अचानक बदला फैसला, चोटी पर पहुंचे निर्मल पुरजा

Update: 2026-08-01 14:47 GMT

वर्ल्ड: दुनिया के महान पर्वतारोहियों में शामिल निर्मल निम्स पुरजा अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुलाम कश्मीर स्थित ब्रॉड पीक पर आए भीषण हिमस्खलन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। उनकी कंपनी ‘एलीट एक्सपेड’ ने शनिवार को उनके निधन की पुष्टि की। इस हादसे में उनके साथ गए अन्य पर्वतारोहियों और गाइडों के भी जीवित नहीं बचने की आशंका जताई जा रही है।

निर्मल पुरजा की मौत के बाद उनकी आखिरी पर्वत यात्रा को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। खासकर उनका वह सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है, जिसमें उन्होंने बताया था कि शुरुआत में ब्रॉड पीक पर चढ़ाई करना उनके प्लान का हिस्सा नहीं था। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर उन्होंने अचानक अपना फैसला क्यों बदला और ब्रॉड पीक की तरफ कदम क्यों बढ़ाए।

जानकारी के अनुसार, निर्मल पुरजा पाकिस्तान सिर्फ गैशरब्रूम-2 (G2) पर्वत की चढ़ाई के लिए गए थे। लेकिन वहां पहुंचने से पहले उन्होंने अपने 8000 मीटर से अधिक ऊंची चोटियों के अभियान को लेकर दोबारा गणना की। उन्हें महसूस हुआ कि अगर वह ब्रॉड पीक पर भी सफलता हासिल कर लेते हैं तो उनके सामने सिर्फ चो ओयू पर्वत की चढ़ाई बाकी रह जाएगी।

अगर वह ऐसा कर लेते तो बिना ऑक्सीजन के दुनिया की सभी 14 सबसे ऊंची चोटियों को दो बार फतह करने वाले दुनिया के पहले पर्वतारोही बन सकते थे। इसी ऐतिहासिक उपलब्धि के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने ब्रॉड पीक अभियान का फैसला लिया था।

हालांकि, गुरुवार को ब्रॉड पीक पर अचानक आए बड़े हिमस्खलन ने इस अभियान को त्रासदी में बदल दिया। शुरुआत में उनके ट्रैकिंग डिवाइस में हलचल दिखाई दी थी, जिससे उनके सुरक्षित होने की उम्मीद बनी हुई थी। लेकिन समय बीतने के साथ उम्मीदें कमजोर होती गईं। बाद में बेस कैंप से ड्रोन की मदद से की गई तलाश में कैंप-1 के पास कुछ पर्वतारोहियों के शव दिखाई दिए।

बचाव दल के अनुसार, इस हिमस्खलन में करीब 10 पर्वतारोहियों के मारे जाने की आशंका है। मृतकों में निर्मल पुरजा के अलावा किली पेम्बा शेरपा, निमा शेरपा और वांग झोंग के नाम भी सामने आए हैं।

निर्मल पुरजा का जीवन संघर्ष और उपलब्धियों से भरा रहा। नेपाल में जन्मे पुरजा ने करीब 16 साल तक सेना में सेवा दी। उन्होंने 6 साल प्रतिष्ठित गोरखा रेजिमेंट में और 10 साल ब्रिटेन की स्पेशल फोर्सेज (SBS) में काम किया। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें ब्रिटेन के प्रतिष्ठित सम्मान ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर (MBE) से भी सम्मानित किया गया था।

साल 2019 में निर्मल पुरजा ने पर्वतारोहण की दुनिया में इतिहास रच दिया था। उन्होंने महज सात महीने से भी कम समय में दुनिया की सभी 14 सबसे ऊंची चोटियों, जिनकी ऊंचाई 8000 मीटर से ज्यादा है, को फतह कर लिया था। उनके इस रिकॉर्ड पर नेटफ्लिक्स ने ‘14 पीक्स: नथिंग इज इम्पॉसिबल’ नाम से डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी।

पुरजा के पर्वतारोहण सफर की शुरुआत भी बेहद खास रही। साल 2012 में वह सामान्य ट्रेकिंग के लिए एवरेस्ट बेस कैंप गए थे, लेकिन वहां उन्होंने वापस लौटने के बजाय एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने का फैसला किया। यही फैसला आगे चलकर उन्हें दुनिया के सबसे चर्चित पर्वतारोहियों में शामिल करने वाला साबित हुआ।

अपने करियर में निर्मल पुरजा को कई आलोचनाओं और विवादों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। अपने आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने आलोचकों को जवाब देते हुए अपने संघर्षों का जिक्र किया था।

उन्होंने लिखा था कि जब उन्होंने बिना ऑक्सीजन के 14 चोटियां चढ़ने का अभियान पूरा किया था, तब भी कई लोगों ने उनकी आलोचना की थी। उन्होंने बताया था कि उन्होंने दूसरे अभियानों के दौरान पर्वतारोहियों की जान बचाने में मदद की, खुद फंड जुटाया, रस्सियों की व्यवस्था की और कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया।

निर्मल पुरजा की कहानी साहस, जुनून और असंभव को संभव करने की कोशिश की मिसाल रही। ब्रॉड पीक की यह आखिरी यात्रा भले ही दुखद अंत के साथ खत्म हुई, लेकिन पर्वतारोहण की दुनिया में उनका नाम हमेशा प्रेरणा के रूप में याद किया जाएगा।

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