ढाका। मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। सोमवार को बांग्लादेश में आयोजित ‘बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026’ के दौरान उन्होंने कहा कि मालदीव जैसे छोटे द्वीपीय देशों के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत के साथ सहयोग महत्वपूर्ण है। सम्मेलन का आयोजन ढाका में सेंटर फॉर गवर्नेंस स्टडीज (CGS) ने 3 से 5 अक्टूबर तक किया। नशीद सम्मेलन के प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे।बातचीत के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल पर कहा कि अलग-अलग देशों की अपनी भूमिकाएं हैं, लेकिन उनकी क्षमताएं भी अलग हैं। उन्होंने कहा, “अपनी सुरक्षा के लिए हमें भारत की जरूरत है।” उनके मुताबिक दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में शांति बनाए रखने के लिए देशों का मिलकर काम करना ज्यादा बेहतर विकल्प है।नशीद का बयान ऐसे समय आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग लगातार महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। हाल ही में भारत की मेजबानी में कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव की उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बैठक में भी मालदीव सहित सदस्य देशों ने हिंद महासागर क्षेत्र में प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
छोटा देश होने के बावजूद भारत हमारी बात सुनता है’
भारत के साथ अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए मोहम्मद नशीद ने कहा कि उन्होंने हमेशा पाया है कि भारतीय अधिकारियों के सामने विभिन्न मुद्दों को रखा जा सकता है और वे उनकी बात सुनते हैं। उन्होंने मालदीव की छोटी आबादी और सीमित संसाधनों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इसके बावजूद भारत उसकी चिंताओं को सुनता है।नशीद ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर होने वाले खर्च का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि छोटे देश अपनी सैन्य क्षमताओं पर कितना खर्च कर सकते हैं, इसकी व्यावहारिक सीमाएं होती हैं। इसी वजह से उनके अनुसार साझा सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग का मॉडल अधिक उपयोगी हो सकता है।उनका कहना था कि दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अलग-अलग देशों द्वारा अकेले प्रयास करने की तुलना में मिलकर काम करना बेहतर है।
बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन में हुए शामिल
मोहम्मद नशीद बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित तीन दिवसीय ‘बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026’ में शामिल हुए। CGS की ओर से आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय मंच में राजनीतिक नेताओं, नीति निर्माताओं, राजनयिकों, विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में इंडो-पैसिफिक, भू-राजनीति, सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, आर्थिक बदलाव, जलवायु संकट और शासन जैसे विषयों को चर्चा के केंद्र में रखा गया।नशीद ने सम्मेलन के ‘द न्यू स्ट्रैटेजिक मिडिल’ सत्र में भी हिस्सा लिया। यह सम्मेलन के प्रमुख सत्रों में शामिल था।
जलवायु परिवर्तन पर भी रखी बात
क्षेत्रीय सुरक्षा के अलावा नशीद ने जलवायु परिवर्तन पर भी विस्तार से अपने विचार रखे। मालदीव जैसे छोटे द्वीपीय देशों के लिए समुद्र का बढ़ता स्तर लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय रहा है।सम्मेलन के अंतिम दिन नशीद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित देश दान या सहायता नहीं, बल्कि अपने उचित अधिकार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जिन देशों ने वैश्विक संसाधनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर आर्थिक विकास हासिल किया है, उन्हें जलवायु संकट से सबसे अधिक प्रभावित देशों की परिस्थितियों पर भी ध्यान देना चाहिए।उन्होंने समुद्र के बढ़ते स्तर से द्वीपीय देशों की भूमि, समुद्री सीमाओं और भविष्य में उनकी संप्रभुता से जुड़े सवालों का भी जिक्र किया। नशीद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को केवल मालदीव की समस्या समझना उचित नहीं होगा, क्योंकि इसके प्रभाव दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई दे रहे हैं।
भारत-मालदीव संबंधों पर नशीद का पुराना रुख
नशीद इससे पहले भी भारत के साथ करीबी संबंधों की वकालत करते रहे हैं। हाल में उन्होंने मालदीव की विदेश नीति में पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने और उनमें भारत को पहले स्थान पर रखने की बात कही थी। उनका तर्क था कि भारत को प्राथमिकता देने का अर्थ मालदीव के हितों को कमतर करना या दूसरे मित्र देशों के साथ संबंधों को कमजोर करना नहीं है।सोमवार के उनके बयान में भी यही रुख क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि छोटे देशों की सीमित सैन्य और आर्थिक क्षमता को देखते हुए सामूहिक प्रयास अधिक व्यावहारिक हो सकते हैं।
हिंद महासागर में सहयोग पर जोर
नशीद के मुताबिक हिंद महासागर और दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखना किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग, संवाद और साझा प्रयास इसके लिए जरूरी हैं।उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि मालदीव जैसे छोटे द्वीपीय देश अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरी तरह अकेले पूरा करने की स्थिति में नहीं होते। ऐसे में भारत जैसे बड़े पड़ोसी के साथ सहयोग को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन में सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों के साथ जलवायु परिवर्तन पर नशीद की टिप्पणियों ने छोटे द्वीपीय देशों के सामने मौजूद दोहरी चुनौती को सामने रखा—एक ओर क्षेत्रीय एवं समुद्री सुरक्षा और दूसरी ओर जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाला दीर्घकालिक खतरा। इन दोनों मुद्दों पर नशीद ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जरूरी बताया।