न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों, BRICS में सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। ये बैठकें न्यूयॉर्क में UNGA के उच्चस्तरीय सत्र से इतर हुईं।
जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मुलाकात में भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के साथ BRICS के भीतर दोनों देशों के सहयोग पर भी बातचीत की। भारत और रूस लंबे समय से BRICS सहित कई बहुपक्षीय मंचों पर एक-दूसरे के साथ संवाद और समन्वय करते रहे हैं।
लावरोव के साथ बैठक के बाद जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने इसे एक अच्छी बैठक बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने कई मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और भारत-रूस द्विपक्षीय तथा BRICS सहयोग की स्थिति की समीक्षा की। रूस के विदेश मंत्रालय ने भी दोनों विदेश मंत्रियों की बैठक की जानकारी साझा की।
BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। भारत ने सितंबर की शुरुआत में BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भी शामिल हुए थे। ऐसे में जयशंकर और लावरोव की बैठक में BRICS सहयोग की समीक्षा को दोनों देशों के बीच जारी बहुपक्षीय संपर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है।
रूसी विदेश मंत्री के साथ बातचीत के अलावा जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं की बातचीत का प्रमुख विषय खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और उससे जुड़े ताजा घटनाक्रम रहे। बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि ईरानी विदेश मंत्री के साथ उनकी बातचीत में खाड़ी संघर्ष से संबंधित नवीनतम घटनाक्रम पर चर्चा हुई और दोनों पक्ष आगे भी संपर्क में बने रहेंगे।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव ऐसे समय बढ़ा हुआ है, जब वहां की सुरक्षा स्थिति, समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में भी पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के संघर्ष प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। क्षेत्रीय देशों की ओर से सुरक्षा और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया जा रहा है।
जयशंकर ने UNGA से इतर समुद्री सुरक्षा से जुड़े एक कार्यक्रम में भी हाल के महीनों में खाड़ी, लाल सागर और काला सागर सहित विभिन्न क्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हुए हमलों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से समुद्री व्यापार बाधित होता है और निर्दोष लोगों की जान जाती है।
भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र का घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। पश्चिम एशिया के देशों के साथ भारत के व्यापक आर्थिक, ऊर्जा और प्रवासी भारतीयों से जुड़े संबंध हैं। इसी कारण भारत क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रम पर लगातार नजर रखने के साथ संबंधित देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है। जयशंकर ने UNGA के दौरान इराक के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री फुआद हुसैन से भी बातचीत की, जिसमें पश्चिम एशिया के घटनाक्रम के साथ भारत-इराक आर्थिक और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हुई।
इससे पहले रूसी विदेश मंत्री लावरोव और ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने भी न्यूयॉर्क में मुलाकात की थी। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने ईरान से जुड़े घटनाक्रम सहित क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत की। रूस और ईरान ने संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ते पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने रूस और ईरान के बीच पहले हुए द्विपक्षीय समझौतों के क्रियान्वयन और आगामी संपर्कों पर भी चर्चा की।
जयशंकर का न्यूयॉर्क दौरा कई देशों के साथ भारत के व्यापक कूटनीतिक संपर्क का हिस्सा है। UNGA के दौरान उन्होंने रूस और ईरान के अलावा आर्मेनिया, बारबाडोस और इराक सहित कई देशों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय घटनाक्रम और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की गई।
रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों के साथ हुई इन अलग-अलग बैठकों में एक ओर भारत-रूस संबंध और BRICS सहयोग प्रमुख रहा, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ बातचीत का केंद्र खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति रही। भारत ने दोनों देशों के साथ बातचीत जारी रखने और बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया है।