तेहरान: अमेरिकी प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव के बीच ईरान ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति तेज कर दी है। ईरान के नेताओं ने स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा है कि इससे देश को बाहरी आर्थिक दबावों का सामना करने में मदद मिलेगी।

ईरान का कहना है कि डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल उसके खिलाफ प्रतिबंधों के हथियार के रूप में किया जाता है। ऐसे में वह क्षेत्रीय देशों के साथ अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाकर वैकल्पिक आर्थिक व्यवस्था तैयार करना चाहता है।
स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने की रणनीति
ईरानी अधिकारियों ने पड़ोसी देशों और प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ स्थानीय मुद्रा में लेन-देन बढ़ाने की बात कही है। उनका मानना है कि इससे अमेरिकी वित्तीय प्रणाली पर निर्भरता कम होगी और प्रतिबंधों के असर को सीमित किया जा सकेगा। ईरान पहले भी डॉलर के विकल्प के रूप में अन्य मुद्राओं के इस्तेमाल की कोशिश करता रहा है। इसमें चीनी युआन, रूसी रूबल और क्षेत्रीय देशों की मुद्राओं के जरिए व्यापार बढ़ाने के प्रयास शामिल रहे हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने की कोशिश
अमेरिका ने ईरान पर लंबे समय से कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिनका असर बैंकिंग, तेल निर्यात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ा है। अमेरिकी प्रतिबंधों की निगरानी और कार्यान्वयन ट्रेजरी विभाग का ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) करता है। ईरान का आरोप है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है। इसके जवाब में तेहरान अपनी आर्थिक नीतियों में बदलाव करते हुए वैकल्पिक व्यापारिक रास्तों पर ध्यान दे रहा है।
क्षेत्रीय सहयोग पर बढ़ा फोकस
ईरान अब ऐसे देशों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद उसके साथ व्यापार करने के इच्छुक हैं। स्थानीय मुद्रा में भुगतान व्यवस्था को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर से पूरी तरह अलग होना आसान नहीं है, क्योंकि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन में अभी भी अमेरिकी मुद्रा की बड़ी भूमिका है। हालांकि, कुछ देश धीरे-धीरे डॉलर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
तेल कारोबार पर भी असर
ईरान की अर्थव्यवस्था में तेल निर्यात की अहम भूमिका है। अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापारिक बाधाओं के कारण ईरान को अपने तेल कारोबार में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में स्थानीय मुद्रा और वैकल्पिक भुगतान प्रणाली को ईरान आर्थिक दबाव से निपटने के एक साधन के रूप में देख रहा है।
क्या डॉलरमुक्त व्यवस्था संभव है?
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर का विकल्प तैयार करना लंबी प्रक्रिया है। इसके लिए मजबूत वित्तीय नेटवर्क, भरोसेमंद बैंकिंग व्यवस्था और कई देशों के बीच सहमति जरूरी होगी। फिलहाल ईरान का लक्ष्य पूरी तरह डॉलर को हटाना नहीं बल्कि व्यापार में अमेरिकी मुद्रा की भूमिका कम करना है। तेहरान का मानना है कि स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाकर वह भविष्य में प्रतिबंधों के प्रभाव को कम कर सकता है।
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