तेहरान। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने ब्रिटेन के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। ईरान सरकार ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी (Royal Navy) और रॉयल एयर फोर्स (Royal Air Force) को 'आतंकवादी संगठन' घोषित कर दिया है। इसके साथ ही ब्रिटेन की प्रमुख विदेशी खुफिया एजेंसी MI6 को 'शत्रु समूह' की श्रेणी में रखा गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर इस फैसले की जानकारी दी। तेहरान ने इसे ब्रिटेन की कथित शत्रुतापूर्ण नीतियों के जवाब में उठाया गया कदम बताया है। इस घोषणा से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ब्रिटेन ने पिछले एक वर्ष के दौरान उसके राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन्हीं गतिविधियों के जवाब में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। ईरान ने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था 1 नवंबर से प्रभावी होगी।
ब्रिटेन की तीन प्रमुख संस्थाओं पर कार्रवाई
ईरान के फैसले के तहत ब्रिटेन की दो सैन्य शाखाओं और एक खुफिया एजेंसी को अलग-अलग कानूनी श्रेणियों में रखा गया है। रॉयल नेवी ब्रिटेन की समुद्री सैन्य शक्ति है, जबकि रॉयल एयर फोर्स देश की वायुसेना है। दोनों ब्रिटेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।वहीं, MI6 ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी है, जिसका आधिकारिक नाम सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस (SIS) है। यह विदेशों से जुड़ी खुफिया सूचनाओं के संग्रह और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है।ईरान ने MI6 को अपने जासूसी और शत्रु देशों के साथ सहयोग संबंधी कानून के अंतर्गत शत्रु समूह घोषित किया है। दूसरी ओर, ब्रिटिश नौसेना और वायुसेना को ईरान के उस कानून के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है, जो अमेरिका द्वारा ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित करने के जवाब में बनाया गया था।
IRGC पर ब्रिटेन की कार्रवाई बनी प्रमुख वजह
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में ब्रिटेन के 13 जुलाई 2026 के फैसले का विशेष उल्लेख किया है। इस तारीख को ब्रिटेन ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को स्टेट थ्रेट्स एक्ट 2026 के दायरे में रखा था।तेहरान का कहना है कि ब्रिटेन की यह कार्रवाई ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों के खिलाफ थी। ईरान ने ब्रिटेन के फैसले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए जवाबी कार्रवाई करने का निर्णय लिया।IRGC ईरान की प्रमुख सैन्य और सुरक्षा संस्थाओं में से एक है। इसकी भूमिका देश की आंतरिक सुरक्षा, रणनीतिक रक्षा और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों से जुड़ी है।ईरान और पश्चिमी देशों के बीच IRGC की भूमिका लंबे समय से विवाद का विषय रही है। पश्चिमी सरकारें इस संगठन की कुछ गतिविधियों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताती रही हैं, जबकि ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है।
अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियानों को लेकर भी आरोप
ईरान ने ब्रिटेन पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों में सहयोग देने का आरोप भी लगाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ब्रिटेन ने अपने अधिकार क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों, सुविधाओं और रसद संबंधी संसाधनों के इस्तेमाल की अनुमति देकर ईरान के खिलाफ सैन्य गतिविधियों में सहायता की।तेहरान ने इन गतिविधियों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताया है। हालांकि, ब्रिटेन की कथित भूमिका से जुड़े इन आरोपों को ईरान सरकार के आधिकारिक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।मध्य पूर्व में फरवरी 2026 से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ा है। इसके बाद क्षेत्रीय सुरक्षा, सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देकर फैसले का बचाव
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसका फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून और पारस्परिक कार्रवाई के सिद्धांत के अनुरूप है। मंत्रालय ने ब्रिटेन पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।ईरान का कहना है कि किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करना अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल आधार है। उसके मुताबिक, ब्रिटेन की नीतियों ने इस सिद्धांत को प्रभावित किया है।मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इन जवाबी कदमों के परिणामों की जिम्मेदारी ब्रिटिश सरकार की होगी।हालांकि, ईरान द्वारा ब्रिटिश सैन्य संस्थाओं को आतंकवादी संगठन घोषित करना उसका राष्ट्रीय कानूनी निर्णय है। इसका अर्थ यह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र या अन्य देशों ने भी इन संस्थाओं को आतंकवादी संगठन मान लिया है।
ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर नजर
ईरान की घोषणा के बाद ब्रिटेन की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस फैसले पर ब्रिटिश सरकार की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।ब्रिटेन और ईरान के बीच पहले भी प्रतिबंधों, खुफिया गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। दोनों देशों के संबंधों में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति का भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है।ईरान के ताजा फैसले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या ब्रिटेन इसके जवाब में अतिरिक्त प्रतिबंध या कूटनीतिक कदम उठाएगा। हालांकि, ब्रिटिश सरकार की ओर से किसी नई जवाबी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
सैन्य और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है असर
ईरान का यह फैसला ब्रिटेन की सैन्य संस्थाओं और खुफिया एजेंसी को सीधे निशाना बनाने के कारण महत्वपूर्ण है। इससे दोनों देशों के बीच खुफिया सहयोग, सुरक्षा संबंधी संपर्क और क्षेत्रीय कूटनीति प्रभावित होने की आशंका है।विशेषज्ञों के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान इन घोषणाओं को व्यावहारिक रूप से कैसे लागू करता है। फिलहाल ब्रिटिश सैन्यकर्मियों, जहाजों या विमानों के खिलाफ किसी अतिरिक्त परिचालन प्रतिबंध की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।ईरान ने अपने फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा से जोड़ा है। वहीं, ब्रिटेन की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का रुख आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
Tags: