नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि भारत और पोलैंड मिलकर भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करने और वर्ष 2030 तक अपने साझा द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करेंगे। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक अवसरों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड की अर्थव्यवस्थाओं में हो रही प्रगति से व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसके बाद संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत-पोलैंड साझेदारी की अहमियत बताई। दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत-पोलैंड की बढ़ती ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितता और बदलाव के दौर से गुजर रही है। इसके बावजूद भारत और पोलैंड विकास, तकनीक और नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं।उन्होंने पोलैंड की अर्थव्यवस्था की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की जीडीपी ने एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। इस उपलब्धि पर उन्होंने प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क को बधाई दी।प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाती है।उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों की बढ़ती आर्थिक क्षमता द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देगी।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से बढ़ेंगे अवसर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते से जुड़ी प्रगति ने भारत-पोलैंड आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं को और मजबूत किया है।उन्होंने बताया कि दोनों देशों की कंपनियां व्यापार और निवेश के नए क्षेत्रों में सहयोग कर सकती हैं। पोलैंड मध्य और पूर्वी यूरोप में भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।भारत और पोलैंड के बीच वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार लगभग छह अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर बताया गया है। दोनों देश आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।
2030 तक व्यापार लक्ष्य हासिल करने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड के प्रधानमंत्री के साथ भारत आए बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का विशेष उल्लेख कियाउन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री टस्क अपने साथ प्रमुख उद्योगपतियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को लेकर भारत आए हैं।मोदी ने भरोसा जताया कि दोनों देशों की कंपनियां मिलकर दुनिया के लिए विश्वसनीय सप्लाई चेन विकसित करेंगी और वर्ष 2030 के साझा द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम करेंगी।उन्होंने कहा कि मजबूत आपूर्ति शृंखला वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में भारत और पोलैंड के बीच सहयोग से दोनों देशों के उद्योगों को लाभ मिल सकता है।
रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग
भारत और पोलैंड ने केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में भी संबंध मजबूत करने पर सहमति जताई है।बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा की।पोलैंड की रक्षा कंपनियां भारत के साथ औद्योगिक सहयोग और सैन्य उपकरणों के संयुक्त विकास की संभावनाएं तलाश रही हैं। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा और नई तकनीक के क्षेत्रों में भी निवेश के अवसरों पर ध्यान दिया जा रहा है।
व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल से निवेश को मिलेगी गति
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनके साथ पोलैंड के वित्त एवं अर्थव्यवस्था मंत्री आंद्रेज डोमांस्की और एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया है।इस यात्रा के दौरान नई दिल्ली और बेंगलुरु में भारत-पोलैंड व्यापार मंच आयोजित किए जाने हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दोनों देशों की कंपनियों के बीच निवेश, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक सहयोग के अवसर तलाशना है।
रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा
भारत और पोलैंड के संबंध अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की पोलैंड यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचे थे। इसके बाद दोनों देशों ने आर्थिक और तकनीकी संबंधों को विस्तार देने की दिशा में प्रयास तेज किए हैं।प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की मौजूदा भारत यात्रा को इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर खोल सकता है। हालांकि, वर्ष 2030 के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनियों के बीच व्यावहारिक साझेदारी और प्रस्तावित परियोजनाओं को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।
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