अंकारा। पूर्वी तुर्किस्तान की स्वतंत्रता और उइगर समुदाय के अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। निर्वासित पूर्वी तुर्किस्तान सरकार (East Turkistan Government-in-Exile – ETGE) ने तुर्की की राजधानी अंकारा में विभिन्न राजनीतिक दलों और तुर्किक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर पूर्वी तुर्किस्तान की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए समर्थन मांगा है। यह बातचीत तुर्किक राज्यों के संगठन (OTS) के 13वें शिखर सम्मेलन से पहले हुई थी। ETGE ने तुर्की से इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करने और कूटनीतिक, संसदीय तथा कानूनी सहयोग प्रदान करने की अपील की है।ETGE ने 30 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में बताया कि उसके प्रतिनिधिमंडल ने तुर्की के प्रमुख राजनीतिक दलों से बातचीत की। इस दौरान चीन के शिनजियांग क्षेत्र, जिसे ETGE पूर्वी तुर्किस्तान कहता है, में मानवाधिकारों की स्थिति और वहां रहने वाले उइगर तथा अन्य तुर्किक समुदायों के अधिकारों का मुद्दा उठाया गया। संगठन ने स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय के अधिकार को अपनी प्रमुख मांग बताया।
तुर्की के छह प्रमुख राजनीतिक दलों से मुलाकात
ETGE के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने तुर्की के छह प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। इनमें सत्तारूढ़ जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AK Parti), नेशनलिस्ट मूवमेंट पार्टी (MHP), रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (CHP), गुड पार्टी (İYİ Parti), ग्रेट यूनिटी पार्टी (BBP) और अनाहतार पार्टी शामिल हैं।इन बैठकों में अनाहतार पार्टी के अध्यक्ष यावुज आगिरालिओग्लू, AK पार्टी के उपाध्यक्ष कुर्शाद जोरुलू, MHP के उपाध्यक्ष मेवलुत काराकाया और İYİ पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल रहे। इसके अलावा BBP के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की गई।प्रतिनिधिमंडल में निर्वासित पूर्वी तुर्किस्तान संसद के सदस्य और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल फंड के अध्यक्ष सेयफुल्लाह अब्दुकादिर शामिल थे। संगठन का कहना है कि इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच पूर्वी तुर्किस्तान के मुद्दे पर समर्थन जुटाना था।
स्वतंत्रता बहाल करने के लिए सौंपा प्रस्ताव
बैठकों के दौरान ETGE ने राजनीतिक नेताओं को एक श्वेतपत्र सौंपा। इसमें संगठन ने दावा किया कि पूर्वी तुर्किस्तान ऐतिहासिक रूप से चीन का हिस्सा नहीं रहा है और उसकी स्वतंत्रता की बहाली ही क्षेत्र की समस्याओं का स्थायी समाधान है।श्वेतपत्र के साथ एक पत्र भी दिया गया, जिसमें कूटनीतिक, संसदीय और कानूनी समर्थन से संबंधित मांगें शामिल थीं।ETGE ने तुर्की से आग्रह किया कि वह अन्य तुर्किक और मुस्लिम देशों को इस मुद्दे पर एकजुट करे। संगठन चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूर्वी तुर्किस्तान की स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया जाए।हालांकि, पूर्वी तुर्किस्तान को स्वतंत्र देश के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नहीं है। चीन शिनजियांग को अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानता है और अलगाववादी गतिविधियों का विरोध करता है।
चीन पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप
ETGE ने चीन पर उइगर मुसलमानों और अन्य तुर्किक समुदायों के खिलाफ गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि शिनजियांग में धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।संगठन ने चीन की नीतियों को औपनिवेशिक नियंत्रण और नरसंहार बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की है।चीन लंबे समय से ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि शिनजियांग में उसकी नीतियां आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद से निपटने तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई हैं।ETGE ने अपनी ओर से अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) में प्रस्तुत शिकायत और संयुक्त राष्ट्र को दी गई याचिका के लिए भी समर्थन मांगा है। हालांकि, इन कानूनी प्रयासों का उल्लेख किसी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा आरोपों पर अंतिम निर्णय दिए जाने के समान नहीं है।
OTS और इस्लामी सहयोग संगठन में पर्यवेक्षक दर्जे की मांग
ETGE ने तुर्किक राज्यों के संगठन (OTS) और इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) में पर्यवेक्षक का दर्जा दिलाने के लिए भी समर्थन मांगा है।संगठन का तर्क है कि उइगर और अन्य तुर्किक समुदायों को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।OTS तुर्किक भाषी देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने वाला संगठन है। इसके सदस्य देशों में तुर्की, अजरबैजान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।ETGE का मानना है कि यदि उसे इन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिनिधित्व मिलता है तो वह पूर्वी तुर्किस्तान से जुड़े मुद्दों को अधिक प्रभावी तरीके से उठा सकेगा। हालांकि, संगठन को ऐसा दर्जा दिए जाने का कोई निर्णय सामने नहीं आया है।
अंकारा में आयोजित हुआ OTS शिखर सम्मेलन
तुर्की की राजधानी अंकारा में 29 और 30 अक्टूबर 2026 को तुर्किक राज्यों के संगठन का 13वां शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। इसकी मेजबानी तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने की।सम्मेलन का विषय तुर्किक देशों के बीच भाषा, विचार और कार्य में एकता को मजबूत करना था। इसमें सदस्य देशों के नेताओं ने क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार, परिवहन, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की।30 अक्टूबर को सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों ने अंकारा घोषणा को स्वीकार किया। इसमें तुर्किक देशों के बीच रणनीतिक सहयोग बढ़ाने और साझा हितों पर समन्वय मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई।
तुर्किक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी चर्चा
राजनीतिक दलों के अलावा ETGE प्रतिनिधिमंडल ने OTS कार्यालय का दौरा किया और तुर्किक विश्व संगठनों तथा युवा संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की।इस दौरान ETGE ने पूर्वी तुर्किस्तान के मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाने में योगदान देने वाले कुछ राजनीतिक नेताओं, लेखकों और मीडिया संस्थानों को सम्मानित भी किया।संगठन ने अनाहतार पार्टी के अध्यक्ष यावुज आगिरालिओग्लू, BBP अध्यक्ष मुस्तफा देस्तिजी, लेखक ताहा किलिंच और क्रीमियन समाचार एजेंसी QHA को अपने 'ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप' सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की।
अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश जारी
ETGE के अध्यक्ष डॉ. ममतिमिन अला ने कहा कि पूर्वी तुर्किस्तान के भविष्य का निर्धारण वहां के लोगों को स्वयं करने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने तुर्की और अन्य तुर्किक तथा मुस्लिम देशों से राजनीतिक समर्थन को ठोस कूटनीतिक कदमों में बदलने की अपील की।ETGE की इन बैठकों को पूर्वी तुर्किस्तान की स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, तुर्की सरकार या संबंधित राजनीतिक दलों की ओर से स्वतंत्रता की मांग को औपचारिक समर्थन देने की पुष्टि नहीं हुई है।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन बातचीत के बाद तुर्की के राजनीतिक दल और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक रुख अपनाते हैं।