बलूचिस्तान। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में कथित ड्रोन हमलों की दो अलग-अलग घटनाओं में तीन नागरिकों की मौत और दो अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की खबर सामने आई है। स्थानीय सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ये घटनाएं जियारत और केच जिलों में हुई हैं। एक हमले में पहाड़ी इलाके में मौजूद चरवाहे की जान चली गई, जबकि दूसरी घटना में एक वाहन को निशाना बनाया गया। स्थानीय सूत्रों ने दूसरे हमले के लिए पाकिस्तानी सेना के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जियारत में ड्रोन हमले से चरवाहे की मौत
'द बलूचिस्तान पोस्ट' की 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पहली घटना बलूचिस्तान के जियारत जिले के अंजारगी इलाके में हुई। यहां एक कथित ड्रोन हमले में एक चरवाहे की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।स्थानीय निवासियों के अनुसार, हमला पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था। घटना के बाद आसपास के लोगों में चिंता का माहौल है।रिपोर्ट में बताया गया कि मृत चरवाहे का शव पहाड़ी इलाके में ही पड़ा था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से शव को निकालने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।हालांकि, शव को बाद में निकाला गया या नहीं, इसकी ताजा आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
केच जिले में वाहन पर कथित ड्रोन हमला
दूसरी घटना केच जिले के दश्तुक सीमावर्ती इलाके में सामने आई है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना के एक ड्रोन ने कथित तौर पर इलाके से गुजर रहे वाहन को निशाना बनाया।हमले में वाहन में सवार दो लोगों की मौत हो गई।मृतकों की पहचान शाह जान और समद जान के रूप में की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, शाह जान के पिता का नाम दाद मोहम्मद और समद जान के पिता का नाम मोहम्मद था।दोनों मृतकों को स्थानीय सूत्रों ने आम नागरिक बताया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वाहन को किस आधार पर निशाना बनाया गया और हमले के समय परिस्थितियां क्या थीं।
पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई पर सवाल
केच जिले में हुए हमले के बाद स्थानीय सूत्रों ने पाकिस्तानी सैन्य बलों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इलाके में ड्रोन और क्वाडकॉप्टर के इस्तेमाल से नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है।हालांकि, जियारत और केच की इन घटनाओं के संबंध में पाकिस्तानी सेना का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है।यह भी स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि हमलों को किस इकाई ने अंजाम दिया। इसलिए सैन्य संलिप्तता और मृतकों की नागरिक स्थिति से जुड़े विवरण फिलहाल स्थानीय सूत्रों के दावे हैं।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
बलूचिस्तान में कथित ड्रोन हमलों से नागरिकों के हताहत होने की खबरें पहले भी सामने आती रही हैं।10 अक्टूबर को मस्तुंग जिले के खड़कूचा इलाके में कथित ड्रोन हमले में दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। स्थानीय लोगों ने घटना को ड्रोन हमला बताया था।इससे पहले अक्टूबर की शुरुआत में पंजगुर जिले में एक विस्फोट से दो बच्चों की मौत और तीन अन्य के घायल होने की खबर आई थी।स्थानीय सूत्रों ने आरोप लगाया था कि विस्फोट पाकिस्तानी सैन्य क्वाडकॉप्टर से जुड़े विस्फोटक के कारण हुआ।इन घटनाओं के कारण नागरिकों की सुरक्षा और सैन्य अभियानों के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सितंबर में चार युवकों की हुई थी मौत
24 सितंबर को केच जिले के बलिचा इलाके में भी कथित सैन्य ड्रोन हमले में चार युवकों की मौत और दो अन्य के घायल होने की खबर सामने आई थी।मृतकों के परिवारों ने दावा किया था कि युवक पहाड़ी इलाके में पिकनिक मनाने गए थे।दूसरी ओर, पाकिस्तानी अधिकारियों ने उस समय मारे गए लोगों को संदिग्ध आतंकवादी बताया था और हथियार बरामद होने का दावा किया था।परिवारों और स्थानीय लोगों ने सरकारी विवरण को खारिज करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी।इस घटना में भी सैन्य अधिकारियों और प्रभावित परिवारों के दावों में अंतर सामने आया था।
नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी हिंसा, सैन्य अभियानों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है।ऐसे हालात में ड्रोन हमलों से नागरिकों की कथित मौतों की खबरें गंभीर चिंता का विषय हैं।मानवाधिकार संगठनों ने भी बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी, गैर-न्यायिक हत्याओं और सुरक्षा अभियानों के दौरान नागरिकों को होने वाले नुकसान को लेकर चिंता जताई है।स्थानीय लोगों की शिकायतों के बीच अब सवाल यह है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं।फिलहाल जियारत और केच में तीन लोगों की मौत तथा दो के घायल होने की खबर स्थानीय रिपोर्टों पर आधारित है। घटनाओं की पूरी परिस्थितियां और जिम्मेदारी तय करने के लिए आधिकारिक जानकारी तथा स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।