तेहरान : 3 नवंबर 2026। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पश्चिम एशिया में एक बार फिर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिका के साथ संभावित नए सैन्य टकराव की आशंका के बीच ईरान के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व ने देश के सैन्य अधिकारियों से कतर की मध्यस्थता में तैयार शांति प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करने को कहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सैन्य नेतृत्व को कतरी प्रस्ताव पर बातचीत करने की सलाह दी है। हालांकि, दोनों देशों के बीच किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव दोबारा तेज होने की आशंका बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प खुले रखने के संकेत दिए हैं। दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी संप्रभुता या सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी।
कतर की मध्यस्थता से समझौते की कोशिश
रिपोर्टों के अनुसार, कतर के मध्यस्थ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।कतरी प्रतिनिधियों ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत की है। इसके अलावा ईरान का एक प्रतिनिधिमंडल भी दोहा पहुंचा था, जहां संभावित समझौते के मसौदे पर चर्चा हुई।बताया जा रहा है कि कतर की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों को सीमित करना, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य बनाना और व्यापक शांति वार्ता का रास्ता तैयार करना है।हालांकि, ईरान के अधिकारियों का कहना है कि समझौते के लिए उनकी प्रमुख शर्तें पूरी होना जरूरी है।तेहरान की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री नाकाबंदी से जुड़े मुद्दों का समाधान किए बिना स्थायी समझौता संभव नहीं होगा।
ईरान के शीर्ष नेताओं ने दिया बातचीत का संकेत
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान की सैन्य संस्थाओं को कतरी प्रस्ताव पर विचार करने की सलाह दी है।बताया जा रहा है कि ईरान के राजनीतिक नेतृत्व का एक हिस्सा अमेरिका के साथ नए सैन्य संघर्ष को टालने के लिए कूटनीतिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहा है।हालांकि, प्रस्ताव को स्वीकार करने या सैन्य स्तर पर किसी सहमति की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।ईरान के नेतृत्व के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर उसे संभावित अमेरिकी हमलों के मद्देनजर अपनी सैन्य तैयारियां मजबूत रखनी हैं, वहीं दूसरी ओर आर्थिक दबाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को कम करने के लिए बातचीत की संभावनाएं भी तलाशनी हैं।इसी वजह से कतर की मध्यस्थता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य समझौते का अहम मुद्दा
ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है।यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।ईरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका उसकी प्रमुख मांगें स्वीकार करता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को दो दिनों के भीतर फिर से खोलने की व्यवस्था संभव हो सकती है।पहले ईरान की योजना में इस प्रक्रिया के लिए सात दिनों का प्रस्ताव रखा गया था।विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, नई व्यवस्था के माध्यम से कुछ चरणों को तेजी से लागू किया जा सकता है।ईरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना, प्रतिबंधों में राहत देना, तेल निर्यात से संबंधित छूट बहाल करना और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम करना शामिल है।तेहरान का कहना है कि इन शर्तों पर ठोस प्रगति होने के बाद ही परमाणु कार्यक्रम से संबंधित व्यापक बातचीत संभव होगी।
अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद बरकरार
कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने के बावजूद दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद बने हुए हैं।एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अमेरिका और ईरान अब भी युद्ध समाप्त करने वाले समझौते से काफी दूर हैं।अधिकारी के अनुसार, मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन तेहरान अमेरिकी मांगों को पूरी तरह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।ईरान की ओर से कहा गया है कि यदि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना चाहता है तो उसे ईरान की शर्तों पर विचार करना होगा।दूसरी ओर, अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित मुद्दों पर अपनी चिंताएं बनाए हुए है।यही कारण है कि लगातार बातचीत के बावजूद समझौते की अंतिम रूपरेखा तय नहीं हो सकी है।
सैन्य तैयारी भी तेज कर रहा ईरान
शांति वार्ता की संभावनाओं के बीच ईरान अपने सैन्य विकल्पों को भी मजबूत कर रहा है।रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के साथ बैठक में संभावित अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।उन्होंने सैन्य अधिकारियों से रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और संभावित खतरों का प्रभावी जवाब देने की तैयारी रखने को कहा।ईरानी नेतृत्व का संदेश है कि बातचीत के प्रयास जारी रह सकते हैं, लेकिन देश किसी नए हमले की स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार रहेगा।इससे स्पष्ट होता है कि तेहरान फिलहाल कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य तैयारियों को साथ लेकर चल रहा है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बीच बढ़ी हलचल
अमेरिका में 3 नवंबर को हो रहे मध्यावधि चुनावों के कारण भी ईरान से संबंधित घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों को आशंका है कि चुनावों के बाद अमेरिका का सैन्य रुख और सख्त हो सकता है।इस बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा नेतृत्व को भेजे गए पत्र ने बातचीत की नई संभावनाएं पैदा की हैं।ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिकी पक्ष की ओर से संवाद की इच्छा को सकारात्मक संकेत बताया था, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि किसी भी बातचीत का आधार पारस्परिक सम्मान और ईरान की शर्तों पर गंभीर विचार होना चाहिए।
क्या टल सकता है नया सैन्य टकराव?
फिलहाल कतर की मध्यस्थता में जारी बातचीत को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की महत्वपूर्ण कोशिश माना जा रहा है।हालांकि, प्रतिबंधों, समुद्री सुरक्षा, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों पर दोनों देशों के बीच मतभेद इतने गहरे हैं कि तत्काल समझौते की संभावना निश्चित नहीं कही जा सकती।ईरान के शीर्ष राजनीतिक अधिकारियों द्वारा सैन्य नेतृत्व से कतरी प्रस्ताव पर विचार करने को कहना कूटनीतिक दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।अब यह देखना होगा कि अमेरिका ईरान की मांगों पर कितना लचीला रुख अपनाता है और क्या दोनों पक्ष सैन्य टकराव की आशंका के बीच बातचीत के माध्यम से समाधान निकाल पाते हैं।फिलहाल पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजे बेहद महत्वपूर्ण बने हुए हैं।