New York न्यूयॉर्क: यूएन सिक्योरिटी काउंसिल होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा बढ़ाने के बहरीन समर्थित प्रस्ताव को पास करने में असफल रही। प्रस्ताव पर चीन और रूस ने वीटो का प्रयोग किया, जिससे इसका पास होना रुक गया। बहरीन की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में तेल और माल परिवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, जो हाल के तनावपूर्ण घटनाक्रमों और क्षेत्रीय संघर्षों के चलते अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बना हुआ है। प्रस्ताव में यह सुझाव दिया गया था कि स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय निगरानी और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाए।
हालांकि, चीन और रूस ने प्रस्ताव के कुछ प्रावधानों और उसकी अंतरराष्ट्रीय सैन्य भागीदारी के दायरे पर आपत्ति जताई। दोनों स्थायी सदस्य देशों ने कहा कि प्रस्ताव क्षेत्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन कर सकता है और इसमें राजनीतिक पक्षपात की संभावना है। उनके वीटो के कारण प्रस्ताव सिक्योरिटी काउंसिल में बहुमत के बावजूद विफल रहा।
सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य देशों ने बहरीन के प्रयासों की सराहना की और कहा कि यह कदम क्षेत्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण था। वहीं, वीटो का प्रयोग होने से संयुक्त राष्ट्र की फैसले लेने की क्षमता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि चीन और रूस का वीटो संकेत है कि वे क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में सैन्य हस्तक्षेप या विदेशी निगरानी के पक्ष में नहीं हैं, और उनका मकसद संतुलन बनाए रखना है।
यूएन के अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में इस विषय पर नए मसौदे पर चर्चा जारी रहेगी और हो सकता है कि सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए दोबारा प्रयास किए जाएँ। इस असफल प्रयास से क्षेत्रीय देशों और वैश्विक व्यापारिक मार्गों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता और बढ़ गई है।