BIG BREAKING: युद्ध के बीच ईरान ने भारत से की फोन बातचीत

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Update: 2026-03-13 08:37 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का आज 14वां दिन है। इस जंग में दोनों पक्ष लगातार हमलों को तेज कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पद संभालने के बाद पहला सार्वजनिक बयान जारी किया। इस दौरान उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि यदि मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ हमले जारी रहेंगे।
ईरानी विदेश मंत्री का भारत से संवाद
संघर्ष के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर बातचीत की। इस वार्ता में अराघची ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पैदा हुई स्थिति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इन हमलों का न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। अराघची ने जोर देकर कहा कि ईरान सरकार, सेना और जनता अपनी आत्मरक्षा के वैध अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ हो रहे सैन्य हमलों की कड़ी निंदा करें और शांति बनाए रखने में मदद करें।
ब्रिक्स और वैश्विक स्थिरता पर जोर
अराघची ने बातचीत में ब्रिक्स (BRICS) और अन्य बहुपक्षीय संगठन की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उनका कहना था कि वैश्विक स्थिरता बनाए रखने और क्षेत्रीय संकट को नियंत्रित करने में इन संगठनों का महत्वपूर्ण योगदान है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस दौरान ईरान की चिंताओं को सुना और कहा कि भारत क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने सुरक्षा, शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत पर बल दिया।
मिडिल-ईस्ट में हालात और वैश्विक चिंता
अमेरिका और इजरायल के हमले मिडिल-ईस्ट में तनाव को और बढ़ा रहे हैं। नागरिकों की जान-माल को खतरा, इन्फ्रास्ट्रक्चर का नुकसान और लगातार जारी संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष का असर केवल मिडिल-ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। ऐसे हालात में भारत जैसे बड़े और जिम्मेदार देश की कूटनीतिक पहल का महत्व और बढ़ जाता है।
भारत ने हमेशा मिडिल-ईस्ट में शांति बनाए रखने और क्षेत्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की नीति अपनाई है। एस. जयशंकर ने अराघची से वार्ता में इस बात पर जोर दिया कि भारत क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि भारत मानवीय सहायता, शांति संवाद और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए तत्पर है। ब्रिक्स और अन्य बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से भारत इस क्षेत्र में संघर्ष के प्रभाव को कम करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है।
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