बीजिंग: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा है कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र को बड़ी शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता तथा भू-राजनीतिक संघर्ष का मैदान नहीं बनना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों के संयुक्त प्रयासों की जरूरत बताई। चिनफिंग ने यह बात सोमवार, दो नवंबर को बीजिंग में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ बातचीत के दौरान कही। उनकी टिप्पणी अमेरिका-ईरान तनाव और क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच आई है। 
चिनफिंग के इस बयान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के संदर्भ में देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक विवरण में इस टिप्पणी के दौरान ट्रंप का नाम लेकर संदेश देने का उल्लेख नहीं है। इसलिए इसे सीधे ट्रंप को दी गई चेतावनी बताने के बजाय क्षेत्र में महाशक्तियों की भूमिका पर चीन के व्यापक कूटनीतिक संदेश के रूप में समझना अधिक सटीक होगा। चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश अरब देशों के साथ संवाद और समन्वय बढ़ाने के लिए तैयार है। इसमें खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों के साथ सहयोग भी शामिल है। उन्होंने क्षेत्र में शांति की बहाली और दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने की इच्छा जताई। चीन का घोषित रुख है कि युद्ध रोकने और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए राजनीतिक तथा कूटनीतिक प्रयास आगे बढ़ने चाहिए। 
सुल्तान हैथम की यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रही। चीन सरकार के अनुसार, दोनों देशों के बीच 48 वर्ष पहले राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद किसी ओमानी राष्ट्राध्यक्ष की यह पहली चीन यात्रा थी। सुल्तान एक से दो नवंबर तक राजकीय दौरे पर रहे। इस दौरान बातचीत में क्षेत्रीय शांति के साथ आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया। चीन और ओमान के संयुक्त बयान में होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य और सुरक्षित नौवहन बहाल करने पर सहमति जताई गई। दोनों देशों ने अमेरिका और ईरान से शांतिपूर्ण विकल्प अपनाने तथा बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। बयान में संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से जून में बनी सहमति पर लौटने का भी आह्वान किया गया। इससे स्पष्ट है कि बैठक का जोर केवल सामान्य शांति संदेश पर नहीं, बल्कि संवाद बहाल करने के ठोस आग्रह पर भी था।
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात में समुद्री आवाजाही की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध से होर्मुज क्षेत्र की आवाजाही प्रभावित हुई है और वैश्विक ऊर्जा तथा माल ढुलाई की लागत पर दबाव पड़ा है। ऐसे में सुरक्षित नौवहन की मांग क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ आर्थिक गतिविधियों से भी जुड़ी हुई है। चीन-ओमान की अपील इसी व्यापक चिंता को सामने रखती है। ओमान ने भी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया। संयुक्त बयान में चीन ने क्षेत्रीय देशों के बीच मतभेद कम करने, भरोसा बढ़ाने और शांति को प्रोत्साहित करने में ओमान की भूमिका की सराहना की। खाड़ी और पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दों पर ओमान के योगदान को महत्वपूर्ण बताया गया। यह समर्थन दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय कूटनीति में सहयोग बढ़ाने की इच्छा को दर्शाता है। 
बीजिंग की सक्रियता राष्ट्रपति स्तर की बैठक तक सीमित नहीं रही। चीन ने घोषणा की है कि उसके पश्चिम एशिया मामलों के विशेष दूत झाई जून नवंबर में ईरान, ओमान और सऊदी अरब का दौरा करेंगे। इस यात्रा की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब क्षेत्र में तनाव घटाने और राजनीतिक समाधान तलाशने की जरूरत पर लगातार जोर दिया जा रहा है। हालांकि, प्रस्तावित दौरे से किसी समझौते का परिणाम पहले से तय नहीं माना जा सकता।  चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भी सोमवार को बीजिंग में ईरानी और सऊदी अधिकारियों के साथ बैठकों के दौरान संवाद का समर्थन किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने संबंधित पक्षों से फिर हथियारों का सहारा लेने के बजाय राजनीतिक समाधान पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। राष्ट्रपति और विदेश मंत्री की समानांतर बैठकों से यह संकेत मिलता है कि चीन क्षेत्रीय संपर्कों को कई स्तरों पर आगे बढ़ा रहा है। 
आर्थिक संबंध भी चीन और ओमान की बातचीत का महत्वपूर्ण आधार हैं। चीन, ओमान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों पक्षों ने तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र में सहयोग गहरा करने के साथ सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बिजली ढांचे और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में संबंध बढ़ाने की इच्छा जताई। इससे द्विपक्षीय एजेंडे में ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य के निवेश, दोनों का महत्व दिखाई देता है।
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