ताइपे : 27 अक्टूबर 2026। ताइवान में आगामी स्थानीय चुनावों से पहले चीन पर राजनीतिक हस्तक्षेप और धमकी भरे अभियान चलाने के गंभीर आरोप लगे हैं। ताइवान की सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के सांसद और ताइपे के मेयर पद के उम्मीदवार पुमा शेन को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने के लिए चीन द्वारा दबाव बनाने की कोशिशों का दावा किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों से परिचित एक सूत्र के अनुसार, बीजिंग उन लोगों, कारोबारियों और मनोरंजन जगत की हस्तियों को निशाना बना रहा है, जो शेन के संपर्क में हैं या उनके चुनावी कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।
पुमा शेन को अलग-थलग करने की कोशिश का आरोप
ताइवानी अखबार ताइपे टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन सीधे पुमा शेन पर आर्थिक दबाव बनाने में सीमित सफलता हासिल कर सकता है। इसलिए कथित तौर पर उनके आसपास के लोगों और कंपनियों पर दबाव डालने की रणनीति अपनाई जा रही है।रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से दावा किया गया है कि बीजिंग ऐसे कारोबारियों और सार्वजनिक हस्तियों के व्यावसायिक हितों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, जो शेन के साथ दिखाई देते हैं।इसका कथित उद्देश्य लोगों को शेन के चुनावी अभियान से दूर रखना और उनके लिए राजनीतिक समर्थन जुटाना मुश्किल बनाना है। हालांकि, इस अभियान से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
टीवी होस्ट केविन त्साई के बयान से विवाद
इस विवाद में ताइवान के प्रसिद्ध टेलीविजन होस्ट केविन त्साई का नाम भी सामने आया है।चार अक्टूबर को त्साई ने पुमा शेन के चुनावी अभियान मुख्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लिया था। इसके बाद चीनी सोशल मीडिया और चीन से जुड़े कुछ मंचों पर उनकी आलोचना शुरू हो गई।रविवार रात त्साई ने चीनी सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि उन्होंने कभी ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन नहीं किया है।उनके इस बयान के बाद भी चीन में कुछ व्यावसायिक साझेदार उनसे दूरी बनाते दिखाई दिए। त्साई के प्रबंधक के अनुसार, वह संभावित साक्षात्कार से पहले शेन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
परिवार से जुड़ी कंपनी पर भी प्रतिबंध
पुमा शेन के परिवार से जुड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ चीन की कार्रवाई भी चर्चा में है।14 अक्टूबर को चीन ने शेन के पिता से जुड़ी एक अन्य कंपनी पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थीताइवान की मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल ने आरोप लगाया कि बीजिंग इन आर्थिक प्रतिबंधों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहा है।परिषद के अनुसार, चुनावी माहौल में किसी उम्मीदवार के परिवार और व्यवसायों को निशाना बनाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास हो सकता है।
अमेरिकी संस्थानों की रिपोर्ट में भी उठे सवाल
अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) और अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट (AEI) की रिपोर्ट में भी चीन की कथित दबाव रणनीति का उल्लेख किया गया है23 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग उन ताइवानी नेताओं के रिश्तेदारों और व्यावसायिक हितों को निशाना बनाने की रणनीति बढ़ा रहा है, जिन्हें वह स्वतंत्रता समर्थक मानता है।रिपोर्ट में पुमा शेन को इस प्रकार के दबाव का प्रमुख उदाहरण बताया गया।विश्लेषकों के अनुसार, ऐसी कार्रवाइयों का प्रभाव केवल संबंधित नेता पर नहीं, बल्कि उसके संभावित समर्थकों और सहयोगियों पर भी पड़ सकता है।
चीन के हस्तक्षेप पर पुमा शेन ने जताई चिंता
पुमा शेन ने केविन त्साई के बयान के समय को लेकर सवाल उठाए हैं।उन्होंने कहा कि बयान जारी किए जाने का समय बाहरी प्रभाव से निर्धारित हुआ प्रतीत होता है। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम ताइवानी नागरिकों के स्वतंत्र निर्णय लेने के अधिकार में संभावित हस्तक्षेप को दर्शाता है।हालांकि, शेन ने यह भी स्वीकार किया कि त्साई को बयान जारी करने का निर्देश दिया गया था या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।दूसरी ओर, ताइपे के मौजूदा मेयर च्यांग वान-आन ने भी राजनीतिक विचारों के आधार पर किसी व्यक्ति को धमकाने का विरोध किया है।
चीन और ताइवान के बीच बढ़ता राजनीतिक तनाव
चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और औपचारिक स्वतंत्रता की किसी भी कोशिश का विरोध करता है। वहीं, ताइवान की लोकतांत्रिक व्यवस्था अपने नागरिकों के राजनीतिक अधिकारों और चुनावी स्वतंत्रता पर जोर देती है।ताइवान की सुरक्षा एजेंसियों ने पहले भी चीन पर दुष्प्रचार, साइबर गतिविधियों और राजनीतिक दबाव के जरिए चुनावी वातावरण प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं।21 अक्टूबर को सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने दावा किया कि वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों में चीन से जुड़े संदिग्ध या भ्रामक ऑनलाइन संदेशों की संख्या में लगभग 48 प्रतिशत वृद्धि हुई। चीन पहले चुनावी हस्तक्षेप के आरोपों से इनकार करता रहा है।
आगामी चुनावों पर टिकी निगाहें
ताइवान में नवंबर में होने वाले स्थानीय चुनावों से पहले यह विवाद महत्वपूर्ण बन गया है।राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक प्रतिबंध और सार्वजनिक हस्तियों पर दबाव जैसे आरोप चुनावी स्वतंत्रता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर सकते हैं।फिलहाल पुमा शेन और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ कथित दबाव अभियान को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ताइवान की संबंधित संस्थाएं इन आरोपों की जांच और चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाती हैं।
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