नई दिल्ली। भारत और स्विट्जरलैंड ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देते हुए माइग्रेशन, युवाओं के रोजगार, परिवहन तकनीक, रिसर्च और इनोवेशन सहित कई क्षेत्रों में अहम समझौते किए हैं। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों और सहयोग पहलों की घोषणा की। इनमें सबसे प्रमुख माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप (MMP) है, जिसके तहत पात्र लोगों के लिए पांच साल तक की वैधता वाले मल्टीपल-एंट्री वीजा का प्रावधान किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन के बीच सोमवार को नई दिल्ली में व्यापक द्विपक्षीय बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश के अलावा विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, मोबिलिटी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा की। राष्ट्रपति परमेलिन तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं और उनके साथ वरिष्ठ अधिकारियों तथा कारोबारी प्रतिनिधियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है।
दोनों देशों के बीच हुए माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौते का उद्देश्य कानूनी और व्यवस्थित माइग्रेशन तथा मोबिलिटी को आसान बनाना है। इसके साथ ही अनियमित प्रवासन, मानव शोषण और मानव तस्करी जैसी गतिविधियों से दोनों देशों के कानूनों के अनुरूप निपटने में सहयोग बढ़ाने की व्यवस्था भी इसमें शामिल है।
इस समझौते की सबसे अहम बात पांच साल तक की वैधता वाले मल्टीपल-एंट्री वीजा का प्रावधान है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसके तहत प्रत्येक यात्रा में छह महीने तक ठहरने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा छात्रों के लिए एक साल का नवीकरणीय परमिट भी शामिल किया गया है। इससे दोनों देशों के बीच छात्रों, पेशेवरों और अन्य पात्र लोगों की आवाजाही के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार होगा।
भारत और स्विट्जरलैंड ने युवाओं के लिए रोजगार और पेशेवर अनुभव के अवसर बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों देशों ने 'यंग प्रोफेशनल्स के आदान-प्रदान' यानी Young Professionals Scheme (YPS) से संबंधित समझौते को अंतिम रूप दिया है। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों को दूसरे देश में अस्थायी रोजगार के जरिए अपने पेशेवर और भाषा कौशल को बेहतर करने का अवसर देना है।
इस व्यवस्था के तहत भारत और स्विट्जरलैंड से सालाना 300-300 युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान का प्रावधान है। भविष्य में इस संख्या को बढ़ाकर 500 तक किया जा सकता है। यानी दोनों देशों के युवाओं के लिए विदेश में काम का अनुभव हासिल करने और अपने कौशल को विकसित करने के नए अवसर खुल सकते हैं।
YPS में नागरिकता और रेजिडेंसी स्टेटस के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रिया के लिए भी समयसीमा तय की गई है। आधिकारिक सूची के मुताबिक इसमें 30 और 90 दिनों की समयसीमा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसका उद्देश्य संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाना है।
मोबिलिटी और युवाओं के अलावा दोनों देशों ने परिवहन और बुनियादी ढांचे में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। इसके लिए ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी, मोबिलिटी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सहयोग का समझौता किया गया। इसके दायरे में इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी और टनलिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। साथ ही उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच वैज्ञानिक अनुसंधान और इनोवेशन को लेकर भी सहयोग आगे बढ़ाया गया है। भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन के बीच दीर्घकालिक संयुक्त अनुसंधान तथा संस्थागत साझेदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में पहल की गई है। इससे दोनों देशों के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के बीच साझा परियोजनाओं के लिए नए अवसर बनने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन की वार्ता में आर्थिक संबंध भी प्रमुख एजेंडे में रहे। दोनों देशों के संबंधों को भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच हुए Trade and Economic Partnership Agreement यानी TEPA से नई गति मिली है। स्विस सरकार के अनुसार परमेलिन की भारत यात्रा इस समझौते के लागू होने की पहली वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है।
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए नए समझौतों में मोबिलिटी से जुड़े प्रावधान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पांच साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीजा, नवीकरणीय स्टूडेंट परमिट और युवा पेशेवरों के लिए निर्धारित एक्सचेंज सिस्टम से दोनों देशों के बीच लोगों का संपर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।
हालांकि पांच साल की व्यवस्था का अर्थ पांच साल तक लगातार स्विट्जरलैंड में रहने की अनुमति नहीं है। आधिकारिक विवरण में मल्टीपल-एंट्री वीजा की वैधता पांच साल तक और प्रत्येक यात्रा में ठहरने की अवधि छह महीने तक बताई गई है। इसलिए इसे स्थायी निवास या पांच साल के लगातार प्रवास की सुविधा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति परमेलिन की इस वार्ता से भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों में व्यापार और निवेश के साथ-साथ शिक्षा, रोजगार, तकनीक, रिसर्च और लोगों की आवाजाही जैसे क्षेत्रों में सहयोग का दायरा बढ़ा है। खासकर युवाओं और पेशेवरों के लिए तैयार नई व्यवस्था आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच प्रतिभा और कौशल के आदान-प्रदान को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Tags: