नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को भारत-रूस संबंधों पर केंद्रित एक सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि बातचीत के दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क यानी पीपल-टू-पीपल (P2P) संबंधों समेत द्विपक्षीय रिश्तों के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति के पक्ष में सक्रिय रूप से अपना समर्थन जारी रखे हुए है। इस तरह बैठक में एक ओर भारत-रूस आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी संघर्ष को लेकर भारत के रुख को भी रेखांकित किया गया।
व्यापार संबंधों में संतुलन पर जोर
बैठक में भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार को अधिक संतुलित तरीके से विस्तार देने की साझा महत्वाकांक्षा पर विशेष चर्चा हुई। भारत लंबे समय से रूस के साथ अपने व्यापार में ऊर्जा और कुछ प्रमुख आयात क्षेत्रों पर निर्भरता को कम कर गैर-ऊर्जा क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।सितंबर 2026 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी भारत-रूस व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में तेजी लाने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, खाद्य उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, कपड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।सलाहकार समिति की बैठक में भी व्यापार के इसी संतुलन को आगे बढ़ाने के लिए कई क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत की कोशिश है कि रूस के बाजार में भारतीय उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़े और द्विपक्षीय व्यापार केवल कुछ चुनिंदा वस्तुओं तक सीमित न रहे।
सात प्रमुख क्षेत्रों से बढ़ेगा निर्यात
बैठक में जिन प्रमुख क्षेत्रों के जरिए रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाने की बात सामने आई, उनमें ऑटो, फार्मा, खाद्य, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और कपड़ा शामिल हैं।इनमें फार्मास्यूटिकल्स भारत की महत्वपूर्ण ताकत है। रूस में किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की मांग भारतीय दवा कंपनियों के लिए संभावनाएं पैदा करती है। इसी तरह ऑटो और इंजीनियरिंग क्षेत्र में भी भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में विस्तार की गुंजाइश है।खाद्य एवं कृषि आधारित उत्पादों और समुद्री उत्पादों में निर्यात बढ़ाने से भारत की गैर-ऊर्जा वस्तुओं की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। वहीं कपड़ा और रसायन जैसे क्षेत्रों में भी भारत अपने मौजूदा उत्पादन आधार का इस्तेमाल रूस के बाजार में पैठ बढ़ाने के लिए कर सकता है। पीयूष गोयल ने सितंबर की भारत-रूस आर्थिक बैठक में भी इन क्षेत्रों को गैर-ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की महत्वपूर्ण संभावनाओं के रूप में रेखांकित किया था।
भारत-EAEU मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा
बैठक में भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर भी चर्चा हुई। भारत और EAEU के बीच FTA को लेकर वार्ता पहले से चल रही है और भारत सरकार ने इसे लंबित व्यापार समझौतों की सूची में शामिल किया है। EAEU में रूस समेत कई यूरेशियाई देश शामिल हैं।इस प्रस्तावित समझौते से दोनों पक्षों के कारोबारियों को अधिक बाजार पहुंच मिलने की संभावना है। शुल्कों में कमी और व्यापारिक बाधाओं को कम किए जाने से भारतीय कंपनियों के लिए रूसी और व्यापक यूरेशियाई बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है। दूसरी ओर, रूस और EAEU के कारोबारी भी भारतीय बाजार तक अधिक पहुंच बना सकते हैं।भारत की व्यापक FTA रणनीति में EAEU के साथ समझौता एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सरकार पहले ही कई देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौतों का नेटवर्क बढ़ाने और भारतीय निर्यातकों को नए बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।
ऊर्जा सहयोग भी रिश्तों का अहम आधार
भारत-रूस संबंधों में ऊर्जा क्षेत्र लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। दोनों देशों के बीच तेल और गैस के अलावा परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है, जबकि असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कुडनकुलम परियोजना दोनों देशों के दीर्घकालिक सहयोग का प्रमुख उदाहरण है।सलाहकार समिति की बैठक में ऊर्जा को भी द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और रूस के लिए बड़े भारतीय बाजार के साथ दीर्घकालिक आर्थिक संबंध दोनों पक्षों की प्राथमिकताओं से जुड़े हैं।अगस्त 2026 में भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक में भी ऊर्जा, व्यापार, निवेश, परमाणु ऊर्जा, कनेक्टिविटी, तकनीक, अंतरिक्ष और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा हुई थी।
कनेक्टिविटी पर भी बढ़ रहा फोकस
भारत-रूस आर्थिक संबंधों को गति देने के लिए कनेक्टिविटी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार को तेज और लागत प्रभावी बनाने के लिए वैकल्पिक परिवहन मार्गों पर काम किया जा रहा है।इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भारत को रूस और मध्य एशिया के बाजारों से जोड़ने वाली प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। इसके अलावा चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे को लेकर भी सहयोग की संभावनाएं तलाशे जा रही हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से सामान की आवाजाही और लॉजिस्टिक लागत में सुधार हो सकता है।अगस्त में हुई भारत-रूस औद्योगिक सहयोग संबंधी बैठक में भी रेलवे, आधुनिक औद्योगिक सहयोग और अन्य कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क
जयशंकर ने अपनी पोस्ट में संस्कृति और पीपल-टू-पीपल संबंधों को भी भारत-रूस रिश्तों का अहम हिस्सा बताया। दोनों देशों के बीच शिक्षा, पर्यटन, संस्कृति, छात्र आदान-प्रदान और अन्य मानवीय संपर्क लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते रहे हैं।रूसी अधिकारियों की हालिया टिप्पणियों में भी दोनों देशों के बीच मानवीय और सांस्कृतिक संपर्कों का उल्लेख किया गया है। रूस के अनुसार, भारत में रूसी और रूस में भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम लगातार आयोजित होते हैं तथा दोनों देशों के बीच छात्र और पर्यटक संपर्क भी बढ़ रहे हैं।
बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यूक्रेन संघर्ष भी रहा। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष समाप्त करने के अपने समर्थन को जारी रखता है। भारत ने लंबे समय से सार्वजनिक रूप से यही रुख अपनाया है कि विवाद का समाधान संवाद और कूटनीतिक माध्यमों से होना चाहिए।
भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन संघर्ष पर भारत की नीति अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने से भी जुड़ी हुई है। रूस भारत का लंबे समय से रणनीतिक साझेदार रहा है, जबकि भारत अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।
2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
भारत-रूस आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सितंबर 2026 में पीयूष गोयल ने कहा था कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मौजूदा व्यापार संरचना को अधिक संतुलित करना और गैर-ऊर्जा निर्यात बढ़ाना जरूरी होगा।सलाहकार समिति की बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा इसी व्यापक लक्ष्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाती है। भारत की कोशिश जहां रूस में अपने निर्यात को बढ़ाने की है, वहीं दोनों पक्ष निवेश और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर तलाश रहे हैं।कुल मिलाकर, शनिवार की बैठक में भारत-रूस संबंधों के आर्थिक, रणनीतिक और मानवीय सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। व्यापार में संतुलन, सात प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाना, EAEU के साथ संभावित FTA, ऊर्जा और कनेक्टिविटी सहयोग तथा यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए कूटनीति के समर्थन को भारत की मौजूदा रूस नीति के महत्वपूर्ण हिस्सों के रूप में सामने रखा गया।
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