नई दिल्ली: 'बिज़नेस एंड ह्यूमन राइट्स रिसोर्स सेंटर' (BHRRC) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका के मिनरल सेक्टर में चीनी निवेश की जांच-पड़ताल बढ़ रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पूरे महाद्वीप में माइनिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़े पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप बढ़ गए हैं।
अमेरिका स्थित ADF (अफ्रीका डिफेंस फोरम) द्वारा बताई गई रिपोर्ट में पाया गया कि अफ्रीका में चीनी माइनिंग ऑपरेशन्स से जुड़े आरोप दोगुने से ज़्यादा हो गए हैं - 2024 में 45 मामलों से बढ़कर 2025 में 100 मामले हो गए।
ये आरोप मुख्य रूप से कोबाल्ट, कॉपर, लिथियम और निकेल जैसे ज़रूरी मिनरल्स (critical minerals) निकालने से जुड़े हैं। ये मिनरल्स इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और दूसरी ऐसी टेक्नोलॉजी के लिए ज़रूरी हैं जो दुनिया भर में क्लीन एनर्जी की ओर बदलाव (clean energy transition) को बढ़ावा दे रही हैं।
"शिफ्टिंग ग्राउंड: ह्यूमन राइट्स, चाइनीज़ इन्वेस्टमेंट एंड द रश फॉर ट्रांज़िशन मिनरल्स" नाम की इस रिपोर्ट में 2023 और 2025 के बीच दुनिया भर में ट्रांज़िशन मिनरल प्रोजेक्ट्स में शामिल चीनी कंपनियों से जुड़े पर्यावरण और मानवाधिकारों के उल्लंघन के 326 आरोपों का ज़िक्र किया गया है। इनमें से 119 आरोप अफ्रीका से जुड़े थे, जो कुल वैश्विक आरोपों का लगभग 37 प्रतिशत है।
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो में सबसे ज़्यादा 52 आरोप दर्ज किए गए, इसके बाद ज़िम्बाब्वे में 20, गिनी में 18, ज़ाम्बिया में 15 और नामीबिया में आठ आरोप दर्ज किए गए।
रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे ज़रूरी मिनरल्स के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है, माइनिंग ऑपरेशन्स के पास रहने वाले समुदायों को रिसोर्स निकालने की वजह से पर्यावरण और सामाजिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, माइनिंग गतिविधियों का तेज़ी से विस्तार विदेशी ताकतों और अफ्रीकी सरकारों के बीच बढ़ते स्ट्रैटेजिक मिनरल समझौतों के साथ-साथ हो रहा है।
आलोचकों का कहना है कि ऐसे कई समझौतों पर प्रभावित समुदायों से सार्थक बातचीत किए बिना बातचीत की जाती है और अक्सर इनमें मानवाधिकारों और पर्यावरण की सुरक्षा के मज़बूत उपाय नहीं होते हैं।
अफ्रीका में दुनिया के ज़रूरी मिनरल रिज़र्व का अनुमानित 30-40 प्रतिशत हिस्सा है, जो इसे ग्लोबल एनर्जी ट्रांज़िशन के लिए एक मुख्य सप्लायर बनाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इस महाद्वीप से कच्चे मिनरल्स और धातुओं का सबसे बड़ा निकालने वाला और इम्पोर्टर बना हुआ है और पूरे अफ्रीका में माइनिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एक प्रमुख फाइनेंसर भी है।
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