श्री विजय पुरम। भारत की पहली और एकमात्र त्रि-सेवा कमांड, अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) के सिल्वर जुबली समारोह का समापन गुरुवार को हुआ। इन समारोहों के माध्यम से सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल के संयुक्त अभियानों के 25 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। कार्यक्रमों में भारत की समुद्री सुरक्षा में कमांड के योगदान और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के रणनीतिक महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।
समारोह के दौरान वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और अन्य अतिथियों ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा व्यवस्था में अंडमान और निकोबार कमांड की भूमिका पर चर्चा की। इस अवसर पर ‘रणनीतिक सीमा और समुद्री शक्ति के केंद्र के रूप में ANC का भविष्य’ विषय पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें द्वीप समूह के बढ़ते सामरिक महत्व और आने वाले वर्षों में कमांड की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ।
सिल्वर जुबली समारोह के समापन पर श्री विजय पुरम स्थित ब्रिचगंज मिलिट्री स्टेशन में संयुक्त सेवा परेड आयोजित की गई। इसमें सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल के जवानों ने हिस्सा लिया। परेड के दौरान चारों सेवाओं की परंपराओं, अनुशासन और संयुक्त कार्यशैली की झलक देखने को मिली।
भारत की पहली त्रि-सेवा कमांड के 25 साल पूरे
अंडमान और निकोबार कमांड भारत की पहली और एकमात्र त्रि-सेवा कमांड है, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना की क्षमताओं को एकीकृत कमान के तहत संचालित किया जाता है। भारतीय तटरक्षक बल भी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कमांड की 25 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए समारोह में संयुक्त अभियानों, आपसी तालमेल और समुद्री सुरक्षा में इसके योगदान को रेखांकित किया गया। त्रि-सेवा व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न सैन्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और जरूरत के समय संयुक्त रूप से कार्रवाई करने की क्षमता को मजबूत बनाना है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की भौगोलिक स्थिति इसे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है। इस क्षेत्र में कमांड की मौजूदगी से समुद्री गतिविधियों पर निगरानी रखने और सामरिक हितों की सुरक्षा में मदद मिलती है।
समुद्री सुरक्षा में कमांड की भूमिका पर चर्चा
सिल्वर जुबली समारोह के दौरान भारत की समुद्री सुरक्षा में अंडमान और निकोबार कमांड की भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया। हिंद महासागर क्षेत्र में द्वीप समूह की स्थिति भारत के समुद्री हितों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में यहां सैन्य सेवाओं के बीच तालमेल और संचालन क्षमता को मजबूत बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
समारोह में कमांड की अब तक की उपलब्धियों और संयुक्त अभियानों से मिले अनुभवों को याद किया गया। साथ ही, बदलती सुरक्षा परिस्थितियों में कमांड की भविष्य की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल 25 वर्षों की उपलब्धियों को याद करना नहीं था, बल्कि आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा और संयुक्त सैन्य संचालन को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर विचार करना भी था।
सम्मेलन में भविष्य की रणनीतिक भूमिका पर मंथन
‘रणनीतिक सीमा और समुद्री शक्ति के केंद्र के रूप में ANC का भविष्य’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आमंत्रित अतिथि शामिल हुए। सम्मेलन में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बढ़ते रणनीतिक महत्व और भविष्य में कमांड की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया।
चर्चा का प्रमुख विषय यह रहा कि द्वीप समूह की भौगोलिक स्थिति भारत के समुद्री हितों को किस तरह प्रभावित करती है और संयुक्त सैन्य कमान भविष्य में किस प्रकार योगदान दे सकती है। सैन्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय और क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना भी इस चर्चा के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल रहा।
सम्मेलन के माध्यम से कमांड की अब तक की यात्रा और भविष्य की दिशा को एक साथ देखने का अवसर मिला। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सम्मेलन के दौरान लिए गए किसी विशिष्ट निर्णय या नई सैन्य योजना की घोषणा का विवरण नहीं दिया गया है।
ANC की 25 साल की यात्रा पर ‘फर्स्ट डे कवर’ जारी
समारोह के दौरान अंडमान और निकोबार कमांड की 25 वर्षों की यात्रा और समुद्री सुरक्षा में उसके योगदान को याद करते हुए एक विशेष ‘फर्स्ट डे कवर’ भी जारी किया गया। यह आयोजन कमांड के इतिहास और उसके योगदान को सम्मानित करने के प्रयासों का हिस्सा रहा।
फर्स्ट डे कवर के माध्यम से त्रि-सेवा कमांड की स्थापना से लेकर अब तक की यात्रा को याद किया गया। समारोह में इसे कमांड के योगदान और उसकी उपलब्धियों को चिह्नित करने वाले महत्वपूर्ण अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया।
संयुक्त सेवा परेड के साथ समारोह का समापन
गुरुवार को श्री विजय पुरम के ब्रिचगंज मिलिट्री स्टेशन में आयोजित संयुक्त सेवा परेड सिल्वर जुबली समारोह का प्रमुख आकर्षण रही। इसमें सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल की परंपराओं की झलक देखने को मिली।
संयुक्त परेड ने चारों सेवाओं के बीच तालमेल और साझा सैन्य परंपराओं को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, समर्पण और संयुक्त संचालन की भावना को महत्व दिया गया।
अंडमान और निकोबार कमांड के 25 वर्ष पूरे होने का यह समारोह भारत की समुद्री सुरक्षा में उसकी भूमिका को रेखांकित करने वाला अवसर रहा। सम्मेलन, फर्स्ट डे कवर जारी करने और संयुक्त सेवा परेड के जरिए कमांड की उपलब्धियों को याद किया गया। साथ ही, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के रणनीतिक महत्व और आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में कमांड की भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।