इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कथित जबरन विस्थापन, घरों को ध्वस्त करने और बुनियादी सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने के मामलों को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलूच ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में हजारों परिवारों को उनकी पुश्तैनी जमीन और घरों से बेदखल किया जा रहा है। कई इलाकों में लंबे समय से कर्फ्यू और सड़कों पर प्रतिबंध के कारण लोगों को भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सम्मी ने इन कार्रवाइयों को स्थानीय समुदायों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
हजारों परिवारों को पुश्तैनी जमीन छोड़ने पर मजबूर करने का आरोप
16 अक्टूबर 2026 को सामने आए बयान में सम्मी दीन बलूच ने कहा कि बलूचिस्तान में पिछले दो दशकों से विस्थापन की घटनाएं सामने आ रही हैं।उनके मुताबिक, इन घटनाओं के कारण हजारों परिवार अपनी जमीन, मकानों और पारंपरिक आजीविका के साधनों से वंचित हो चुके हैं।सम्मी बलूच, बलूच यकजेहती कमेटी की प्रमुख कार्यकर्ताओं में शामिल हैं। वह जबरन लापता बताए गए डॉ. दीन मुहम्मद बलूच की बेटी हैं।उन्होंने कहा कि किसी परिवार को उसकी पुश्तैनी जमीन से हटाना केवल रहने की जगह बदलने का मामला नहीं है, बल्कि इससे उसकी आजीविका, सामाजिक संबंध और सांस्कृतिक पहचान भी प्रभावित होती है।
मस्तुंग से ग्वादर तक कई इलाकों में बेदखली के आरोप
सम्मी ने बताया कि वर्ष 2026 में मस्तुंग से लेकर ग्वादर तक कई क्षेत्रों में लोगों को घर खाली करने के आदेश दिए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।इनमें शूर पारोद, नुश्की, चगाई और खरान जैसे इलाके शामिल हैं। उनका आरोप है कि कुछ स्थानों पर परिवारों को घर छोड़ने के लिए नोटिस दिए गए, जबकि अन्य क्षेत्रों में बस्तियों और मकानों को ध्वस्त किया गया।कई परिवारों को दूसरी जगह बसने की तैयारी के लिए पर्याप्त समय भी नहीं मिला।सितंबर में कलात जिले के शूर पारोद और गजग क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षा परिस्थितियों का हवाला देते हुए इलाका खाली करने के निर्देश दिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
कर्फ्यू और सड़क बंद होने से खाद्य संकट
बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता ने जेहरी, मशके और जमुरान क्षेत्रों में लंबे समय तक कर्फ्यू और सड़कें बंद रहने की घटनाओं पर भी चिंता जताई।उन्होंने आरोप लगाया कि आवाजाही पर प्रतिबंधों के कारण कई इलाकों में महीनों तक भोजन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई।दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को बाजार, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ी।सम्मी के अनुसार, इस तरह की परिस्थितियां पहले से आर्थिक संकट झेल रहे परिवारों की मुश्किलों को और बढ़ा देती हैं।
खेती और पशुपालन पर निर्भर परिवारों के सामने संकट
सम्मी ने बताया कि बलूचिस्तान के कई गरीब ग्रामीण परिवार छोटी खेती, फसलों और पशुधन पर निर्भर हैं।इनसे होने वाली आमदनी के माध्यम से परिवार भोजन, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और अन्य घरेलू जरूरतों को पूरा करते हैं।उन्होंने कहा कि जब ऐसे परिवारों को अचानक घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, तो उनके सामने रोजगार और आवास की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है।नई जगह पहुंचने के बाद बच्चों की पढ़ाई जारी रखना और पशुओं की देखभाल करना भी चुनौती बन जाता है।
सुरक्षा के नाम पर विस्थापन को लेकर सवाल
बलूच कार्यकर्ता ने कहा कि यदि सुरक्षा कारणों से लोगों को किसी क्षेत्र से हटाना आवश्यक हो, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल निकासी आदेश जारी करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।सरकार को प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित आवास, रोजगार, भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए।साथ ही परिस्थितियां सामान्य होने पर परिवारों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित की जानी चाहिए।दूसरी ओर, बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती पहले शूर पारोद क्षेत्र में प्रस्तावित सैन्य अभियान का हवाला देते हुए लगभग एक हजार निवासियों को दूसरी जगह बसाने की योजना की बात कह चुके हैं।
विस्थापित परिवारों के लिए सुरक्षा और पुनर्वास की मांग
सम्मी दीन बलूच ने प्रशासन से प्रभावित समुदायों की समस्याओं का तत्काल समाधान निकालने की अपील की है।उन्होंने विस्थापित परिवारों के लिए सम्मानजनक आवास, रोजगार, शिक्षा और आवश्यक सुविधाओं की मांग की।उनका कहना है कि किसी भी क्षेत्र में स्थायी शांति तभी स्थापित की जा सकती है, जब स्थानीय लोगों के मौलिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा की जाए।उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीन से जबरन हटाकर स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती।फिलहाल सम्मी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित बेदखली और मकान ध्वस्तीकरण के मामलों में सरकारी अधिकारियों का विस्तृत पक्ष भी सामने नहीं आया है।