तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि उसके खिलाफ किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने गुरुवार को कहा कि तेहरान कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने के लिए तैयार है, लेकिन यदि युद्ध जारी रहता है तो ईरान के पास जवाबी कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमताएं मौजूद हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले चरण की लड़ाई में ईरान ने अपनी सभी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल नहीं किया था।ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समझना चाहिए कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान बातचीत के रास्ते बंद नहीं करना चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता भी नहीं करेगा।
ईरान के खिलाफ कार्रवाई की चुकानी होगी कीमत
मोहसेन रेज़ाई ने अपने बयान में कहा कि ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दूसरे पक्ष सैन्य टकराव के संभावित परिणामों को समझते हैं, तो विवादों को कूटनीतिक तरीके से सुलझाना संभव है।आईआरआईबी के टेलीग्राम पोस्ट के अनुसार, रेज़ाई ने कहा, "सभी को पता होना चाहिए कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई की कीमत चुकानी पड़ती है। अगर कूटनीति से यह समझ बन सकती है, तो हम कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन यदि युद्ध जारी रहता है, तो ईरान के पास जवाब देना जारी रखने के लिए जरूरी साधन हैं।"उनके इस बयान को ईरान की सैन्य तैयारियों और कूटनीतिक रुख से जोड़कर देखा जा रहा है।
अभी पूरी सैन्य ताकत का इस्तेमाल नहीं किया
रेज़ाई ने दावा किया कि पिछले चरण के सैन्य संघर्ष में ईरान ने अपनी सभी क्षमताओं का उपयोग नहीं किया था। उन्होंने कहा कि युद्ध की परिस्थितियों के अनुसार सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया गया और आवश्यकता पड़ने पर जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है।उन्होंने कहा, "हमने पिछले चरण में अपनी सभी क्षमताओं का इस्तेमाल नहीं किया। युद्ध की तीव्रता के हिसाब से अतिरिक्त क्षमताओं को अभियान में लगाया गया और हम अगले चरण के लिए तैयार हैं।"हालांकि, ईरान की शेष सैन्य क्षमताओं और संभावित कार्रवाई के बारे में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात
रेज़ाई का बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष समाप्त करने की शर्तों पर मतभेद बने हुए हैं।इससे पहले सितंबर में ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक युद्ध समाप्त करने से संबंधित अपनी शर्तें पहुंचाने की जानकारी दी थी। इनमें युद्ध समाप्त करना, ईरान की रोकी गई धनराशि जारी करना और समुद्री नाकाबंदी खत्म करना शामिल था।रेज़ाई ने उस समय भी कहा था कि ईरान कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन इसके लिए तेहरान की शर्तों पर विचार करना आवश्यक होगा।
तीन साल तक प्रभावित हो सकता है ऊर्जा बाजार
मोहसेन रेज़ाई ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने दावा किया कि यदि मौजूदा संघर्ष जारी रहा, तो इसके परिणाम लंबे समय तक महसूस किए जा सकते हैं।रेज़ाई ने कहा, "मौजूदा स्थिति जारी रहने से रणनीतिक परिणाम सामने आएंगे। इनमें यह भी शामिल है कि ऊर्जा बाजार अगले तीन वर्षों तक शांत नहीं रहेंगे।"उनका यह बयान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम एशिया दुनिया के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है।क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, ऊर्जा बाजार तीन वर्षों तक अस्थिर रहने का अनुमान रेज़ाई का अपना दावा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य भी रहा है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।सितंबर में रेज़ाई ने कहा था कि ईरान अपनी शर्तें स्वीकार किए जाने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और बातचीत आगे बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ती चिंता
रेज़ाई ने दावा किया कि संघर्ष ने पश्चिम एशिया के क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित किया है। उनके मुताबिक, ईरान बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपनी रणनीति तैयार कर रहा है।ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल देश की सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों का समन्वय करती है। मोहसेन रेज़ाई को अगस्त 2026 में इस परिषद का सचिव नियुक्त किया गया था।फिलहाल ईरान के ताजा बयान से स्पष्ट है कि तेहरान कूटनीतिक रास्ते खुले रखने के साथ सैन्य कार्रवाई का जवाब देने की चेतावनी भी दे रहा है। ऐसे में संघर्ष का अगला चरण क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
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