क्वेटा : 30 अक्टूबर 2026। पाकिस्तान के बलूचिस्तान और आसपास के बलूच आबादी वाले इलाकों में उच्च शिक्षा की सुविधाओं की कमी को लेकर छात्र संगठनों की चिंता बढ़ती जा रही है। बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (BSAC) ने जैकोबाबाद और नसीराबाद जैसे क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों की स्थापना की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी के कारण बड़ी संख्या में युवाओं को अपनी पढ़ाई जारी रखने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों को विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना और मुश्किल हो जाता है।
बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी लंबे समय से बलूचिस्तान में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर अभियान चला रही है। संगठन का आरोप है कि क्षेत्र में विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की संख्या स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नहीं है। इसके अलावा कई शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी, आधारभूत सुविधाओं का अभाव और प्रशासनिक समस्याएं भी विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं।
संगठन ने नसीराबाद क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग पहले भी उठाई थी। मई 2023 में BSAC ने सोशल मीडिया पर विशेष अभियान शुरू करते हुए नसीराबाद में उच्च शिक्षा संस्थान खोलने की आवश्यकता बताई थी। संगठन ने कहा था कि बड़ी आबादी वाला क्षेत्र होने के बावजूद नसीराबाद विश्वविद्यालय स्तर की सुविधाओं से वंचित है। इस अभियान में विद्यार्थियों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से समर्थन की अपील की गई थी।
नसीराबाद बलूचिस्तान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जबकि जैकोबाबाद पड़ोसी सिंध प्रांत में स्थित है। इन इलाकों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच का सवाल लंबे समय से महत्वपूर्ण बना हुआ है। विश्वविद्यालयों की सीमित उपलब्धता का असर विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों पर पड़ सकता है।
छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूसरे शहरों में जाना हर परिवार के लिए संभव नहीं होता। बाहर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश शुल्क के साथ छात्रावास, भोजन, परिवहन और दैनिक जरूरतों पर भी खर्च करना पड़ता है। जिन परिवारों की आमदनी सीमित है, उनके लिए यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ गंभीर चुनौती बन सकता है।
इस समस्या का असर छात्राओं की उच्च शिक्षा पर भी पड़ सकता है। कई परिवार अपनी बेटियों को दूर स्थित शहरों में भेजने में सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी कठिनाइयों का सामना करते हैं। स्थानीय स्तर पर विश्वविद्यालय उपलब्ध होने से छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
BSAC का कहना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना केवल विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। विश्वविद्यालयों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, कृषि, शिक्षा और अन्य विषयों में अध्ययन तथा अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
संगठन ने बलूचिस्तान की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपने पूर्व अभियानों में भी गंभीर सवाल उठाए हैं। जुलाई 2025 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, BSAC ने अपने सर्वेक्षण के आधार पर दावा किया था कि बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में विद्यालय बंद या निष्क्रिय हैं। संगठन ने शिक्षकों की अनुपस्थिति, विद्यार्थियों के घटते नामांकन और बुनियादी सुविधाओं की कमी को प्रमुख समस्याओं के रूप में चिह्नित किया था। हालांकि, ये संगठन के सर्वेक्षण और आरोपों पर आधारित निष्कर्ष थे।
सितंबर 2026 में संगठन ने अपने नए सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि कम से कम 11 जिलों में 55 से अधिक विद्यालयों का निरीक्षण किया गया। इनमें 24 विद्यालय पूरी तरह बंद मिले, जबकि 29 विद्यालयों में गंभीर समस्याएं सामने आईं। BSAC के मुताबिक, कई विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल, शौचालय, फर्नीचर और नियमित शिक्षकों जैसी सुविधाओं का अभाव था।
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संगठन ने नसीराबाद के अतिरिक्त राखशान डिवीजन और वध जैसे क्षेत्रों में नए विश्वविद्यालय परिसरों की स्थापना की मांग भी की है। उसका कहना है कि दूरदराज के इलाकों में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार किए बिना समान शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना कठिन होगा।
बलूचिस्तान के खुजदार क्षेत्र में स्थित सिकंदर विश्वविद्यालय का मुद्दा भी छात्र संगठनों ने उठाया है। जून 2024 में BSAC ने विश्वविद्यालय को सक्रिय करने की मांग को लेकर शैक्षणिक मार्च और धरना आयोजित किया था। संगठन का आरोप था कि विश्वविद्यालय का बुनियादी ढांचा तैयार होने के बावजूद शैक्षणिक गतिविधियां शुरू नहीं हो सकी थीं।
शिक्षा संबंधी सुविधाओं के अभाव को लेकर संगठन ने पुस्तकालयों की स्थिति पर भी चिंता जताई है। जुलाई 2026 में BSAC ने बलूचिस्तान लाइब्रेरी अभियान शुरू किया। इसके तहत बंद पुस्तकालयों को दोबारा खोलने, निष्क्रिय पुस्तकालयों को संचालित करने और विद्यार्थियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की गई।
संगठन ने नसीराबाद के सार्वजनिक पुस्तकालय की स्थिति का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, बिजली और पंखे जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। BSAC के अनुसार, भीषण गर्मी वाले क्षेत्र में ऐसी सुविधाओं के बिना विद्यार्थियों के लिए अध्ययन करना बेहद कठिन हो जाता है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापित करने के साथ पर्याप्त वित्तीय संसाधन, योग्य शिक्षक, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और छात्रावास जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराना जरूरी है। केवल विश्वविद्यालय भवन का निर्माण शिक्षा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
इसके लिए स्पष्ट शैक्षणिक नीति, नियमित बजट और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की भी आवश्यकता होती है। स्थानीय जरूरतों के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार करने और रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण को बढ़ावा देने से युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार हो सकता है।
BSAC ने शिक्षा को नागरिकों का बुनियादी अधिकार बताते हुए सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि विद्यार्थियों को उनकी आर्थिक स्थिति या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।
फिलहाल जैकोबाबाद और नसीराबाद में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना के संबंध में किसी नई सरकारी मंजूरी, बजट आवंटन या निर्माण कार्यक्रम की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विद्यार्थियों की नजर संबंधित प्रांतीय सरकारों और शिक्षा विभागों के आगामी निर्णयों पर रहेगी।
उच्च शिक्षा की सुविधाओं में सुधार की मांग यह सवाल भी सामने लाती है कि दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर कैसे उपलब्ध कराए जाएं। छात्र संगठनों के अनुसार, विश्वविद्यालयों का विस्तार, मौजूदा शिक्षण संस्थानों में सुधार और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए सहायता योजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।