषा में शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने से इस डिजिटल पहल की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और बढ़ने की संभावना है।
भारतीय शिक्षा मॉडल को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
जापानी पत्रिका में आनंद कुमार और उनकी नई पहल को मिली जगह भारतीय शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।सुपर 30 के माध्यम से गरीब और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने वाले आनंद कुमार अब डिजिटल तकनीक की सहायता से शिक्षा की पहुंच व्यापक बनाने का प्रयास कर रहे हैं।उनका लक्ष्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देना है, जिसमें आर्थिक स्थिति या भौगोलिक दूरी किसी बच्चे की प्रतिभा के विकास में बाधा न बने।सुपर इनफिनिटी इसी सोच को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की पहल है।
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