New दिल्ली : भारत ने इज़राइल-फ़िलिस्तीन विवाद के समाधान के लिए एक बार फिर ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ यानी दो-देश समाधान के प्रति अपना समर्थन दोहराया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि भारत का रुख स्पष्ट है और नई दिल्ली एक ऐसे समाधान का समर्थन करती है जिसमें इज़राइल और एक स्वतंत्र, व्यवहार्य फ़िलिस्तीनी राज्य शांति और सुरक्षा के साथ साथ-साथ रह सकें।
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में हुई भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका की IBSA त्रिपक्षीय मंत्री-स्तरीय बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान के संदर्भ में आई। 14वीं IBSA त्रिपक्षीय मंत्री आयोग की बैठक 24 सितंबर को हुई थी। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दक्षिण अफ़्रीका के अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सहयोग मंत्री रोनाल्ड लमोला और ब्राज़ील के विदेश मंत्री मौरो विएरा शामिल हुए थे।
मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग के दौरान रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि क्या IBSA के संयुक्त बयान में फ़िलिस्तीन को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं को भारत ने इज़राइल के सामने भी उठाया है। इस पर उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई और उसके बाद तीनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया।
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह बयान तीनों देशों की सामूहिक राय को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त बयान में केवल फ़िलिस्तीन ही नहीं, बल्कि आर्थिक, विकासात्मक और कई राजनीतिक मुद्दों को भी शामिल किया गया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत के स्वतंत्र रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि जहां तक फ़िलिस्तीन के मुद्दे पर भारत की स्थिति का सवाल है, भारत दो-देश समाधान का समर्थन करता है। नई दिल्ली लंबे समय से बातचीत और शांतिपूर्ण प्रक्रिया के जरिए इज़राइल-फ़िलिस्तीन विवाद के समाधान की वकालत करती रही है।
IBSA बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी तीनों देशों ने दो-देश समाधान के समर्थन को दोहराया। बयान के मुताबिक, भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका ने एक स्वतंत्र और व्यवहार्य फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन किया, जो इज़राइल के साथ शांति और सुरक्षा में रह सके। बयान में 1967 की सीमाओं और पूर्वी यरुशलम को फ़िलिस्तीनी राज्य की राजधानी के रूप में संदर्भित किया गया।
IBSA देशों ने गाज़ा की स्थिति पर भी चिंता जताई। संयुक्त बयान में संघर्षविराम बनाए रखने, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने और नागरिकों तथा नागरिक ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया गया। तीनों देशों ने फ़िलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन का भी विरोध किया और संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी यानी UNRWA के लिए समर्थन दोहराया।
भारत का दो-देश समाधान के प्रति समर्थन हाल के महीनों में अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भी सामने आया है। सितंबर 2026 में नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में भी भारत सहित सदस्य देशों ने इज़राइल-फ़िलिस्तीन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान और दो-देश व्यवस्था के समर्थन को दोहराया था। घोषणापत्र में एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना की बात कही गई थी।
इससे पहले भारत और ब्राज़ील की संयुक्त घोषणा में भी दोनों देशों ने बातचीत के जरिए दो-देश समाधान का समर्थन किया था। इसमें कहा गया था कि फ़िलिस्तीन और इज़राइल सुरक्षित और परस्पर मान्य सीमाओं के भीतर शांति के साथ रह सकें, यही स्थायी समाधान की दिशा होनी चाहिए।
IBSA की 14वीं बैठक में फ़िलिस्तीन के अलावा वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बदलाव, दक्षिण-दक्षिण सहयोग, व्यापार, विकास, आतंकवाद और बहुपक्षवाद से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की मांग दोहराई और कहा कि मौजूदा वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। तीनों देशों ने औपचारिक और टेक्स्ट-आधारित बातचीत के जरिए UNSC सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का समर्थन किया।
बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर भी साझा रुख सामने आया। IBSA देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की निंदा की और आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंड नहीं अपनाने की बात कही। साथ ही आतंकवादी वित्तपोषण और कट्टरपंथी प्रचार से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया गया।
भारत के लिए IBSA एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय मंच है, जिसमें एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ़्रीका की तीन बड़ी विकासशील लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इस मंच का गठन वैश्विक और क्षेत्रीय राजनीतिक मुद्दों पर समन्वय, दक्षिण-दक्षिण सहयोग और विकासशील देशों के हितों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था।
फ़िलिस्तीन मुद्दे पर भारत का रुख इस व्यापक कूटनीतिक नीति का हिस्सा है, जिसमें नई दिल्ली इज़राइल के साथ द्विपक्षीय संबंध बनाए रखते हुए फ़िलिस्तीनी लोगों के लिए स्वतंत्र राज्य और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करती है।
रणधीर जायसवाल के बयान के बाद यह एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि भारत इज़राइल-फ़िलिस्तीन विवाद के स्थायी समाधान के लिए बातचीत और दो-देश व्यवस्था को ही प्रमुख रास्ता मानता है। IBSA के संयुक्त बयान ने भी इसी दिशा में भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका की साझा स्थिति को सामने रखा है।