न्यूयॉर्क: विदेश मंत्रालय (MEA) में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने सोमवार को न्यूयॉर्क में चल रही 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान 'डरबन घोषणा और कार्य योजना' (DDPA) को अपनाने की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, ज़ेनोफ़ोबिया (विदेशियों के प्रति नफ़रत) और इससे जुड़ी असहिष्णुता से निपटने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।
विदेश मंत्रालय ने 'X' पर कहा, "सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने न्यूयॉर्क में UNGA81 के दौरान DDPA को अपनाने की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में भारत का बयान दिया। उन्होंने नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, ज़ेनोफ़ोबिया और इससे जुड़ी असहिष्णुता से निपटने तथा सभी के लिए समानता और सम्मान को बढ़ावा देने के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।"
मंत्रालय ने आगे कहा, "भारत ने DDPA को पूरी तरह और प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में ठोस, राष्ट्रीय स्तर पर संचालित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।"
पिछले हफ़्ते, सचिव जॉर्ज ने UNGA में एक उच्च-स्तरीय साइड इवेंट के दौरान सांस्कृतिक संपत्तियों को वापस लाने के लिए मज़बूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया था। MEA ने X पर बताया, "सेक्रेटरी (वेस्ट) सिबी जॉर्ज ने घाना, जर्मनी और फ़्रांस द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'सुधारात्मक न्याय के लिए वादों से कार्रवाई तक' (From Commitments to Action on Reparatory Justice) विषय पर एक हाई-लेवल साइड इवेंट में हिस्सा लिया। उन्होंने सांस्कृतिक संपत्तियों और विरासत को उनके मूल देशों और समुदायों को वापस लौटाने और बहाल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मज़बूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।"
सेक्रेटरी जॉर्ज ने 'नेशनल ओनरशिप इन प्रैक्टिस: स्ट्रेंथनिंग इंक्लूसिव स्टेट इंस्टीट्यूशंस थ्रू इंटरनेशनल पीस-बिल्डिंग सपोर्ट' (व्यावहारिक रूप से राष्ट्रीय स्वामित्व: अंतरराष्ट्रीय शांति-निर्माण सहयोग के माध्यम से समावेशी सरकारी संस्थानों को मज़बूत करना) विषय पर पीस-बिल्डिंग कमीशन की मंत्री-स्तरीय बैठक में भी हिस्सा लिया।
MEA ने X पर कहा, "उन्होंने शांति-निर्माण में राष्ट्रीय स्वामित्व के महत्व को दोहराया और राष्ट्र-निर्माण पर भारत का नज़रिया साझा किया। इसमें सत्ता के विकेंद्रीकरण, मानव-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और समावेशी विकास पर ध्यान दिया गया, जिसमें राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर विशेष ज़ोर दिया गया।"
इसमें आगे कहा गया, "भारत ने LDC (सबसे कम विकसित देशों) और SIDS (छोटे द्वीपीय विकासशील देशों) को प्राथमिकता देते हुए, इंडिया-UN डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड के ज़रिए भारी मात्रा में ग्रांट, रियायती क्रेडिट और क्षमता-निर्माण में सहयोग दिया है।"