सोने की खदानों पर हवाई हमला, सूडान में 72 खनिकों की मौत
सूडान-मिस्र सीमा पर हमला
खार्तूम: अफ्रीकी देश सूडान में सोने की खदानों को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमलों में कम से कम 72 खनिकों की मौत होने की खबर है। यह हमला सूडान और मिस्र की सीमा के पास स्थित विवादित क्षेत्र में हुआ। सूडानी मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी। संगठन ने हमले के लिए मिस्र की वायु सेना को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मिस्र की ओर से इस घटना पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हमला शनिवार सुबह खनन क्षेत्र में किया गया। यहां बड़ी संख्या में छोटे स्तर पर सोने की खुदाई करने वाले मजदूर काम करते थे। हवाई हमले के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। कई लोगों की मौत हुई, जबकि अन्य घायल हुए। दूरदराज के पहाड़ी इलाके में चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण घायलों तक मदद पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण बताया गया है।
सोने की खदानों को बनाया गया निशाना
हमला सूडान-मिस्र सीमा के पास स्थित जबल अल-उकायदात क्षेत्र में हुआ। यह इलाका सोने के भंडार के लिए जाना जाता है और यहां छोटे स्तर पर खनन करने वाले मजदूर बड़ी संख्या में काम करते हैं। यह क्षेत्र सीमाई विवाद और अवैध खनन गतिविधियों के कारण भी चर्चा में रहा है।
मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स के अनुसार, हवाई हमले में नागरिक खनिकों को निशाना बनाया गया। संगठन ने शुरुआती जानकारी के आधार पर 72 लोगों की मौत की बात कही है। साथ ही, मृतकों की संख्या और घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया जारी होने की बात भी सामने आई है। हमले की भयावहता के बीच कई खनिक अपनी जान बचाने के लिए घटनास्थल से भागे। स्थानीय स्तर पर सामने आए विवरणों के मुताबिक, पहाड़ी इलाके में हमले के बाद कई लोग घायल हुए और कुछ लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी। हालांकि, सभी हताहतों की पहचान और घायलों की कुल संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मिस्र की वायु सेना पर लगा हमले का आरोप
इमरजेंसी लॉयर्स ने आरोप लगाया है कि मिस्र के सैन्य विमानों ने सूडान के उत्तरी हिस्से में स्थित खनन क्षेत्र पर हमला किया। संगठन का कहना है कि इस कार्रवाई में नागरिक खनिकों की जान गई। हालांकि, समाचार एजेंसियां हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकी हैं। मिस्र की सरकार की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। इस घटना से पहले जून में भी इसी सीमाई इलाके में खनन करने वालों पर कार्रवाई की खबर आई थी। उस समय मिस्र की सेना ने अपनी सीमा के भीतर अवैध सोने के खनन के खिलाफ बड़े अभियान की जानकारी दी थी। उस अभियान में 223 लोगों को हिरासत में लेने की बात कही गई थी, जिनमें 136 विदेशी नागरिक शामिल थे। हालांकि, जून की कार्रवाई और ताजा हवाई हमले की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।
सीमा विवाद के कारण संवेदनशील है इलाका
सूडान और मिस्र के बीच सीमाई क्षेत्र को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। हलाईब त्रिभुज सहित आसपास का इलाका प्राकृतिक संसाधनों की वजह से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां सोने के भंडार और खनन गतिविधियों ने सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को बढ़ाया है। इस क्षेत्र में सोने का खनन करने वाले कई मजदूर छोटे स्तर पर काम करते हैं। ऐसे काम में अक्सर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होते। दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित उपलब्धता के कारण दुर्घटना या हमले के बाद घायलों को उपचार मिलने में भी देरी हो सकती है। सूडान में अप्रैल 2023 से जारी सेना और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच संघर्ष ने देश की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। युद्ध के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और आजीविका के साधन प्रभावित हुए हैं। ऐसे हालात में कई लोग जोखिम भरे खनन कार्यों की ओर रुख कर रहे हैं।
सोने की तस्करी भी बड़ी चुनौती
सूडान में सोना आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन देश में जारी संघर्ष के दौरान सोने के कारोबार और उसकी तस्करी को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है। संयुक्त राष्ट्र की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, सूडान में उत्पादित सोने का आधे से अधिक हिस्सा देश से बाहर तस्करी के जरिए जाने का अनुमान था। इस कारोबार से जुड़े संसाधनों को लेकर संघर्षरत पक्षों पर भी सवाल उठते रहे हैं। सोने के समृद्ध भंडार वाले क्षेत्रों में नियंत्रण और अवैध कारोबार की समस्या ने पहले से अस्थिर सुरक्षा स्थिति को और जटिल बनाया है। हालांकि, ताजा हमले के पीछे का उद्देश्य क्या था और इसका सोने के कारोबार से कोई सीधा संबंध था या नहीं, इस बारे में अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मृतकों की संख्या की पुष्टि का इंतजार
सूडान की सोने की खदानों पर हुए हवाई हमले में 72 मजदूरों की मौत का आंकड़ा मानवाधिकार संगठन इमरजेंसी लॉयर्स की रिपोर्ट पर आधारित है। इससे पहले सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क ने शुरुआती जानकारी में कम से कम 13 लोगों की मौत और 28 लोगों के घायल होने की बात कही थी। बाद में मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 72 बताया गया। फिलहाल, हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मिस्र की आधिकारिक प्रतिक्रिया और घटनास्थल से मिल रही विस्तृत जानकारी के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना ने सूडान-मिस्र सीमा के विवादित क्षेत्र में काम करने वाले खनिकों की सुरक्षा और वहां जारी संघर्ष से जुड़े जोखिमों को फिर सामने ला दिया है।