न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने से दोनों देशों के संबंधों को और मजबूती मिल सकती है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन व्यापार वार्ता और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों में कई जटिल पहलू भी मौजूद हैं, जिन्हें बातचीत के जरिए सुलझाना होगा।

जयशंकर सोमवार को न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी द्वारा आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के उच्च स्तरीय सप्ताह के दौरान आयोजित किया गया। इसमें भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रमुख सदस्य, प्रवासी भारतीय और विदेश नीति से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर बात करते हुए जयशंकर ने संकेत दिया कि किसी समझौते तक पहुंचना दोनों देशों के व्यापक रिश्तों के लिए सकारात्मक होगा। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि अमेरिका के साथ उसके संबंध आगे की दिशा में बढ़ते रहें, हालांकि दोनों पक्षों के बीच मौजूद मतभेदों और कठिन मुद्दों का समाधान भी जरूरी है।

भारत और अमेरिका लंबे समय से व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच वार्ता में टैरिफ, कृषि उत्पादों की बाजार पहुंच, ऊर्जा, औद्योगिक वस्तुओं, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे शामिल रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रगति हुई है, लेकिन कई संवेदनशील विषयों पर बातचीत अभी भी जारी है।

जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार समझौता सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं है। इसका प्रभाव दोनों देशों के समग्र रणनीतिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है। भारत और अमेरिका रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। ऐसे में व्यापार विवादों का समाधान द्विपक्षीय संबंधों को अधिक स्थिर आधार दे सकता है।

हाल के वर्षों में अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में बना हुआ है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कारोबार बड़े स्तर पर होता है। अमेरिकी कंपनियों का भारत में बड़ा निवेश है, जबकि भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में फार्मा, आईटी, विनिर्माण और दूसरे क्षेत्रों में अपना कारोबार बढ़ा रही हैं।

हालांकि व्यापार वार्ता आसान नहीं रही है। कृषि बाजार तक पहुंच भारत के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। भारत ने किसानों के हितों और घरेलू कृषि क्षेत्र की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है। दूसरी ओर अमेरिका भारतीय बाजार में अपने कृषि और औद्योगिक उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की मांग करता रहा है।

इसके अलावा टैरिफ और रूसी ऊर्जा की खरीद जैसे मुद्दों ने भी पिछले समय में भारत-अमेरिका संबंधों पर दबाव बढ़ाया है। इसके बावजूद दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखा है और व्यापार समझौते की संभावनाओं पर बातचीत बंद नहीं की है।

जयशंकर ने बातचीत में व्यापक भारत-अमेरिका संबंधों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में मजबूत सहयोग है, लेकिन कुछ मुद्दों पर विचारों में अंतर भी रहता है। किसी बड़े द्विपक्षीय संबंध में मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि दोनों पक्ष उन्हें किस तरह संभालते हैं।

भारत की विदेश नीति में अमेरिका महत्वपूर्ण साझेदार है, लेकिन नई दिल्ली ने दूसरे देशों और क्षेत्रों के साथ आर्थिक संबंधों में विविधता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। भारत ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौता कर चुका है और यूरोपीय संघ, खाड़ी देशों तथा अन्य साझेदारों के साथ भी व्यापार वार्ताएं आगे बढ़ा रहा है।

इस रणनीति का उद्देश्य भारत के लिए निर्यात के नए बाजार खोलना और किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम करना है। वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत अलग-अलग साझेदारों के साथ आर्थिक संपर्क बढ़ाने की नीति पर काम कर रहा है।

भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों में प्रौद्योगिकी सहयोग भी तेजी से महत्वपूर्ण हुआ है। दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुरक्षित सप्लाई चेन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत फरवरी 2026 में Pax Silica पहल से भी जुड़ा था।

जयशंकर की टिप्पणी से यह संकेत मिला कि नई दिल्ली व्यापार समझौते को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखती है, लेकिन जल्द समझौते की उम्मीदों के बीच जटिल मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दोनों देशों के बीच पहले भी अंतरिम व्यापार व्यवस्था को लेकर रूपरेखा तैयार हुई है, लेकिन अंतिम और व्यापक समझौते के लिए कई मुद्दों पर सहमति की जरूरत है। वार्ता में बाजार पहुंच और घरेलू उद्योगों के हितों के बीच संतुलन बनाना दोनों पक्षों के सामने मुख्य चुनौती बनी हुई है।

भारत की ओर से लगातार यह कहा गया है कि कोई भी व्यापार समझौता संतुलित और दोनों देशों के लिए लाभकारी होना चाहिए। खासतौर पर कृषि और छोटे उत्पादकों से जुड़े हितों को लेकर भारत सतर्क रुख रखता रहा है।

अमेरिका के लिए भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है, जबकि भारत के लिए अमेरिका महत्वपूर्ण निर्यात बाजार और निवेश स्रोत है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेदों का समाधान आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकता है।

जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है। व्यापार समझौता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों के सामने मौजूद जटिल राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों को समानांतर रूप से संभालना भी जरूरी होगा।

फिलहाल दोनों देशों की नजर व्यापार वार्ता के अगले चरण पर है। यदि लंबित मुद्दों पर सहमति बनती है तो यह न केवल कारोबार और निवेश को बढ़ावा दे सकता है, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में मौजूद हालिया तनाव को कम करने में भी मदद कर सकता है।

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