तेहरान। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ा संदेश दिया है। ईरान ने कहा है कि किसी संभावित नए युद्ध की अवधि और उसके समाप्त होने की शर्तें अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों से तय नहीं होंगी। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि दोबारा सैन्य संघर्ष शुरू होता है, तो यह पिछली लड़ाई से भी अधिक लंबा चल सकता है। इसी बीच ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर अपने बंदरगाहों, नागरिक जहाजों और समुद्री बुनियादी ढांचे पर हमले करने का आरोप लगाते हुए इससे जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) को सौंपे हैं। इससे पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव के बीच कूटनीतिक और समुद्री मोर्चे पर भी टकराव बढ़ने के संकेत मिले हैं।ईरान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने के संकेत दिए जा रहे हैं। वहीं, ईरान ने भी अपनी सैन्य तैयारियां बढ़ाने और किसी नए हमले का जवाब देने की चेतावनी दी है। हालांकि, दोनों देशों के बीच कतर के माध्यम से बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं।
ट्रंप को ईरानी सेना की सीधी चेतावनी
ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने रविवार को सरकारी टेलीविजन के माध्यम से कहा कि भविष्य में होने वाला कोई भी युद्ध पिछली लड़ाई से अधिक लंबा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति यह तय करने की स्थिति में नहीं होंगे कि युद्ध कब और किन शर्तों पर समाप्त होगा।अकरमिनिया के मुताबिक, युद्ध के समाप्त होने का समय और उसकी परिस्थितियां अमेरिका की इच्छा या धमकियों से निर्धारित नहीं होंगी। ईरान का यह बयान ट्रंप की उन चेतावनियों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें उन्होंने जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करने की संभावना जताई है।ईरान का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मामलों में किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। तेहरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका और इजरायल ने दोबारा हमला किया तो उसे पिछली कार्रवाई की तरह सीमित जवाब तक नहीं रखा जाएगा।
अमेरिका-इजरायल के हमलों के सबूत IMO को सौंपे
सैन्य बयान के साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (International Maritime Organization) के समक्ष भी अपना पक्ष रखा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरान ने अपने बंदरगाहों, नागरिक जहाजों और समुद्री बुनियादी ढांचे पर अमेरिका और इजरायल के कथित हमलों से संबंधित दस्तावेज तथा तस्वीरें IMO को सौंपे हैं।ईरान के बंदरगाह एवं समुद्री संगठन की ओर से तैयार रिपोर्ट का शीर्षक 'War Crimes Against Iran's Ports and Maritime Infrastructure' रखा गया है। इसमें 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के दौरान नागरिक समुद्री सुविधाओं को हुए नुकसान का विवरण दिया गया है।ईरान के मुताबिक, रिपोर्ट के साथ संलग्न तस्वीरों में बंदरगाहों की महत्वपूर्ण सुविधाओं, समुद्री खोज एवं बचाव समन्वय केंद्रों और बचाव जहाजों को हुए नुकसान को दिखाया गया है। तेहरान का दावा है कि समुद्री यातायात नियंत्रण टावरों, संचार उपकरणों और बचाव केंद्रों को नुकसान पहुंचने से केवल ईरान ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर जताई चिंता
ईरान ने IMO को सौंपे गए दस्तावेजों में फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान सागर में समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उसका कहना है कि समुद्री यातायात नियंत्रण प्रणालियों को नुकसान पहुंचने से जहाजों के बीच टक्कर और अन्य दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।इसके अलावा, खोज एवं बचाव केंद्रों के प्रभावित होने से समुद्र में दुर्घटना की स्थिति में राहत और बचाव अभियान चलाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। इसका असर विदेशी जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।रिपोर्ट में पर्यावरणीय खतरे का भी उल्लेख किया गया है। ईरान ने दावा किया है कि तेल सुविधाओं, भंडारण टैंकों और जहाजों को नुकसान पहुंचने से समुद्र में प्रदूषण फैल सकता है। इसका प्रभाव हमले वाले स्थानों तक सीमित न रहकर आसपास के समुद्री क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।ईरान के दस्तावेज IMO के सदस्य देशों के बीच वितरित किए गए हैं। इस विषय पर 2 से 6 नवंबर तक लंदन में होने वाली संगठन की 138वीं परिषद बैठक में एजेंडा आइटम 11 यानी महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा के तहत विचार किया जाना निर्धारित है।
ट्रंप प्रशासन के सामने कूटनीति और सैन्य कार्रवाई का विकल्प
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी वार्ताकारों ने शनिवार को कतर की राजधानी दोहा में कतर के मध्यस्थों के साथ बातचीत की। इससे पहले तेहरान में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई थी।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई का अंतिम फैसला नहीं लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देंगे, लेकिन जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने में सक्षम है।कतर की ओर से अमेरिका और ईरान के बीच विश्वास बहाली के लिए सात दिनों की योजना का प्रस्ताव भी दिया गया था। हालांकि, ईरान ने इसे संतोषजनक नहीं माना। ईरान की अपनी सात दिवसीय योजना में अमेरिकी प्रतिबंधों और बंदरगाह नाकेबंदी को हटाने, जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही बहाल करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
ईरान ने सेना को हाई अलर्ट पर रहने के दिए संकेत
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी शनिवार को सशस्त्र बलों को किसी भी नए हमले का तत्काल और प्रभावी जवाब देने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि किसी भी प्रकार के खतरे का जवाब भौगोलिक सीमाओं से परे दिया जा सकता है।ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने भी परमाणु नीति को लेकर संभावित बदलावों पर विचार किए जाने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियारों पर लंबे समय से लागू प्रतिबंध को हटाने के संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।कुल मिलाकर, ईरान की ताजा चेतावनी और IMO को सौंपे गए दस्तावेजों से स्पष्ट है कि तेहरान सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वह अमेरिका को संभावित लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहने का संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर समुद्री बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का मुद्दा उठा रहा है। अब सबकी नजर 2 से 6 नवंबर तक लंदन में होने वाली IMO परिषद की बैठक और अमेरिका-ईरान के बीच जारी मध्यस्थता प्रयासों पर टिकी है।
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