कोलंबो। भारत ने पड़ोसी देश श्रीलंका की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत की ओर से श्रीलंका को तपेदिक यानी टीबी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली करीब तीन टन आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा ने कोलंबो स्थित स्वास्थ्य मंत्रालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ये दवाइयां श्रीलंका के स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री डॉ. नलिनदा जयतिस्सा को सौंपीं। इस अवसर पर श्रीलंका के उप स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हंसका विजेमुनी भी उपस्थित रहे। भारत की इस पहल को दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में जारी सहयोग के महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की ओर से उपलब्ध कराई गई दवाइयों का उद्देश्य श्रीलंका में टीबी के मरीजों के लिए आवश्यक उपचार की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। यह सहायता श्रीलंका सरकार के अनुरोध पर प्रदान की गई है। दवाइयों की व्यवस्था में भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सहयोग किया। इस पहल से श्रीलंका के स्वास्थ्य संस्थानों को टीबी के मरीजों के उपचार में मदद मिलने की उम्मीद है।भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस महत्वपूर्ण पहल की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका टीबी के खिलाफ लड़ाई में एक साथ खड़े हैं। उन्होंने श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नलिनदा जयतिस्सा को आवश्यक टीबी-रोधी दवाइयों की तीन टन की खेप सौंपने पर प्रसन्नता व्यक्त की। संतोष झा ने कहा कि ये दवाइयां श्रीलंका में टीबी के उपचार और इस बीमारी को नियंत्रित करने के प्रयासों में मदद करेंगी। इसके साथ ही टीबी से निपटने की देश की क्षमता को मजबूत करने में भी योगदान देंगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई दवाइयों की इस खेप में 15 लाख से अधिक गोलियां शामिल हैं। इनकी अनुमानित कीमत 5.2 करोड़ श्रीलंकाई रुपये बताई गई है। इनमें टीबी के इलाज में उपयोग होने वाली आवश्यक प्रथम-पंक्ति की दवाइयां भी शामिल हैं। इन दवाइयों का उपयोग निर्धारित उपचार के तहत किया जाता है। स्वास्थ्य सेवाओं में इनकी नियमित उपलब्धता मरीजों का इलाज जारी रखने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।इससे पहले 28 सितंबर को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने श्रीलंका के लिए टीबी-रोधी दवाइयों की खेप भेजे जाने की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारतीय वायुसेना के सी-130जे परिवहन विमान के माध्यम से करीब तीन टन दवाइयां कोलंबो भेजी गई हैं। जयशंकर ने एक्स पर अपने संदेश में स्पष्ट किया था कि भारत श्रीलंका की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस सहायता को स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत और श्रीलंका के बीच जारी सहयोग का हिस्सा बताया था।
भारतीय वायुसेना के विमान से दवाइयों को भेजने के बाद अब औपचारिक रूप से श्रीलंका सरकार को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई है। इस सहायता का महत्व इसलिए भी है क्योंकि टीबी जैसी संक्रामक बीमारी के इलाज में समय पर उचित दवाइयों की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। निर्धारित अवधि तक दवाइयों का नियमित सेवन टीबी के उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति स्वास्थ्य संस्थानों और उपचार प्राप्त कर रहे मरीजों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।भारत और श्रीलंका के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग का लंबा इतिहास रहा है। भारत ने विभिन्न अवसरों पर श्रीलंका को दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य संबंधी अन्य आवश्यक संसाधनों की सहायता उपलब्ध कराई है। दोनों देशों के बीच अस्पतालों के निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाओं के उन्नयन, चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति तथा स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग किया जाता रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य श्रीलंका की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में सहयोग देना है।
इससे पहले अगस्त 2026 में भी भारत ने श्रीलंका को डेंगू नियंत्रण के प्रयासों में सहयोग देने के लिए 500 लीटर टेक्निकल मैलाथियान उपलब्ध कराया था। यह सहायता भी श्रीलंका सरकार के अनुरोध पर प्रदान की गई थी। टीबी-रोधी दवाइयों की ताजा खेप इसी स्वास्थ्य सहयोग की एक और कड़ी हैटीबी एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। हालांकि यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी का उपचार संभव है, लेकिन इसके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों का पूरा कोर्स करना आवश्यक होता है। उपचार बीच में छोड़ने से बीमारी दोबारा सक्रिय होने और दवा प्रतिरोधी टीबी विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था में जरूरी दवाइयों की नियमित उपलब्धता टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण आधार है।
भारत की ओर से दी गई इस सहायता का संबंध केवल दवाइयों की आपूर्ति से नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग से भी है। श्रीलंका सरकार की ओर से जताई गई आवश्यकता के अनुसार भारत ने दवाइयों की व्यवस्था की और उन्हें कोलंबो पहुंचाया। इसके बाद भारतीय उच्चायुक्त ने औपचारिक रूप से दवाइयों को श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा।भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के तहत श्रीलंका के साथ स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्रों में सहयोग को विशेष महत्व दिया जाता है। हालिया सहायता भी इसी व्यापक साझेदारी का हिस्सा है। इस पहल से टीबी के मरीजों के लिए इलाज की निरंतरता बनाए रखने और श्रीलंका की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सहयोग देने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई है।