न्यूयॉर्क। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार और इसके विस्तार की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जाना चाहिए। लावरोव ने पश्चिमी देशों को अतिरिक्त सीटें देने का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सुरक्षा परिषद में पश्चिम का प्रतिनिधित्व पहले से ही जरूरत से ज्यादा है।शनिवार को न्यूयॉर्क में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा व्यवस्था और सुरक्षा परिषद की संरचना पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दुनिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और ऐसे में संयुक्त राष्ट्र को भी नई वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप खुद को ढालने की जरूरत है।
लावरोव ने कहा, "हमें अपने संगठन को नई वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने की भी जरूरत है, जिसमें सुरक्षा परिषद में सुधार और एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से और प्रतिनिधियों को शामिल करने के लिए इसका विस्तार करना शामिल है।"रूसी विदेश मंत्री ने अपने बयान में विकासशील देशों और अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में बदलाव कर ऐसे देशों को अधिक स्थान मिलना चाहिए जिनका प्रतिनिधित्व अभी पर्याप्त नहीं है।
लावरोव ने पश्चिमी देशों को सुरक्षा परिषद में अतिरिक्त सीटें दिए जाने का स्पष्ट रूप से विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पहले से ही पर्याप्त से अधिक प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। ऐसे में भविष्य में होने वाला विस्तार दूसरे क्षेत्रों के देशों की भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित होना चाहिए।उन्होंने कहा, "हम पश्चिम के लिए और सीटें नहीं दे सकते, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों का प्रतिनिधित्व पहले से ही जरूरत से ज्यादा है।"लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र को सभी देशों के हितों के बीच तालमेल स्थापित करने वाला प्रभावी वैश्विक मंच बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में जिस भूमिका की कल्पना की गई है, संगठन को उसी दिशा में काम करना चाहिए।
रूसी विदेश मंत्री के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र को ऐसा वास्तविक केंद्र बनना चाहिए जहां अलग-अलग देशों के हितों के बीच संतुलन और समन्वय स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र सचिवालय भी रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।लावरोव ने कहा, "हम चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सभी देशों के हितों में तालमेल बिठाने का एक वास्तविक केंद्र बने, जैसा कि इसके चार्टर में कहा गया है। और इसमें, निश्चित रूप से, संयुक्त राष्ट्र सचिवालय भी रचनात्मक योगदान दे सकता है।"
हालांकि इसके साथ ही रूसी विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के नेतृत्व वाली मौजूदा टीम की आलोचना भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान टीम संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मुख्य आवश्यकताओं को लागू करने में सफल नहीं रही है।लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर को संगठन के अस्तित्व का आधार बताते हुए कहा कि इसकी मूल भावना और आवश्यकताओं के अनुरूप काम किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा नेतृत्व इस जिम्मेदारी को प्रभावी तरीके से पूरा नहीं कर पाया है।
उन्होंने कहा, "हालांकि, दुर्भाग्य से, एंटोनियो गुटेरेस के नेतृत्व वाली मौजूदा टीम उस दस्तावेज की मुख्य जरूरतों को लागू करने में असमर्थ है जो संगठन के अस्तित्व का आधार है।"रूसी विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के भीतर पक्षपाती रवैये और दोहरे मापदंडों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनके मुताबिक इसका फायदा पश्चिमी देशों के समूह को मिल रहा है।लावरोव ने कहा, "इसके बजाय, वे पक्षपाती रवैये और दोहरे मापदंडों को बढ़ावा दे रहे हैं, और असल में पश्चिमी देशों के समूह के हितों को साध रहे हैं।"
उनकी यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर लंबे समय से जारी वैश्विक बहस के बीच सामने आई है। लावरोव ने अपने बयान में विशेष रूप से एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की वकालत की।रूस की ओर से पेश किए गए इस रुख में सुरक्षा परिषद के विस्तार को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से जोड़कर देखा गया है। लावरोव के अनुसार दुनिया की मौजूदा वास्तविकताओं को संयुक्त राष्ट्र की संरचना में भी जगह मिलनी चाहिए और इसी आधार पर सुरक्षा परिषद में बदलाव किए जाने चाहिए।उन्होंने पश्चिमी देशों के लिए अतिरिक्त सीटों की संभावना को खारिज करते हुए कहा कि भविष्य के विस्तार में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए जिनका प्रतिनिधित्व कम है। उनके बयान का मुख्य जोर विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर रहा।
लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र को सभी देशों के हितों के बीच समन्वय स्थापित करने वाला मंच बनाने की बात भी दोहराई। उनके अनुसार संयुक्त राष्ट्र की भूमिका किसी एक समूह के हितों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि संगठन को अपने चार्टर में तय उद्देश्यों के अनुरूप सभी सदस्य देशों के लिए काम करना चाहिए।इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सचिवालय से रचनात्मक योगदान की उम्मीद जताई, लेकिन वर्तमान नेतृत्व के कामकाज पर असंतोष भी व्यक्त किया। गुटेरेस के नेतृत्व वाली टीम को लेकर उनकी टिप्पणी काफी आलोचनात्मक रही और उन्होंने उस पर पक्षपाती रवैया अपनाने तथा दोहरे मापदंडों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर लावरोव की मांग का केंद्र प्रतिनिधित्व का मुद्दा रहा। उन्होंने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना होगा।
कुल मिलाकर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार और विस्तार की मांग करते हुए एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की वकालत की है। उन्होंने पश्चिमी देशों के लिए अतिरिक्त सीटों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि उनका प्रतिनिधित्व पहले ही जरूरत से ज्यादा है। साथ ही लावरोव ने एंटोनियो गुटेरेस के नेतृत्व वाली मौजूदा संयुक्त राष्ट्र टीम की आलोचना करते हुए उस पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मूल आवश्यकताओं को प्रभावी तरीके से लागू नहीं करने और पश्चिमी देशों के हितों के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया।लावरोव का UNSC में पश्चिमी प्रतिनिधित्व को लेकर यह दावा उनका राजनीतिक आकलन है; संयुक्त राष्ट्र महासचिव गुटेरेस ने भी हाल में सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता की बात कही है, विशेष रूप से अफ्रीका के स्थायी प्रतिनिधित्व की कमी को रेखांकित किया है।