काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद तबाही का मंजर अभी खत्म नहीं हुआ है। बाढ़ प्रभावित इलाकों से लगातार शव बरामद होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर 1,377 हो गई है। वहीं 5,130 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल के गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों में इसकी पुष्टि की गई है।

आपदा प्रभावित इलाकों में सुरक्षाबलों की संयुक्त टीमें बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। भारी मात्रा में जमा कीचड़, मलबे और टूटे हुए ढांचों के बीच लापता लोगों की तलाश की जा रही है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल नष्ट होने से राहत एवं बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 13,656 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। मृतकों में सबसे अधिक 364 शव चितवन से बरामद किए गए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व से 228, नवलपरासी पश्चिम से 222, नुवाकोट से 198 और रसुवा से 178 शव बरामद किए गए हैं। गोरखा में 77, धादिंग में 70 और तनहूं में 38 लोगों के शव मिले हैं। यह विनाशकारी आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुई बर्फ और चट्टानों की विशाल एवलांच के बाद शुरू हुई थी। इससे भोटेकोशी नदी में अचानक पानी और मलबे का विशाल सैलाब आ गया। तेज बहाव ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों में घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों को बहा दिया। जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा।
सबसे बड़ी चुनौती अब हजारों लापता लोगों को तलाशने की है। कई शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। शवों और मानव अवशेषों की पहचान के लिए डीएनए जांच का सहारा लिया जा रहा है। नेपाल की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं पर बड़ी संख्या में नमूने पहुंचने के कारण दबाव बढ़ गया है।
भारत समेत कई देशों की टीमें नेपाल की मदद कर रही हैं। भारतीय विशेषज्ञों सहित अंतरराष्ट्रीय बचाव दल सुरंगों और दुर्गम क्षेत्रों में अभियान चला चुके हैं। नेपाल ने हाई-कैपेसिटी ड्रोन, डीएनए टेस्टिंग किट, बेली ब्रिज और विशेष मड तथा टनल रेस्क्यू उपकरण जैसी अतिरिक्त सहायता भी मांगी है। नेपाल में अब पूरा ध्यान लापता लोगों की तलाश, शवों की पहचान, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने और तबाह हुई सड़क, बिजली तथा संचार व्यवस्था को बहाल करने पर है। अधिकारियों का कहना है कि सर्च और सत्यापन जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में आगे भी बदलाव हो सकता है।
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