न्यूयॉर्क। 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान न्यूयॉर्क में भारत और कैरिबियन समुदाय (CARICOM) के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाने पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र में सुधार, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद से मुकाबला और सीमा-पार अपराध जैसे विषय बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे।
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और सूरीनाम के विदेश, अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं सहयोग मंत्री मेल्विन डब्ल्यू.जे. बौवा ने की। यह बैठक नवंबर 2024 में गुयाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और CARICOM नेताओं की अध्यक्षता में आयोजित दूसरे भारत-CARICOM शिखर सम्मेलन के बाद हुई। बैठक का उद्देश्य शिखर सम्मेलन में तय प्राथमिकताओं और दोनों पक्षों के बीच सहयोग की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा करना भी रहा।
इस बैठक में कैरिबियन क्षेत्र के कई देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। बारबाडोस, डोमिनिका, बहामास, गुयाना, जमैका, सेंट विंसेंट और ग्रेनाडाइंस, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, हैती, सेंट लूसिया, सेंट किट्स और नेविस तथा एंटीगुआ और बारबुडा के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा ग्रेनाडा के वित्त मंत्री, बेलीज के विदेश मंत्रालय के सीईओ और CARICOM की महासचिव डॉ. कार्ला नताली बार्नेट भी बैठक में मौजूद रहीं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत-CARICOM सहयोग में हो रही लगातार प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। राजनीतिक स्तर पर संपर्क को और मजबूत करने के साथ व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अलावा कृषि और खाद्य सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, जलवायु के प्रति लचीलापन तथा ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत और CARICOM के बीच सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत, जलवायु परिवर्तन से निपटने, आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने और सीमा-पार अपराधों से मुकाबले जैसे मुद्दों पर मिलकर काम जारी रखने पर सहमति जताई। CARICOM पहले भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों की बेहतर भागीदारी की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से जुड़ा रहा। CARICOM ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने का फैसला किया। CARICOM के सह-अध्यक्ष ने समूह के इस फैसले की जानकारी दी। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने CARICOM सदस्य देशों को उनके भरोसे और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।
जयशंकर ने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण की मजबूत आवाज बना रहेगा। उन्होंने भारत और कैरिबियाई देशों के बीच साझा इतिहास और विकास से जुड़ी चुनौतियों के आधार पर बने संबंधों को भी रेखांकित किया। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर बैठक को लेकर कहा कि भारत और कैरिबियाई देशों के बीच साझेदारी साझा इतिहास और विकास की चुनौतियों से उपजी एकजुटता पर आधारित है।
भारत ने CARICOM देशों के साथ अपनी विकास साझेदारी का भी उल्लेख किया। जयशंकर ने स्वास्थ्य सेवा, क्षमता निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की ओर से शुरू की गई पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कई कैरिबियाई देशों में छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) से जुड़ी परियोजनाएं और ‘क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स’ पूरी हो चुकी हैं, जबकि कई अन्य परियोजनाओं पर काम जारी है।
भारत और CARICOM के बीच सहयोग का दायरा हाल के वर्षों में विकास साझेदारी से लेकर व्यापार, स्वास्थ्य, ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्रों तक बढ़ा है। दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक संवाद को नियमित बनाने और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर आपसी समन्वय बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं। CARICOM के लिए जलवायु परिवर्तन और आपदा-रोधी क्षमता जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं, जबकि भारत विकास साझेदारी के तहत स्थानीय जरूरतों के अनुरूप परियोजनाओं पर जोर देता रहा है।
व्यापार और निवेश को लेकर भी बैठक में संभावनाओं पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने और नए क्षेत्रों में सहयोग के अवसर तलाशने की आवश्यकता पर विचार किया। कृषि और खाद्य सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया, क्योंकि दोनों क्षेत्रों के लिए टिकाऊ खाद्य प्रणालियां और आपूर्ति व्यवस्था महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं।
डिजिटल गवर्नेंस भी बैठक के एजेंडे में रहा। भारत अपने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण के अनुभवों को साझेदार देशों के साथ साझा करता रहा है। CARICOM देशों के साथ डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से प्रशासनिक क्षमता, सेवाओं की पहुंच और तकनीकी कौशल को मजबूत करने के अवसर बन सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत और CARICOM के बीच सहयोग का महत्व भी बैठक में सामने आया। कैरिबियाई देशों के लिए जलवायु लचीलापन और आपदा प्रबंधन प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। CARICOM ने इस वर्ष भी जलवायु कार्रवाई और सतत विकास को अपनी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के प्रमुख मुद्दों में रखा है।
भारत-CARICOM बैठक ऐसे समय हुई है जब दोनों पक्ष बहुपक्षीय मंचों पर विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखने पर जोर दे रहे हैं। CARICOM ने हालिया बैठकों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों की प्रतिनिधित्व संबंधी जरूरतों को भी रेखांकित किया है।
इस बैठक से भारत और कैरिबियाई देशों के बीच राजनीतिक संवाद के साथ आर्थिक और विकास सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और अवसर मिला। UNSC की 2028-29 की उम्मीदवारी के लिए CARICOM के समर्थन ने बैठक को विशेष महत्व दिया, जबकि स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि, डिजिटल गवर्नेंस, जलवायु लचीलापन और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में चल रही साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
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