नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक बार फिर सकारात्मक संकेत दिए हैं। IMF ने भारत को वैश्विक आर्थिक विकास के प्रमुख इंजनों में से एक बताते हुए कहा है कि मजबूत घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है। दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत की विकास दर पर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की नजर बनी हुई है।
IMF लंबे समय से भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिनता रहा है। संस्था का मानना है कि वैश्विक विकास में भारत का योगदान लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। विशाल घरेलू बाजार, बढ़ता उपभोग और बुनियादी ढांचे पर खर्च जैसी वजहें भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को सहारा दे रही हैं। भारत के लिए एक बड़ी ताकत उसकी घरेलू मांग है। करीब 1.4 अरब की आबादी वाला देश दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में शामिल है। बढ़ती आय, शहरीकरण और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने उपभोग के नए अवसर पैदा किए हैं। इसके साथ ही सरकार की ओर से सड़क, रेलवे, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर किए जा रहे निवेश का असर भी आर्थिक गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ी भारत की अहमियत
पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव के बीच भारत ने मैन्युफैक्चरिंग और निवेश आकर्षित करने की कोशिशें तेज की हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल और अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए भी देश में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की कोशिश जारी है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी भारत की आर्थिक प्रगति के महत्वपूर्ण पहलुओं में गिना जाता है। डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी व्यवस्थाओं ने आर्थिक लेन-देन को तेजी से औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भूमिका निभाई है।
चुनौतियों पर भी नजर जरूरी
तेज विकास के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां बनी हुई हैं। रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना, महंगाई को नियंत्रित रखना, निजी निवेश बढ़ाना और वैश्विक व्यापार में जारी अनिश्चितताओं से निपटना अहम होगा। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी भारत जैसी बड़ी ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक प्रतिबंध और वित्तीय बाजारों की अस्थिरता विकास दर के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में मजबूत घरेलू आर्थिक आधार भारत के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। IMF की ओर से भारत की भूमिका को लेकर सकारात्मक आकलन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रही है। यदि भारत निवेश, रोजगार, विनिर्माण और घरेलू मांग की गति बनाए रखता है तो आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में उसकी हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।
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