नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में विभिन्न मुद्दों को लेकर बढ़े तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूर्व वरिष्ठ राजनयिक सुरेंद्र कुमार ने बुधवार को दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने, आपसी मतभेदों को कम करने और विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का महत्वपूर्ण अवसर है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के दौरान पुराने रुख को दोहराने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि दोनों देशों के बीच किसी बड़ी सफलता पर सहमति बन गई है।
जयशंकर और रुबियो की बातचीत पर पूर्व राजनयिक की प्रतिक्रिया
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए सुरेंद्र कुमार ने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो महत्वपूर्ण देश हैं और उनके बीच लगातार उच्चस्तरीय संवाद होना आवश्यक है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच होने वाली बातचीत आपसी समझ बढ़ाने और विवादित मुद्दों को सुलझाने में मददगार साबित हो सकती है।उन्होंने कहा कि जब भी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मिलते हैं, तो दोनों देशों को अपने विचार साझा करने और मतभेद दूर करने का अवसर मिलता है।कुमार के अनुसार, हाल के दिनों में भारत-अमेरिका संबंधों में कई मुद्दों को लेकर तनाव देखने को मिला है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत से कूटनीतिक माहौल बेहतर होने की संभावना है।
दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद
पूर्व राजनयिक ने उम्मीद जताई कि जयशंकर और रुबियो के बीच बातचीत से दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि हालिया परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच पैदा हुए तनाव को कम करने के लिए संवाद बेहद जरूरी है।सुरेंद्र कुमार ने कहा, "मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि रुबियो और जयशंकर के बीच हुई बातचीत से निश्चित रूप से माहौल में सुधार आया होगा, जो पहले काफी तनावपूर्ण था।"उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्षों के बीच उच्चस्तरीय संवाद जारी रहना महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी बैठक के बाद संबंधों में वास्तविक प्रगति का आकलन उसके ठोस परिणामों से ही किया जा सकता है।
व्यापार समझौते पर अमेरिका के संकेतों का स्वागत
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी सुरेंद्र कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उन बयानों का स्वागत किया, जिनमें संकेत दिया गया है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण के करीब पहुंच सकता है।कुमार ने कहा कि अगर यह समझौता सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो इससे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी। दोनों देशों के व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने के साथ निवेश और कारोबार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।हालांकि, उन्होंने इस समझौते को लेकर बार-बार दिए जा रहे आश्वासनों पर सवाल भी उठाए।
छह महीने पहले भी किया गया था समझौते का दावा
सुरेंद्र कुमार ने कहा कि व्यापार समझौते के जल्द पूरा होने की बात पहले भी कई बार कही जा चुकी है, लेकिन अब तक अंतिम समझौता सामने नहीं आया है।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "करीब होने का क्या मतलब है? छह महीने पहले भारत में अमेरिकी राजदूत ने कहा था कि इस समझौते का पहला हिस्सा बस एक हफ्ते दूर है। अब तो वह हफ्ता भी बीत चुका है।"उनका कहना था कि केवल सकारात्मक बयानों के आधार पर किसी समझौते को सफल नहीं माना जा सकता। इसके लिए दोनों देशों को ठोस निर्णय लेने होंगे।
ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर भी चर्चा
जयशंकर और रुबियो की मुलाकात में व्यापार के अलावा ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी बातचीत हुई। अमेरिकी पक्ष ने भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने और अमेरिकी तकनीक एवं रक्षा उपकरणों की खरीद को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।सुरेंद्र कुमार ने कहा कि ऊर्जा खरीद से संबंधित निर्णय लेते समय भारत को कीमत, उपलब्धता और आर्थिक व्यवहार्यता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका को भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से समझना होगा।
ठोस नतीजों से ही मजबूत होंगे रिश्ते
पूर्व राजनयिक ने कहा कि अमेरिका भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, लेकिन इसके लिए घोषणाओं के साथ वास्तविक कार्रवाई भी जरूरी है।उन्होंने उम्मीद जताई कि विदेश मंत्रियों के बीच जारी संवाद आपसी विश्वास बहाल करने और लंबित मुद्दों के समाधान में सहायक साबित होगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पूरा होने की स्थिति में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।
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