राहत लेने पहुंचे लोगों पर बमबारी, यूक्रेन में 26 की मौत
राहत केंद्र पर हमले से दहला यूक्रेन
कीव: यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी जापोरिज्जिया क्षेत्र में मानवीय सहायता वितरण केंद्र और पास के शरणस्थल पर रूसी बमबारी में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 26 हो गई है। शुरुआती रिपोर्टों में 24 लोगों की मौत बताई गई थी। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, सोमवार, दो नवंबर को कोमिशुवाखा में हुए हमले के बाद मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी रही। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमले की निंदा करते हुए रूस पर तनाव कम करने की कोशिशों के विपरीत कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, जिस स्कूल परिसर को निशाना बनाया गया, उसका इस्तेमाल स्थानीय लोगों को राहत सामग्री देने के लिए किया जा रहा था। युद्ध क्षेत्र के करीब होने के कारण वहां नियमित कक्षाएं नहीं चल रही थीं। परिसर में आसपास बचे हुए निवासियों के लिए सहायता पैकेट वितरित किए जाते थे। जेलेंस्की ने कहा कि लोग हर सप्ताह यहां मानवीय मदद लेने पहुंचते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस को इस स्थान के नागरिक इस्तेमाल की जानकारी रही होगी। इस मंशा संबंधी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जेलेंस्की के अनुसार, सुबह से इलाके में कई बार हवाई बम गिराए गए। पहला हमला उस स्कूल पर हुआ, जिसका इस्तेमाल राहत वितरण के लिए किया जा रहा था। इसके बाद पास के उस शरणस्थल को निशाना बनाया गया, जहां लोग सुरक्षा के लिए पहुंचे थे। यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने भी शुरुआती हमले के बाद नौ अतिरिक्त बम गिराए जाने का आरोप लगाया। हमलों के क्रम और इस्तेमाल किए गए बमों की जानकारी यूक्रेनी पक्ष के बयानों पर आधारित है। रूसी पक्ष की विस्तृत प्रतिक्रिया संबंधित रिपोर्टों में उपलब्ध नहीं थी।
यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के अनुसार, मृतकों में दो बचावकर्मी और चार पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। पांच अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई, जिनमें दो बचावकर्मी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पहली बमबारी के बाद राहत दल और पुलिस मौके पर पहुंचे थे। दोबारा हमले की आशंका पैदा होने पर उन्होंने भी शरण ली, लेकिन उसी क्षेत्र में और बमबारी हुई। इससे राहत पहुंचाने वाले कर्मचारी भी हमले की चपेट में आ गए।
हमले से स्कूल परिसर और आसपास की इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। आपातकालीन सेवा के हवाले से बताया गया कि एक व्यायामशाला, सहायक भवन और दमकल वाहन नष्ट हुए, जबकि स्कूल भवन भी क्षतिग्रस्त हुआ। घटनास्थल से सामने आए दृश्यों में मलबे के बड़े ढेर और उनके बीच काम करते बचावकर्मी दिखाई दिए। अधिकारी लगातार परिसर की तलाशी लेते रहे। इमारतों के ढहने और हमले के बाद की असुरक्षित परिस्थितियों ने तलाश तथा बचाव कार्य को कठिन बनाया।
स्थानीय अधिकारियों ने कई लोगों के लापता होने की भी जानकारी दी है। अलग-अलग समय पर जारी विवरणों में यह संख्या लगभग 20 से 27 के बीच बताई गई। लापता लोगों और मलबे में फंसे होने की आशंका वाले व्यक्तियों की पहचान तथा स्थिति स्पष्ट करने का काम जारी था। इन आंकड़ों को मृतकों की संख्या में नहीं जोड़ा जाना चाहिए। बचाव अभियान के दौरान जानकारी बदल सकती है, इसलिए अंतिम संख्या संबंधित अधिकारियों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।
जेलेंस्की ने इसे बेहद भयावह हमला बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राहत लेने आए लोगों और सुरक्षा के लिए शरण लेने वालों पर बमबारी शांति की दिशा में सकारात्मक संकेत नहीं है। यूक्रेनी विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर दबाव बढ़ाने तथा यूक्रेन का समर्थन जारी रखने की अपील की। मंत्रालय का आरोप है कि राहत वितरण स्थल पर नागरिकों की मौजूदगी के बावजूद हमला किया गया। रूस ने इन विशिष्ट आरोपों पर तत्काल सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की थी।
कोमिशुवाखा लंबे समय से युद्ध के प्रभाव से जूझ रहा है। कीव इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के अनुसार, यह बस्ती अग्रिम मोर्चे से लगभग 20 किलोमीटर दूर है और यहां पहले भी हवाई बमों से हमले होते रहे हैं। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सहायता वितरण केंद्र भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। स्कूल परिसर का मानवीय उपयोग भी इसी परिस्थिति से जुड़ा था। हालांकि, वर्तमान हमले में प्रत्येक मृतक की पहचान और भूमिका का पूरा विवरण तत्काल सामने नहीं आया था।
यह हमला ऐसे समय हुआ, जब दक्षिणी यूक्रेन के एक अन्य क्षेत्र खेरसोन में सीमित मानवीय संघर्षविराम समाप्त हुआ था। उस अस्थायी व्यवस्था से रूसी कब्जे वाले अग्रिम क्षेत्रों में राहत पहुंचाने और लोगों को निकालने की गतिविधियों को अवसर मिला था। कोमिशुवाखा का हमला जापोरिज्जिया में हुआ है, इसलिए दोनों क्षेत्रों और घटनाओं को अलग समझना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का उपचार, लापता लोगों की खोज और मलबे में संभावित जीवित व्यक्तियों तक पहुंचना है। मृतकों की बढ़ी संख्या ने घटना की गंभीरता और बढ़ा दी है।