मुंबई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति दोहराते हुए कहा कि देश को अपनी सुरक्षा और आतंकवादी खतरों से बचाव करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदार देशों से भी आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' यानी शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने की अपेक्षा जताई। मुंबई में आयोजित 'फ्रीडम 250' कार्यक्रम में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मौजूदगी में जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने मुंबई के ताज होटल स्थित 26/11 स्मारक पर रुबियो द्वारा पुष्पांजलि अर्पित किए जाने की सराहना की।अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद रहे। जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बनाने और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने पर जोर दिया।
26/11 के शहीदों को श्रद्धांजलि देने पर जताया आभार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा मुंबई आतंकवादी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने की सराहना की।उन्होंने कहा कि रुबियो का ताज होटल स्थित 26/11 स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करना भारत के प्रति एकजुटता और आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकवादी हमलों में 166 लोगों की जान चली गई थी। मृतकों में छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे।जयशंकर ने कहा कि इस त्रासदी की स्मृति भारत और अमेरिका के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग के महत्व को और स्पष्ट करती है।
तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण पर अमेरिका को धन्यवाद
एस. जयशंकर ने मुंबई आतंकवादी हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को भारत प्रत्यर्पित करने के अमेरिकी प्रशासन के फैसले का भी स्वागत किया।उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।जयशंकर ने अमेरिकी प्रशासन के सहयोग की सराहना करते हुए इसे दोनों देशों के बीच मजबूत आतंकवाद विरोधी साझेदारी का उदाहरण बताया।उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अधिकार पर स्पष्ट रुख रखता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी इसी तरह की प्रतिबद्धता की अपेक्षा करता है।
आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं करेगा भारत
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं है।उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों से अपनी रक्षा करना भारत का अधिकार है। इसके साथ ही भारत चाहता है कि उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार भी आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता अपनाएं।जयशंकर के अनुसार, आतंकवाद केवल किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।
बदल रही वैश्विक व्यवस्था, सहयोग बढ़ाना जरूरी
जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक व्यवस्था महत्वपूर्ण बदलावों से गुजर रही है। ऐसे में सभी देश अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नीतियां तैयार कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कई क्षेत्रों में साझा हित मौजूद हैं। बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में दोनों देशों को आपसी सहमति के क्षेत्रों का विस्तार करना चाहिए।विदेश मंत्री ने कहा कि मतभेदों के बावजूद नियमित संवाद और साझा उद्देश्यों की पहचान मजबूत साझेदारी का आधार बन सकती है।
व्यापार, निवेश और तकनीक में नए अवसर
जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों के आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा की।उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।इसके अलावा रक्षा, नागरिक उड्डयन और महत्वपूर्ण तकनीकों में भी साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सकता है।विदेश मंत्री ने कहा कि निरंतर बातचीत और साझा हितों की पहचान भविष्य के सहयोग के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में मदद करेगी।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति पर जोर
जयशंकर ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को दोनों देशों का साझा हित बताया।उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने के लिए भारत और अमेरिका के बीच नियमित संपर्क आवश्यक है।दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में हिंद-प्रशांत क्षेत्र महत्वपूर्ण स्थान रखता है। विदेश मंत्री ने इस क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता दोहराई।
भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने का संदेश
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा के दौरान आतंकवाद, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं।मुंबई में आयोजित फ्रीडम 250 कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका को बदलती वैश्विक परिस्थितियों में साझा हितों के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता अडिग है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।रुबियो द्वारा 26/11 के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने की सराहना करते हुए जयशंकर ने दोनों देशों के बीच सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का संदेश दिया।