नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रस्तावित ‘SCO सभ्यता संवाद मंच’ का पहला संस्करण 20 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। भारत के SCO राष्ट्रीय समन्वयक और विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव आलोक अमिताभ डिमरी ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। वह पाकिस्तान की अध्यक्षता में इस्लामाबाद में चल रही SCO काउंसिल ऑफ नेशनल कोऑर्डिनेटर्स की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
डिमरी ने कहा कि भारत की ओर से प्रस्तावित इस मंच का उद्देश्य SCO देशों की प्राचीन सभ्यताओं, कला, साहित्य, सांस्कृतिक परंपराओं और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन के दौरान इस तरह के ‘Civilizational Dialogue Forum’ की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। भारत ने इसे लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने वाली प्रमुख पहल के रूप में पेश किया था।
इसके बाद दिसंबर 2025 में भारत और रूस के संयुक्त बयान में भी इस पहल का उल्लेख किया गया था। दोनों देशों ने कहा था कि SCO सभ्यता संवाद मंच का पहला सत्र 2026 में भारत में आयोजित किया जाएगा। इससे यह पहल SCO के औपचारिक सहयोग कार्यक्रम में आगे बढ़ी।
सितंबर 2026 में बिश्केक में हुए SCO शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने फिर कहा था कि भारत पहले SCO Civilisation Dialogue Forum की मेजबानी के लिए तैयार है। उन्होंने संगठन को केवल सरकारों के बीच सहयोग तक सीमित न रखते हुए लोगों, युवाओं, संस्कृति, इनोवेशन और साझा विरासत को जोड़ने पर जोर दिया था।
अब 20 नवंबर की तारीख तय होने के साथ इस पहल को औपचारिक कार्यक्रम का रूप मिलने जा रहा है। आलोक डिमरी के मुताबिक SCO सदस्य देशों के राष्ट्रीय समन्वयकों ने इस्लामाबाद बैठक में आने वाले कार्यक्रमों और संगठन के एजेंडे पर चर्चा की। पाकिस्तान 2026-27 के लिए SCO काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट की अध्यक्षता कर रहा है और उसकी अध्यक्षता में सितंबर 28 से 30 तक राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक आयोजित की गई।
डिमरी ने भारतीय और फारसी सभ्यताओं के लंबे ऐतिहासिक संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और यूरेशिया की कई सभ्यताओं के बीच सदियों से सांस्कृतिक, भाषाई और व्यापारिक संपर्क रहा है। प्रस्तावित मंच इसी साझा विरासत को आधुनिक सहयोग से जोड़ने की कोशिश करेगा।
SCO का दायरा केवल सुरक्षा या राजनीतिक मामलों तक सीमित नहीं है। संगठन के भीतर व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, संस्कृति, पर्यटन, विज्ञान, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश होती रही है। भारत ने अपने SCO दृष्टिकोण को लंबे समय से ‘Security, Connectivity and Opportunity’ यानी सुरक्षा, संपर्क और अवसर के तीन स्तंभों से जोड़ा है।
सभ्यता संवाद मंच को इसी तीसरे आयाम—लोगों के बीच संपर्क—से जोड़कर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को अपनी ऐतिहासिक विरासत, कला, साहित्य और सांस्कृतिक अनुभव साझा करने के लिए एक संरचित मंच उपलब्ध कराना है। भारत पहले भी SCO के तहत युवा लेखकों, युवा वैज्ञानिकों, स्टार्टअप और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े कार्यक्रमों की मेजबानी कर चुका है।
डिमरी ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापार और पारगमन को भी SCO के व्यापक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके मुताबिक यूरेशियाई और एशियाई देशों के बीच सहयोग का उद्देश्य केवल सरकारों के बीच समझौते करना नहीं, बल्कि ऐसे आर्थिक और सामाजिक अवसर पैदा करना होना चाहिए जिनका लाभ आम लोगों तक पहुंचे।
इस्लामाबाद में चल रही राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक को पाकिस्तान की 2026-27 की SCO अध्यक्षता का पहला प्रमुख कार्यक्रम माना जा रहा है। इस बैठक में सदस्य देशों के राष्ट्रीय समन्वयक संगठन के आने वाले कार्यक्रमों, सहयोग के क्षेत्रों और 2027 में होने वाले SCO राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन की तैयारियों पर चर्चा कर रहे हैं। पाकिस्तान अगले वर्ष इस्लामाबाद में SCO काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट की बैठक की मेजबानी करेगा।
भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के बावजूद भारत इस बैठक में SCO के बहुपक्षीय ढांचे के तहत शामिल हुआ है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आलोक डिमरी कर रहे हैं। भारतीय पक्ष ने यह स्पष्ट किया है कि SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों में भागीदारी को भारत-पाकिस्तान के द्विपक्षीय संवाद से अलग संदर्भ में देखा जाता है।
20 नवंबर को नई दिल्ली में होने वाले पहले SCO सभ्यता संवाद मंच में सदस्य देशों की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत प्रमुख विषय रहने की उम्मीद है। इसमें साझा इतिहास, कला, साहित्य, परंपराओं और लोगों के बीच संबंधों पर चर्चा के साथ आधुनिक कनेक्टिविटी और सहयोग को भी जगह मिल सकती है।
भारत इस मंच को SCO के भीतर अपनी सांस्कृतिक कूटनीति की महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ा रहा है। कार्यक्रम के जरिए सदस्य देशों के बीच केवल रणनीतिक और आर्थिक संबंधों पर ही नहीं, बल्कि उनकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समानताओं पर भी संवाद बढ़ाने की कोशिश होगी।
नई दिल्ली में प्रस्तावित पहला संस्करण इस बात की दिशा तय कर सकता है कि आने वाले वर्षों में SCO सभ्यता संवाद मंच किस स्वरूप में आगे बढ़ता है और अलग-अलग सदस्य देश इसमें किस तरह की सांस्कृतिक तथा अकादमिक भागीदारी करते हैं।
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