जोधपुर। भारत में चल रहे बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ में भारतीय और फ्रांसीसी वायु सेनाओं के बीच राफेल लड़ाकू विमान से जुड़े ऑपरेशनल अनुभवों का आदान-प्रदान भविष्य की हवाई लड़ाई के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फ्रांस के एयर डिफेंस एंड एयर ऑपरेशंस कमांड के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल जूलियन सबेने ने कहा कि दोनों वायु सेनाओं को वास्तविक ऑपरेशनल परिस्थितियों में राफेल के इस्तेमाल का अनुभव है और अब संयुक्त अभ्यास के जरिए एक-दूसरे से सीखने का अवसर मिल रहा है।
सबेने ने ‘एक्सरसाइज तरंग शक्ति’ को फ्रांस के PEGASE 26 मिशन का एक प्रमुख हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच वायुसेना सहयोग कोई नया नहीं है, बल्कि इसका इतिहास कई दशक पुराना है। भारतीय वायुसेना ने 1950 के दशक से फ्रांसीसी मूल के लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। भारत में फ्रांसीसी विमानों की शुरुआत Ouragan से हुई, जिसे भारतीय वायुसेना में ‘तूफानी’ के नाम से भी जाना गया। इसके बाद Mystere IVA, Jaguar, Mirage 2000 और अब Rafale जैसे विमानों ने इस रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाया। भारतीय रक्षा मंत्रालय के ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार पहले चार Ouragan विमान अक्टूबर 1953 में भारत पहुंचे थे।
फ्रांसीसी अधिकारी ने कहा कि भारतीय वायुसेना पिछले कई वर्षों से राफेल का संचालन कर रही है। ऐसे में फ्रांस और भारत के पायलट एक ही प्लेटफॉर्म से जुड़े अनुभव, रणनीति और ऑपरेशनल तौर-तरीकों को बेहतर तरीके से साझा कर सकते हैं। उनके मुताबिक यह संयुक्त प्रशिक्षण केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मिशन प्लानिंग, कॉम्बैट ऑपरेशन, एयर डिफेंस, समन्वय और अलग-अलग परिस्थितियों में राफेल की क्षमता के इस्तेमाल पर भी केंद्रित है।
तरंग शक्ति 2026 का आयोजन राजस्थान के जोधपुर वायु सेना स्टेशन पर किया जा रहा है। अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चलेगा। इस बार इसकी थीम ‘Power in Partnership’ यानी ‘साझेदारी में शक्ति’ रखी गई है। भारत के साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश की वायु सेनाएं इसमें हिस्सा ले रही हैं। अभ्यास में राफेल के अलावा F-35, F-16, A400M, MRTT, C-130 और KC-30A जैसे अलग-अलग प्रकार के विमान शामिल हैं।
इस अभ्यास का मकसद अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक साथ मिलकर जटिल सैन्य अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करना है। इसमें हवाई युद्ध, एयर डिफेंस, एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग, परिवहन, निगरानी और अन्य जटिल मिशनों का अभ्यास किया जा रहा है।
जूलियन सबेने ने कहा कि भारत और फ्रांस के लिए राफेल एक साझा प्लेटफॉर्म है। इससे दोनों वायु सेनाओं को ट्रेनिंग के दौरान तकनीकी और ऑपरेशनल स्तर पर गहरे अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। उन्होंने संकेत दिया कि हाल के वास्तविक ऑपरेशनल अनुभवों से मिली सीख को इस तरह के अभ्यासों में शामिल करने से पायलटों और मिशन प्लानर्स को भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए तैयार होने में मदद मिलती है।
फ्रांस की PEGASE 26 तैनाती 8 सितंबर से 15 अक्टूबर तक निर्धारित है। इसके तहत फ्रांसीसी एयर एंड स्पेस फोर्स लंबी दूरी तक अपने लड़ाकू, टैंकर और ट्रांसपोर्ट विमानों को तैनात कर रही है। फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिशन में Rafale, A330 MRTT Phénix और A400M Atlas जैसे विमान शामिल हैं। मिशन का उद्देश्य लंबी दूरी पर तेजी से एयर पावर तैनात करने और अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के साथ संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता को मजबूत करना है।
PEGASE 26 के तहत फ्रांसीसी विमानों ने दुनिया के कई हिस्सों की यात्रा की है। भारत पहुंचने से पहले फ्रांसीसी दल ने अन्य साझेदार देशों के साथ भी अभ्यास किया। इसके बाद फ्रांस के विमान जोधपुर पहुंचे, जहां वे तरंग शक्ति में भारतीय वायुसेना और अन्य देशों की वायु सेनाओं के साथ हिस्सा ले रहे हैं।
सबेने ने कहा कि भारत फ्रांस का महत्वपूर्ण वैश्विक रणनीतिक साझेदार है और फ्रांसीसी वायुसेना तरंग शक्ति में अपनी भागीदारी को इसी साझेदारी की निरंतरता के रूप में देखती है। फ्रांसीसी दल ने लंबी दूरी तय कर अपने राफेल विमानों को जोधपुर पहुंचाया है।
भारत और फ्रांस की वायु सेनाओं के बीच पहले से भी कई संयुक्त अभ्यास होते रहे हैं। दोनों देश ‘गरुड़’ जैसे द्विपक्षीय वायु अभ्यास करते हैं। नवंबर 2025 में फ्रांस में आयोजित गरुड़ अभ्यास में भी दोनों वायु सेनाओं ने जटिल मिशन प्लानिंग, स्ट्राइक और एस्कॉर्ट ऑपरेशन तथा एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने से जुड़े अभ्यास किए थे।
तरंग शक्ति का दायरा इससे भी बड़ा है क्योंकि इसमें कई देशों के विमान एक साथ हिस्सा ले रहे हैं। इससे पायलटों को ऐसे माहौल में प्रशिक्षण मिलता है, जहां अलग-अलग विमान, सेंसर, हथियार प्रणालियां और ऑपरेशनल प्रक्रियाएं एक ही मिशन का हिस्सा होती हैं।
भारतीय वायुसेना भी तरंग शक्ति को भविष्य की हवाई युद्ध चुनौतियों के लिए तैयारी के बड़े मंच के रूप में देख रही है। अभ्यास के दौरान एयरक्रू, मिशन प्लानर्स और तकनीकी कर्मियों के बीच पेशेवर बातचीत तथा अनुभव साझा करने पर विशेष जोर दिया गया है।
भारत और फ्रांस दोनों के पास राफेल होने से इस साझेदारी को एक अतिरिक्त आयाम मिलता है। एक ही लड़ाकू प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले पायलट और तकनीकी दल आपस में रणनीतिक अनुभव, रखरखाव संबंधी सीख और मिशन से जुड़ी सर्वोत्तम प्रक्रियाएं साझा कर सकते हैं।
जूलियन सबेने के मुताबिक यही अनुभव दोनों देशों को भविष्य की जटिल हवाई लड़ाइयों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करता है। तरंग शक्ति 2026 के जरिए भारत-फ्रांस वायुसेना सहयोग अब केवल रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संयुक्त ऑपरेशनल ट्रेनिंग, रणनीतिक अनुभवों के आदान-प्रदान और भविष्य की युद्ध तैयारियों तक पहुंच चुका है।