नई दिल्ली/येरेवन  : 27 अक्टूबर 2026। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (COP17) में भाग लेने के लिए आर्मेनिया की राजधानी येरेवन पहुंचे। वह जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के पक्षकारों की 17वीं बैठक के उच्चस्तरीय सत्र में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस दौरान यादव अंतरराष्ट्रीय मंच पर जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों तथा उपलब्धियों को प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन में दुनिया भर के देशों के प्रतिनिधि प्रकृति संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
येरेवन पहुंचने पर भारतीय राजदूत ने किया स्वागत
आर्मेनिया की राजधानी येरेवन पहुंचने पर भारतीय राजदूत टी. आर्मस्ट्रांग चांगसन ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का स्वागत किया।भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह COP17 के उच्चस्तरीय सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे हैं।उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में विभिन्न द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर भारत की समृद्ध प्राकृतिक जैव विविधता के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों और उपलब्धियों को सामने रखेंगे।यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जैव विविधता संरक्षण को प्राथमिकता दी है और वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।
19 से 30 अक्टूबर तक आयोजित हो रहा COP17
संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन का 17वां सत्र 19 अक्टूबर से शुरू हुआ है और 30 अक्टूबर तक चलेगा।इस वर्ष सम्मेलन का विषय 'Taking Action for Nature' यानी 'प्रकृति के लिए कार्रवाई' रखा गया है।इस आयोजन में विभिन्न देशों की सरकारों, वैज्ञानिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों, स्थानीय समुदायों, युवाओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य जैव विविधता को होने वाले नुकसान को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
कुनमिंग-मॉन्ट्रियल जैव विविधता फ्रेमवर्क की समीक्षा
COP17 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता फ्रेमवर्क की पहली सामूहिक समीक्षा है।यह फ्रेमवर्क वर्ष 2022 में अपनाया गया था। इसमें वर्ष 2030 तक जैव विविधता संरक्षण के लिए कुल 23 वैश्विक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।सम्मेलन में इन लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में विभिन्न देशों द्वारा किए गए प्रयासों की समीक्षा की जा रही है।विशेष रूप से वन संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और जैव विविधता के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
भारत के संरक्षण प्रयासों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच
भारत दुनिया के प्रमुख जैव विविधता संपन्न देशों में शामिल है। देश में हिमालयी क्षेत्रों से लेकर पश्चिमी घाट, रेगिस्तानी इलाकों, मैंग्रोव वनों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तक विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक आवास पाए जाते हैं।केंद्र सरकार वन्यजीव संरक्षण, वनीकरण, प्राकृतिक आवासों के पुनर्स्थापन और संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा के लिए कई कार्यक्रम चला रही है।प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट, प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड और अन्य संरक्षण पहलों के माध्यम से वन्यजीवों एवं उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा पर जोर दिया जा रहा है।भूपेंद्र यादव COP17 के दौरान भारत की इन पहलों और जैव विविधता संरक्षण से जुड़े अनुभवों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखेंगे।
पर्यावरण संरक्षण के लिए वित्तीय सहयोग पर चर्चा
सम्मेलन में विकासशील देशों के लिए पर्यावरण संरक्षण संबंधी वित्तीय सहायता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।जैव विविधता को बचाने के लिए वित्तीय संसाधनों, आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान की जरूरत लगातार बढ़ रही है।संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अनुसार, COP17 में जैव विविधता वित्तपोषण, निगरानी व्यवस्था, संरक्षण लक्ष्यों के कार्यान्वयन और प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले लाभों के न्यायसंगत वितरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।इन मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ने से विकासशील देशों को संरक्षण योजनाएं लागू करने में सहायता मिल सकती है।
27 और 28 अक्टूबर को उच्चस्तरीय बैठक
COP17 के अंतर्गत 27 और 28 अक्टूबर को मंत्रिस्तरीय उच्चस्तरीय सत्र आयोजित किया जा रहा है।इसमें विभिन्न देशों के पर्यावरण मंत्री वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को हासिल करने के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धताओं और आवश्यक कदमों पर चर्चा करेंगे।भारत की ओर से भूपेंद्र यादव सम्मेलन में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से संबंधित देश का दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।इस दौरान द्विपक्षीय बैठकों और अन्य बहुपक्षीय चर्चाओं के माध्यम से सहयोग बढ़ाने के अवसर भी उपलब्ध होंगे।
वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में भारत की भूमिका पर जोर
COP17 ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, प्राकृतिक आवासों में कमी और विभिन्न प्रजातियों के अस्तित्व पर बढ़ते खतरों का सामना कर रही है।इन चुनौतियों का समाधान केवल राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी जुड़ा हुआ है।भूपेंद्र यादव की आर्मेनिया यात्रा से भारत को अपने संरक्षण अनुभव साझा करने और वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों पर सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा।सम्मेलन का समापन 30 अक्टूबर को निर्धारित है। इसके बाद सामने आने वाले निर्णय वैश्विक जैव विविधता संरक्षण की भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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