दुनिया कोरोना के नए-नए वैरिएंट से आतंकित है। इसी बीच अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कहा है कि कुछ लोगों में सुपर ह्यूमन एंटीबॉडीज का पता चला है जो कोरोना के सभी वैरिएंट को मात दे सकती हैं या न्यूट्रलाइज कर सकती है।

रॉकफेलर यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता और वायरोलॉजिस्ट प्रो. पॉल बेनआसाज का कहना है कि संक्रमण की चपेट में आए कुछ लोगों को टीका लगने पर उनमें एंटीबॉडीज का स्तर अन्य की तुलना में अधिक पाया जा रहा है।
वैज्ञानिक भाषा में एंटीबॉडीज के इस स्तर को सुपर ह्यूमन एंटीबॉडीज कहते हैं, जो दुश्मन के सभी घातक रूपों को निष्क्रिय कर सकती है। इम्युनोलॉजिस्ट प्रो. शेन क्रॉटी का कहना है कि वायरस के खिलाफ जिन लोगों में सुपर ह्यूमन इम्युनिटी बनी है उनका वायरस कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। अब देखना है कि सुपर ह्यूमन एंटीबॉडीज किस तरह के लोगों में विकसित हो रही है और इसका प्रमुख कारण क्या है।
साॅर्स-1 को भी देगा मात
रॉकफेलर यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक प्रो. थियोदोरा हात्जीओनो का कहना है कि ये सुपर ह्यूमन एंटीबॉडीज कोरोना को ही नहीं बीस साल पहले साॅर्स-सीओवी-1 को भी मात दे सकती है। मौजूदा वायरस इसकी तुलना में अलग और खतरनाक था। ये राहत की बात है।
एमआरएनए टीका अत्यधिक प्रभावी
2020 में संक्रमण की चपेट में आने वाले कुछ लोगों को टीके की जब दोनों खुराक लगी तो उनमें एंटीबॉडीज का स्तर अत्यधिक पाया गया। खासकर एमआरएनए आधारित फाइजर और मॉडर्ना का टीका जिन्हें लगा उनमें एंटीबॉडीज का स्तर कई गुना अधिक पाया गया है।

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