न्यूयॉर्क। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए आतंकवाद के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि ईरान आतंकवाद का समर्थक नहीं बल्कि उसका शिकार रहा है। अपने भाषण के दौरान पेज़ेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ हमले करने का आरोप लगाया और कहा कि उनके देश ने केवल अपना बचाव किया है।पेज़ेश्कियान का यह संबोधन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए भाषण के एक दिन बाद आया। ट्रंप ने 22 सितंबर को ईरान पर तीखे आरोप लगाए थे और परमाणु समझौता नहीं होने की स्थिति में कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी। हालांकि ट्रंप ने साथ ही यह भी कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और समझौते की संभावना बनी हुई है।ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण की शुरुआत में ही अमेरिकी आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने ऊपर हुए हमलों का जवाब आत्मरक्षा में दिया है। पेज़ेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के लोगों, बुनियादी ढांचे और संस्थानों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। ये ईरानी राष्ट्रपति के आरोप हैं; अमेरिका और इजरायल संघर्ष में अपनी सैन्य कार्रवाइयों को अलग आधारों पर उचित ठहराते रहे हैं।
मंच से दिखाईं हमलों की तस्वीरें
पेज़ेश्कियान अपने संबोधन के दौरान कुछ बड़ी तस्वीरें भी लेकर आए। इनमें ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और मिनाब के एक स्कूल पर हुए हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें शामिल थीं। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक पेज़ेश्कियान ने फरवरी में युद्ध की शुरुआत के दौरान स्कूल पर हुए हमले में मारे गए बच्चों का जिक्र करते हुए अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की।उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ईरान के वैज्ञानिकों, महिलाओं, पुरुषों और बच्चों को निशाना बनाया गया। मिनाब स्कूल का मामला ईरानी प्रतिनिधिमंडल की UNGA यात्रा के प्रमुख मुद्दों में पहले से शामिल था। न्यूयॉर्क रवाना होने से पहले भी पेज़ेश्कियान ने कहा था कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरानी लोगों पर हुए हमलों का मुद्दा उठाएंगे।
ट्रंप के आरोपों का दिया जवाब
एक दिन पहले ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान की सरकार और उसकी नीतियों की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते की बात भी की, लेकिन इसके साथ कड़ी चेतावनी दी।पेज़ेश्कियान ने इसके जवाब में कहा कि ईरान पर आतंकवाद का आरोप लगाना गलत है। उन्होंने कहा कि ईरान ने हमलों का जवाब दिया लेकिन उसका उद्देश्य अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करना था। हालांकि ईरानी राष्ट्रपति का यह दावा कि ईरान ने नागरिक आबादी को निशाना नहीं बनाया, स्वतंत्र रिपोर्टिंग में विवादित है; एसोसिएटेड प्रेस ने संघर्ष में ईरानी हमलों से नागरिकों के मारे जाने के मामले दर्ज होने की बात कही है।
बातचीत के लिए दरवाजा खुला रखा
कड़े भाषण के बावजूद पेज़ेश्कियान ने कूटनीतिक बातचीत की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया। उन्होंने ट्रंप का नाम लेते हुए कहा कि ईरान संवाद, कूटनीति और बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव या बल की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक दिन पहले ट्रंप ने भी कहा था कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि अंततः कोई समझौता हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने परमाणु हथियार को लेकर अपनी शर्त दोहराते हुए कहा था कि वाशिंगटन ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।इस तरह दोनों देशों की तरफ से एक ओर कड़ी बयानबाजी जारी है तो दूसरी ओर बातचीत की संभावना भी पूरी तरह बंद नहीं हुई है।
ईरान की सैन्य ताकत पर भी बोले राष्ट्रपति
पेज़ेश्कियान ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के लिए अपनी रक्षा क्षमता मजबूत रखना जरूरी है। उनके मुताबिक ईरान अपनी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल प्रभुत्व स्थापित करने के लिए नहीं बल्कि बाहरी हमलों को रोकने और उनका जवाब देने के लिए करना चाहता है।उन्होंने कहा कि ईरान इतना मजबूत होना चाहता है कि उसके शहरों पर हमला करने से पहले किसी भी देश को उसके परिणामों के बारे में सोचना पड़े।पेज़ेश्कियान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भी जिक्र किया और कहा कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का इस्तेमाल अपने खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं होने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इसकी सुरक्षा लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बनी हुई है।
UNGA में छाया अमेरिका-ईरान तनाव
संयुक्त राष्ट्र महासभा का मौजूदा सत्र ऐसे समय हो रहा है जब मध्य पूर्व में कई संघर्षों और अमेरिका-ईरान टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय तनाव बना हुआ है। ईरान से जुड़ा परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मुद्दे इस बार की कूटनीतिक बातचीत के प्रमुख विषय बने हुए हैं।पेज़ेश्कियान ने अपने संबोधन के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने ईरान का पक्ष रखने की कोशिश की। उनका मुख्य संदेश यह रहा कि तेहरान खुद को हमलावर नहीं बल्कि बाहरी हमलों का सामना कर रहे देश के रूप में देखता है। वहीं अमेरिका ईरान की परमाणु और क्षेत्रीय नीतियों को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में पेश कर रहा है।न्यूयॉर्क में दोनों देशों की ओर से सामने आए बयानों ने साफ कर दिया है कि उनके बीच मतभेद बेहद गहरे हैं। इसके बावजूद दोनों पक्षों द्वारा बातचीत का विकल्प खुला रखने के संकेत आगे की कूटनीतिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण बनाते हैं।अब नजर इस बात पर रहेगी कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान होने वाली बैठकों और कूटनीतिक संपर्कों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की कोई दिशा निकलती है या दोनों देशों के बीच टकराव और बयानबाजी इसी तरह जारी रहती है।
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