वॉशिंगटन: दो डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप प्रशासन के उस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है जिसमें माइक्रोसॉफ्ट और दूसरी टेक्नोलॉजी कंपनियों को नौकरी पर आधारित ग्रीन-कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कदम से अमेरिका में पहले से काम कर रहे कुशल विदेशी पेशेवरों के लिए कानूनी तौर पर बसने के रास्ते खतरे में पड़ सकते हैं।
वॉशिंगटन राज्य की प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल और सुज़ैन डेलबेने ने गुरुवार को कहा कि इन पाबंदियों से अमेरिकी इनोवेशन को नुकसान हो सकता है, परिवारों में परेशानी आ सकती है और स्थायी नागरिकता चाहने वाले कर्मचारियों के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
प्रशासन का यह कदम 'परमानेंट लेबर सर्टिफ़िकेशन प्रोग्राम' (PERM) पर असर डालता है, जिसका इस्तेमाल नियोक्ता कुछ खास तरह के नौकरी-आधारित ग्रीन कार्ड के लिए विदेशी कर्मचारियों को स्पॉंसर करने के लिए करते हैं।
हाउस इमिग्रेशन सब-कमेटी की वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य जयपाल ने कहा कि यह फ़ैसला कानूनी आव्रजन (इमिग्रेशन) को सीमित करने की एक और कोशिश है।
उन्होंने कहा, "इमिग्रेशन सब-कमेटी की शीर्ष डेमोक्रेट सदस्य, कांग्रेस की एकमात्र ऐसी सदस्य जिनके पास कभी H-1B वीज़ा रहा हो, और हज़ारों माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारियों की प्रतिनिधि होने के नाते यह मेरे लिए एक अहम मुद्दा है।"
सिएटल-क्षेत्र के कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट का प्रतिनिधित्व करने वाली भारतीय-अमेरिकी सांसद जयपाल ने कहा कि यह प्रोग्राम अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा करते हुए स्थायी नागरिकता चाहने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए एक स्थापित प्रक्रिया प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, "PERM प्रोग्राम उन अनगिनत कर्मचारियों के लिए नौकरी-आधारित ग्रीन कार्ड की दिशा में पहला कदम है जो इस देश में योगदान देना चाहते हैं। यह एक स्पष्ट प्रक्रिया और चरण तय करता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इससे हमारी अर्थव्यवस्था को कुल मिलाकर फ़ायदा हो और अमेरिकी नौकरियों को कोई नुकसान न पहुँचे।"
उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासन के इस कदम से अप्रवासियों के लिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अपने कौशल का योगदान देना और मुश्किल हो जाएगा।
जयपाल ने कहा, "आप कानूनी आव्रजन पर हथौड़ा चलाकर खराब हो चुके आव्रजन सिस्टम को ठीक नहीं कर सकते।"
उन्होंने आव्रजन सुधार के लिए माइक्रोसॉफ्ट के लंबे समय से चले आ रहे समर्थन का भी बचाव किया और कहा कि कंपनी ने सिस्टम को आधुनिक बनाने और विदेशी कर्मचारियों के लिए कानूनी अवसर बढ़ाने की वकालत की है।
उन्होंने कहा, "इस तरह माइक्रोसॉफ्ट या PERM प्रोग्राम को निशाना बनाना केवल कानूनी आव्रजन को कमज़ोर करता है और इनोवेशन करने की अमेरिका की क्षमता को घटाता है।"
डेलबेने, जिनके संसदीय क्षेत्र में टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की बड़ी मौजूदगी है, ने भी इस सस्पेंशन की निंदा की। उन्होंने कहा, "ट्रंप प्रशासन का आज का कदम उन लोगों पर हमला है जिनके पास पहले से ही H-1B वीज़ा है और जो अमेरिका में रह रहे हैं।"
"कुछ अमेरिकी कंपनियों में कुशल कर्मचारियों के लिए कानूनी ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता मनमाने ढंग से बंद करना, कानून का पक्षपाती और दंडात्मक गलत इस्तेमाल है।"
डेलबेने ने कहा कि इन पाबंदियों से H-1B वीज़ा प्रोग्राम के कथित गलत इस्तेमाल की समस्या हल नहीं होगी।
उन्होंने कहा, "साफ़ बात यह है कि इस कदम का H-1B वीज़ा के कथित गलत इस्तेमाल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"
उन्होंने तर्क दिया कि इसके बजाय, यह फ़ैसला उस स्थापित कानूनी प्रक्रिया को कमज़ोर करेगा जिसके तहत कुशल कर्मचारी अपने परिवारों के साथ अमेरिका में रह सकते हैं।
डेलबेने ने कहा, "इससे हमारी पहले से ही अस्थिर अर्थव्यवस्था में और ज़्यादा अनिश्चितता आएगी, साथ ही इनोवेशन, कॉम्पिटिशन और आखिरकार अमेरिकी कर्मचारियों को नुकसान पहुँचेगा।"
कानून बनाने वालों के ये बयान तब आए जब प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोब और अन्य कंपनियों को PERM प्रोग्राम में हिस्सा लेने से रोक दिया।
इस कदम से मौजूदा H-1B वीज़ा अपने-आप रद्द नहीं होते हैं। इसका तुरंत असर एम्प्लॉयर की उस लेबर सर्टिफ़िकेशन प्रक्रिया तक पहुँच पर पड़ेगा जिसका इस्तेमाल कुछ परमानेंट रेजिडेंसी आवेदनों के लिए किया जाता है।
H-1B प्रोग्राम अमेरिकी एम्प्लॉयर्स को टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक रिसर्च जैसे खास कामों के लिए विदेशी प्रोफेशनल्स को काम पर रखने की इजाज़त देता है।
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