इस्लामाबाद। पाकिस्तान के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मंगलवार को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जम्मू-कश्मीर से जुड़े सवाल पर सीधे टिप्पणी नहीं की। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए गुटेरेस ने कश्मीर से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर पूछे गए सवाल के जवाब में व्यापक रूप से शांति, बातचीत और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। गुटेरेस 6 से 8 अक्टूबर तक पाकिस्तान की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से जम्मू-कश्मीर और उससे जुड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर सवाल किया। गुटेरेस ने इस मुद्दे पर कोई विशिष्ट टिप्पणी करने के बजाय कहा कि उनका मानना है कि समस्याओं का समाधान शांति और बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनकी सहायता हमेशा उपलब्ध है।
इसके बाद उन्होंने चर्चा का केंद्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना और उसकी मौजूदा प्रतिनिधित्व व्यवस्था की ओर मोड़ दिया। गुटेरेस ने कहा कि सुरक्षा परिषद आज की दुनिया का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परिषद के स्थायी सदस्यों में यूरोप का मजबूत प्रतिनिधित्व है, जबकि अफ्रीका का कोई स्थायी सदस्य नहीं है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं।
गुटेरेस लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करते रहे हैं। वह पहले भी कह चुके हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी परिषद की संरचना मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। उन्होंने विशेष रूप से अफ्रीकी देशों की कम हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया है और कहा है कि परिषद में प्रतिनिधित्व का मौजूदा ढांचा उसकी वैधता और प्रभावशीलता दोनों को प्रभावित करता है।
इस्लामाबाद में भी गुटेरेस ने इसी रुख को दोहराते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद के सामने वैधता और प्रभावशीलता की समस्या है। उन्होंने बहुपक्षवाद को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं को आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब कई विकासशील देश लंबे समय से सुरक्षा परिषद में व्यापक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों का तर्क रहा है कि मौजूदा स्थायी सदस्यता व्यवस्था दुनिया की वर्तमान जनसंख्या, आर्थिक प्रभाव और राजनीतिक वास्तविकताओं को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती।
गुटेरेस ने यह भी संकेत दिया कि सुरक्षा परिषद की प्रभावशीलता केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित सवाल नहीं है। वीटो के इस्तेमाल के कारण कई बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर परिषद निर्णायक कार्रवाई नहीं कर पाती। उन्होंने पहले भी कहा है कि परिषद की इस संरचनात्मक समस्या के कारण संयुक्त राष्ट्र की व्यापक छवि पर असर पड़ता है, जबकि संगठन के अन्य हिस्से मानवीय सहायता, विकास, जलवायु और शांति स्थापना जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं।
मंगलवार की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुटेरेस ने पाकिस्तान की क्षेत्रीय कूटनीतिक भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए परिस्थितियां बनाने में पाकिस्तान के योगदान का उल्लेख किया और सभी पक्षों से संघर्ष समाप्त कर कूटनीति की ओर लौटने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक ब्रीफिंग नोट में भी पाकिस्तान में गुटेरेस और इशाक डार की बैठक तथा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की पुष्टि की गई है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इस दौरान विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों को उठाया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कश्मीर, सिंधु जल समझौते और अफगानिस्तान की धरती से कथित आतंकवादी गतिविधियों जैसे विषयों का भी उल्लेख किया। हालांकि कश्मीर पर पत्रकार के सीधे सवाल के जवाब में गुटेरेस ने किसी प्रस्ताव या किसी पक्ष की स्थिति पर टिप्पणी नहीं की।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की पाकिस्तान यात्रा उनके मौजूदा कार्यकाल के अंतिम महीनों में हो रही है। उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होना है। इस दौरे के दौरान उनका पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने का कार्यक्रम है। संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि इस यात्रा में क्षेत्रीय शांति, बहुपक्षवाद, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
गुटेरेस का सुरक्षा परिषद सुधार पर जोर नया नहीं है। वह लगातार इस बात की वकालत करते रहे हैं कि वैश्विक शासन की संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी बनाया जाए। उनका कहना रहा है कि जब दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक संरचना बदल चुकी है, तब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की संरचना में भी बदलाव जरूरी है।
इस्लामाबाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कश्मीर पर सीधे जवाब के बजाय सुरक्षा परिषद में सुधार की चर्चा ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, उसकी सीमाओं और वैश्विक प्रतिनिधित्व को लेकर बहस को सामने ला दिया है। गुटेरेस का संदेश साफ रहा कि विवादों का समाधान बातचीत और शांति से होना चाहिए, लेकिन साथ ही संयुक्त राष्ट्र की सबसे शक्तिशाली संस्था सुरक्षा परिषद को भी बदलती दुनिया के अनुरूप अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी बनाने की जरूरत है।