यरुशलम: इजरायल में चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच गादी आइसेनकोट की दावेदारी को समर्थन मिलने लगा है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के नेतृत्व वाली बी’याखद पार्टी ने राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के सामने आइसेनकोट को अगली सरकार बनाने की जिम्मेदारी देने की सिफारिश करने का फैसला किया है। यायर लैपिड भी इसी राजनीतिक गुट का हिस्सा हैं। हालांकि, समर्थन की यह घोषणा सरकार गठन की गारंटी नहीं है; बहुमत का समीकरण अभी सुलझना बाकी है। 
बेनेट की पार्टी ने रविवार, एक नवंबर को अपना रुख स्पष्ट किया। पार्टी के बयान के अनुसार, बेनेट ने चुनाव अभियान के दौरान मतदाताओं के निर्णय का सम्मान करने की बात कही थी और उसी आधार पर आइसेनकोट का समर्थन किया है। उन्होंने अपने फैसले की जानकारी आइसेनकोट को भी दी। इससे नेतन्याहू विरोधी खेमे में प्रधानमंत्री पद के लिए साझा चेहरे पर सहमति बनाने की कोशिश को बल मिला है। 
आइसेनकोट की याशार पार्टी विपक्षी खेमे की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, उसे 21 सीटें मिली हैं, जबकि बेनेट और लैपिड की बी’याखद को 12 सीटें हासिल हुई हैं। आइसेनकोट का रुख रहा है कि विपक्षी खेमे की सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए उसका उम्मीदवार होना चाहिए। बेनेट के समर्थन से इस दावे को राजनीतिक आधार मिला है। 
सोमवार, दो नवंबर को अविगदोर लिबरमैन ने भी आइसेनकोट के समर्थन की घोषणा कर दी। उनकी यिसराइल बेतेनु पार्टी राष्ट्रपति के समक्ष आइसेनकोट की सिफारिश करेगी। लिबरमैन ने इसके साथ यायर लैपिड को कनेसेट, यानी इजरायली संसद का अध्यक्ष बनाने का समर्थन किया। इस घोषणा से विपक्ष के भीतर प्रधानमंत्री पद और संसदीय नेतृत्व, दोनों पर समन्वय बनाने की दिशा सामने आई है। डेमोक्रेट्स पार्टी ने भी आइसेनकोट को सरकार गठन का उम्मीदवार बनाने की सिफारिश करने की घोषणा की है। इस तरह नेतन्याहू विरोधी दल एक साझा नाम के पीछे जुटते दिख रहे हैं। लेकिन उनके सामने अगली चुनौती यह तय करना है कि सरकार किन दलों के सहयोग से बनेगी और साझा नीतिगत कार्यक्रम क्या होगा। उम्मीदवार पर सहमति और टिकाऊ गठबंधन पर सहमति दो अलग चरण हैं। 
चुनावी अंकगणित फिलहाल किसी पक्ष को आसान रास्ता नहीं देता। नेतन्याहू के खेमे को 53 और विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिली हैं। 120 सदस्यीय कनेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटें आवश्यक हैं। इसलिए विपक्षी दलों का आपसी समर्थन बढ़ने के बावजूद अतिरिक्त सहयोग के बिना आइसेनकोट के नेतृत्व में बहुमत वाली सरकार बनना संभव नहीं होगा। अरब दलों के संभावित समर्थन को लेकर विपक्ष के भीतर मतभेद बने हुए हैं। लिबरमैन ने नेतन्याहू के साथ सरकार में शामिल होने और अरब दलों के समर्थन पर निर्भर अल्पमत सरकार, दोनों विकल्पों को खारिज किया है। दूसरी ओर, कुछ विपक्षी नेता अरब दलों के सहयोग से नेतन्याहू को सत्ता से हटाने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। यही असहमति सरकार गठन की बातचीत को जटिल बना रही है। 
राष्ट्रपति के साथ दलों के परामर्श अगले महत्वपूर्ण चरण होंगे। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, ये बातचीत बुधवार से शुरू होने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया में दल बताएंगे कि वे किस नेता को सरकार बनाने की जिम्मेदारी दिए जाने का समर्थन करते हैं। राष्ट्रपति के सामने की गई सिफारिश राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगी, लेकिन उसके बाद भी गठबंधन के लिए आवश्यक समर्थन और समझौते जुटाने होंगे। विपक्षी नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए संयुक्त बैठक की तैयारी भी की गई है। दो नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, आइसेनकोट, बेनेट, लैपिड, लिबरमैन और यायर गोलान की मंगलवार सुबह बैठक प्रस्तावित थी। यह चुनाव के बाद उनकी पहली संयुक्त बैठक बताई गई। हालांकि, उपलब्ध जानकारी बैठक की घोषणा तक सीमित है; उसमें किसी अंतिम गठबंधन समझौते पर पहुंचने की पुष्टि नहीं है। 
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